मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्य मंत्री लखन पटेल से पशुपालन एवं डेयरी विभाग वापस लिए जाने के बाद नई चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है. सत्ता और संगठन के गलियारों में इस फैसले को एक सामान्य प्रशासनिक बदलाव से ज्यादा बड़े राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि सरकार और भाजपा संगठन अब मंत्रियों के कामकाज, जनसंपर्क और जमीनी प्रदर्शन का गंभीरता से आकलन कर रहे हैं. ऐसे में कई अन्य मंत्रियों के विभागों में बदलाव या मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें भी तेज हो गई हैं.
लखन पटेल के बाद बढ़ी सियासी हलचल
दरअसल, राज्य मंत्री लखन पटेल से पशुपालन एवं डेयरी विभाग वापस लिए जाने के बाद प्रदेश में राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है. भाजपा संगठन और सरकार के भीतर इस फैसले को लेकर लगातार मंथन की बात कही जा रही है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आने वाले समय में कई अन्य मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा के आधार पर बड़े फैसले लिए जा सकते हैं.
कई मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड पर नजर
सूत्रों और राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार, सरकार और संगठन प्रदेश के कई मंत्रियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि एक दर्जन से अधिक ऐसे मंत्री हैं, जिनके विभागों में बदलाव या उनके भविष्य को लेकर विचार-विमर्श चल रहा है. जमीनी स्तर पर उनकी सक्रियता, योजनाओं के क्रियान्वयन और जनप्रतिनिधियों के साथ तालमेल जैसे पहलुओं को भी समीक्षा का हिस्सा माना जा रहा है.
संगठन और सरकार का स्पष्ट संदेश
लखन पटेल से महत्वपूर्ण विभाग वापस लिए जाने को भाजपा के भीतर एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है. पार्टी नेतृत्व यह दिखाना चाहता है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों के कामकाज की लगातार निगरानी होती है और प्रदर्शन के आधार पर निर्णय लिए जा सकते हैं. इससे अन्य मंत्रियों के बीच भी राजनीतिक हलचल बढ़ गई है.
उमाशंकर गुप्ता ने क्या कहा
लखन पटेल प्रकरण पर भाजपा की ओर से पहली स्पष्ट प्रतिक्रिया वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता की तरफ से सामने आई है. उन्होंने कहा कि सत्ता और संगठन में काम के मूल्यांकन की एक नियमित प्रक्रिया होती है. सरकार समय-समय पर अपने कामकाज की समीक्षा करती है और उसी आधार पर निर्णय लिए जाते हैं.
कांग्रेस ने साधा सरकार पर निशाना
इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस ने भाजपा सरकार और संगठन को घेरने की कोशिश की है. कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता ने दावा किया कि लखन पटेल से विभाग वापस लेने का फैसला अचानक नहीं हुआ है. उन्होंने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई के पीछे कोई बड़ी वजह हो सकती है और भाजपा को इस मामले में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए.
भूपेंद्र गुप्ता ने कहा कि यदि सब कुछ सामान्य था तो फिर मंत्री से विभाग क्यों छीना गया. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा में आमतौर पर न तो आसानी से इस्तीफे लिए जाते हैं और न ही विभागों में बदलाव किए जाते हैं. कांग्रेस का दावा है कि इस फैसले के पीछे कोई बड़ा कारण हो सकता है, जिसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है.
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