Maihar Band National Intangible Cultural Heritage List: मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को एक और बड़ी राष्ट्रीय पहचान मिली है. सतना जिले की मां शारदा की नगरी मैहर की विश्वविख्यात संगीत परंपरा 'मैहर वाद्यवृंद' (मैहर बैंड) को भारत सरकार की राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural Heritage-ICH) सूची में शामिल कर लिया गया है. इस उपलब्धि के साथ मैहर बैंड देश की उन विशिष्ट सांस्कृतिक परंपराओं में शामिल हो गया है, जिन्हें संरक्षित और संवर्धित करने की दिशा में राष्ट्रीय स्तर पर विशेष महत्व दिया जाता है. इससे पहले प्रदेश की भगोरिया नृत्य और गोंड चित्रकला को भी इस प्रतिष्ठित सूची में स्थान मिल चुका है. मैहर बैंड को मिली यह मान्यता न केवल मध्यप्रदेश बल्कि भारतीय शास्त्रीय संगीत जगत के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है.
राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल हुआ मैहर बैंड
अपर मुख्य सचिव संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व और सामान्य प्रशासन शिव शेखर शुक्ला ने मैहर बैंड के प्रतिभावान कलाकारों एवं शासकीय संगीत महाविद्यालय, मैहर को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत सरकार द्वारा मैहर बैंड को राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किए जाने के बाद प्रदेश के कला और संगीत जगत में उत्साह का माहौल है. यह सूची उन परंपराओं, कलाओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को संरक्षण देने के उद्देश्य से तैयार की जाती है, जिनका ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व अत्यधिक होता है. मैहर बैंड को मिली यह मान्यता उसकी एक सदी से अधिक पुरानी संगीत परंपरा और विशिष्ट पहचान की राष्ट्रीय स्वीकृति के रूप में देखी जा रही है.

National Intangible Cultural Heritage List Madhya Pradesh: मैहर बैंड
मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक संरक्षण अभियान को मिली सफलता
संस्कृति विभाग के संचालक एनपी नामदेव ने बताया प्रदेश सरकार लंबे समय से मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक धरोहरों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के प्रयास कर रही है. इसी क्रम में संस्कृति विभाग द्वारा प्रदेश की विभिन्न कला परंपराओं, लोक संस्कृतियों और शास्त्रीय विरासतों को संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार देने के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं. संस्कृति विभाग का मानना है कि मैहर बैंड को राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किया जाना इन प्रयासों की महत्वपूर्ण उपलब्धि है.
मैहर बैंड की प्रस्त़ति, देखिए Video
मैहर में प्रति वर्ष होने वाले ख्यातिलब्ध समारोह उस्ताद अलाउद्दीन खां समारोह की द्वितीय संगीत संध्या का शुभारंभ मैहर बैंड द्वारा बापू महात्मा गांधी के प्रिय भजन " वैष्णव जन को तेने कहिए जे पीर पराई जाने रे,,,की मधुर प्रस्तुति से किया गया। #JansamparkMP pic.twitter.com/0gYFDbJnAK
— Collector Satna (@Collector_Satna) March 18, 2023
1918 में हुई थी मैहर बैंड की स्थापना
मैहर बैंड का इतिहास भारतीय शास्त्रीय संगीत की सबसे गौरवशाली परंपराओं में शामिल है. इसकी स्थापना वर्ष 1918 में महान संगीताचार्य उस्ताद अलाउद्दीन खां ने मैहर रियासत के तत्कालीन शासक महाराजा बृजनाथ सिंह जूदेव के सहयोग से की थी. संगीत विशेषज्ञ इसे दुनिया के शुरुआती शास्त्रीय ऑर्केस्ट्रा स्वरूपों में से एक मानते हैं. यह भारतीय शास्त्रीय संगीत और सामूहिक वादन का अद्वितीय उदाहरण माना जाता है.
टूटी हुई बंदूकों से निकली धुन, देखिए ये वीडियो
ये है भारत के इकलौते शास्त्रीय बैंड “ मैहर बैंड” का अपनी तरह का अनोखा वाद्य यंत्र ‘नाल तरंग' है।
— Gajendra Singh Shekhawat (@gssjodhpur) October 12, 2025
इसे जब पहली बार बनाया गया तब मैहर रियासत की टूटी हुई बंदूकों की नाल का इस्तेमाल किया गया। वास्तव में यह एक असाधारण यंत्र है और इसकी विशिष्टता मैंने स्वयं इसके वादन में हाथ आज़माकर… pic.twitter.com/uhSW50vtuQ
108 वर्षों से जीवित है परंपरा
करीब 108 वर्षों के सफर में मैहर बैंड ने अपनी मौलिकता और शास्त्रीय गरिमा को बनाए रखा है. इस वाद्यवृंद की विशेषता यह है कि इसकी परंपरा गुरु-शिष्य प्रणाली के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती रही है. कलाकारों ने इस धरोहर को संरक्षित रखने के लिए लगातार प्रयास किए हैं. आज भी इसकी प्रस्तुतियां भारतीय शास्त्रीय संगीत प्रेमियों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र होती हैं.

