विज्ञापन

धार में कुपोषण की मार: 25 हजार बच्चे कुपोषित, 5 हजार से ज्यादा अति गंभीर श्रेणी में; पोषण व्यवस्था पर उठे सवाल

मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल धार जिले से सामने आए आंकड़े चौंकाने वाले हैं. यहां करीब 25 हजार बच्चे कुपोषण की चपेट में हैं, जबकि 5 हजार से ज्यादा बच्चे अति गंभीर कुपोषण (SAM) श्रेणी में पहुंच चुके हैं.

धार में कुपोषण की मार: 25 हजार बच्चे कुपोषित, 5 हजार से ज्यादा अति गंभीर श्रेणी में; पोषण व्यवस्था पर उठे सवाल
धार में कुपोषण की भयावह तस्वीर, हजारों बच्चे प्रभावित
NDTV
  • धार में कुपोषण का बड़ा संकट, 25 हजार बच्चों की सेहत पर खतरा
  • SAM श्रेणी में 5 हजार बच्चे, स्वास्थ्य विभाग की बढ़ी चिंता
  • आदिवासी जिले में पोषण की चुनौती, 3,863 आंगनवाड़ी केंद्रों पर जिम्मेदारी
धार:

आदिवासी बहुल धार जिले में बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है. विभागीय आंकड़ों के मुताबिक जिले में लगभग 25 हजार बच्चे कुपोषण की समस्या से जूझ रहे हैं. इनमें 5 हजार से अधिक बच्चे अति गंभीर कुपोषित यानी एसएएम (Severe Acute Malnutrition) श्रेणी में हैं. वहीं बड़ी संख्या में बच्चे कम वजन की समस्या से भी प्रभावित हैं. जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग इन्हें चिन्हित कर उपचार और पोषण प्रबंधन की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि चुनौती अभी भी बड़ी बनी हुई है.

25 हजार बच्चों में कुपोषण, 5 हजार से ज्यादा गंभीर श्रेणी में

धार जिले में कुपोषण की समस्या लंबे समय से चिंता का विषय रही है. ताजा विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में करीब 25 हजार बच्चे कुपोषित पाए गए हैं. इनमें से 5 हजार से अधिक बच्चे अति गंभीर कुपोषण यानी एसएएम श्रेणी में हैं. इसके अलावा करीब 19 हजार से अधिक बच्चों को कम वजन की श्रेणी में चिन्हित किया गया है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति दर्शाती है कि बड़ी संख्या में बच्चों को पर्याप्त और संतुलित पोषण नहीं मिल पा रहा है.

कुपोषण का दंश झेल रहा धार

कुपोषण का दंश झेल रहा धार

पोषण पुनर्वास केंद्र में पहुंच रहे गंभीर मामले

जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में गंभीर कुपोषण से प्रभावित बच्चों का उपचार किया जा रहा है. पिछले लगभग पांच महीनों में करीब 250 गंभीर कुपोषित बच्चों को एनआरसी में भर्ती किया गया. यहां भर्ती किए गए बच्चों में उम्र के अनुपात में बेहद कम वजन, गंभीर कमजोरी और संक्रमण जैसी समस्याएं देखी गईं. ऐसे बच्चों को चिकित्सकीय निगरानी में रखकर विशेष पोषण आहार, दवाएं और अन्य जरूरी उपचार उपलब्ध कराए जाते हैं ताकि उनकी सेहत में सुधार लाया जा सके.

उपचार के बाद सुधरी मासूम परी की सेहत

धार जिले के खेड़ी बलवारी गांव की रहने वाली रानूबाई की साढ़े तीन वर्षीय बेटी परी भी गंभीर कुपोषण की शिकार थी. कुपोषण की पहचान होने के बाद उसे उपचार और पोषण पुनर्वास कार्यक्रम से जोड़ा गया. लगातार निगरानी, पौष्टिक आहार और चिकित्सकीय देखरेख के बाद उसके वजन और स्वास्थ्य में सुधार दर्ज किया गया. स्वास्थ्य विभाग ऐसे मामलों को उदाहरण के रूप में देख रहा है कि समय पर पहचान और उपचार से कुपोषण के प्रभाव को कम किया जा सकता है.

Add image caption here

पोषण आहर

बच्चों के साथ माताओं को भी दिया जाता है प्रशिक्षण

जिला अस्पताल का पोषण पुनर्वास केंद्र केवल बच्चों का उपचार ही नहीं करता, बल्कि उनकी माताओं और परिजनों को भी प्रशिक्षण देता है. केंद्र में बच्चों को उच्च प्रोटीन युक्त आहार, मल्टीविटामिन और आवश्यक दवाइयां दी जाती हैं. वहीं डिस्चार्ज के समय माताओं को घर पर उपलब्ध संसाधनों से पौष्टिक भोजन तैयार करने और बच्चों की देखभाल से जुड़ी जानकारी भी दी जाती है. अधिकारियों का मानना है कि कुपोषण से लड़ाई में परिवार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है.

3,863 आंगनवाड़ी केंद्रों से हो रही निगरानी

महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी रामनिवास बुधौलिया के अनुसार धार प्रदेश के सबसे बड़े जिलों में शामिल है और यहां 3,863 आंगनवाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं. उन्होंने बताया कि जिले की बड़ी आबादी और व्यापक भौगोलिक क्षेत्र के कारण बच्चों की संख्या भी अधिक है. विभाग लगातार बच्चों का वजन और स्वास्थ्य संबंधी आंकड़े दर्ज कर कुपोषित बच्चों की पहचान कर रहा है. गंभीर और चिकित्सकीय रूप से ज्यादा प्रभावित बच्चों को एनआरसी भेजा जाता है, जबकि अन्य बच्चों का उपचार और निगरानी समुदाय स्तर पर की जाती है. विभाग का दावा है कि उपचार के बाद 90 प्रतिशत से ज्यादा बच्चों का वजन सुधरने पर उन्हें डिस्चार्ज किया जाता है.

पोषण आहार की आपूर्ति पर उठ रहे सवाल

कुपोषण की चुनौती के बीच पोषण आहार की आपूर्ति को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं. जानकारी के अनुसार पिछले लगभग तीन महीनों तक पोषण आहार की आपूर्ति में व्यवधान सामने आया. छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चों के साथ गर्भवती और धात्री महिलाओं को आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से टेक होम राशन उपलब्ध कराया जाता है. एक्सपर्ट मानते हैं कि आदिवासी और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण है. ऐसे में नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना आवश्यक है.

केवल भोजन नहीं, स्वच्छता और जागरूकता भी जरूरी

महिला एवं बाल विकास विभाग का कहना है कि कुपोषण सिर्फ भोजन की कमी का परिणाम नहीं है. स्वास्थ्य, स्वच्छता, टीकाकरण और जागरूकता भी इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं. विभाग परिवारों से अपील कर रहा है कि बच्चों को पौष्टिक भोजन देने के साथ साफ-सफाई और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों का भी पालन करें.

यह भी पढ़ें : 3 महीने से बच्चों का पोषण आहार बंद : करोड़ों की योजनाओं पर सवाल, विदिशा समेत 8 जिलों में कुपोषण का संकट

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Malnutrition, Malnutrition In Madhya Pradesh, Dhar, Severe Acute Malnutrition, Poshan Aahar
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com