National Intangible Cultural Heritage List Madhya Pradesh: गोंड आर्ट भी इस सूची में है शामिल
नालतरंग बना मैहर बैंड की अनूठी पहचान
मैहर बैंड की सबसे विशेष पहचान इसके दुर्लभ वाद्ययंत्र हैं. इस वाद्यवृंद में सितार, सरोद, इसराज, वायलिन, चेलो, हारमोनियम, तबला और अन्य वाद्यों का संयोजन देखने को मिलता है. इन सबके बीच सबसे अनोखा वाद्य ‘नालतरंग' है. उस्ताद अलाउद्दीन खां ने बंदूक की नालियों को विशेष रूप से स्वरबद्ध कर इस वाद्य का निर्माण किया था. बताया जाता है कि इस प्रकार का वाद्य दुनिया में मैहर बैंड के अलावा कहीं और देखने को नहीं मिलता.
1924 में मिली राष्ट्रीय पहचान
मैहर बैंड की ख्याति राष्ट्रीय स्तर पर वर्ष 1924 में बढ़ी, जब इसने लखनऊ के प्रतिष्ठित भातखंडे समारोह में प्रस्तुति दी. उस प्रस्तुति ने देशभर के संगीत जगत का ध्यान आकर्षित किया और मैहर बैंड की अलग पहचान स्थापित हुई. इसके बाद यह वाद्यवृंद देश के अनेक प्रतिष्ठित सांगीतिक आयोजनों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराता रहा.
'शिखर सम्मान' भी मिल चुका है
मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2016 में मैहर बैंड के योगदान को मान्यता देते हुए इसे प्रदेश के सर्वोच्च सांस्कृतिक सम्मानों में से एक 'शिखर सम्मान' से सम्मानित किया था. यह सम्मान भारतीय संगीत परंपरा के संरक्षण और संवर्धन में उसके योगदान को देखते हुए प्रदान किया गया था.

National Intangible Cultural Heritage List Madhya Pradesh: भगोरिया नृत्य को मिल चुकी है जगह
नई पीढ़ी के लिए बनेगा गुरुकुल
मैहर बैंड की परंपरा को भविष्य में भी जीवित रखने के लिए संस्कृति विभाग ने महत्वपूर्ण पहल शुरू की है. शासकीय संगीत महाविद्यालय, मैहर के माध्यम से एक गुरुकुल स्थापित किया जा रहा है, जहां युवा कलाकारों को मैहर बैंड की विशिष्ट संगीत शैली, बंदिशों और वादन परंपरा का प्रशिक्षण दिया जाएगा. इस पहल का उद्देश्य केवल कलाकार तैयार करना नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाना है.
उत्साह, उल्लास और आनंद का प्रतीक है भील जनजाति का भगोरिया नृत्य। #MPkaJanjatiyaGauravpic.twitter.com/HmADGU4h1n
— Jansampark Dhar । जनसंपर्क धार (@PROJSDhar) November 14, 2022
मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को मिली नई मजबूती
भगोरिया नृत्य, गोंड चित्रकला और अब मैहर बैंड को राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किए जाने से मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और मजबूत हुई है. इस उपलब्धि से मैहर बैंड को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी, वहीं युवा पीढ़ी भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों और शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा से जुड़ सकेगी.
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