Health News: मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले में किडनी से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ती जा रही हैं, जो अब एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन गई हैं. जिला अस्पताल के डायलिसिस यूनिट के आंकड़े इस ओर साफ इशारा कर रहे हैं कि जिले में हर महीने सैकड़ों मरीजों को डायलिसिस की आवश्यकता पड़ रही है. बदलती जीवनशैली, स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही और बिना डॉक्टर की सलाह दवाएं लेने की आदतें इस समस्या को और गंभीर बना रही हैं. खासकर ग्रामीण इलाकों में लोग मामूली दर्द या बुखार में झोलाछाप डॉक्टरों से हाई डोज की दवाएं ले रहे हैं, जिससे किडनी पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है. डॉक्टरों और विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते लोगों में जागरूकता नहीं आई, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और भयावह हो सकती है.
डायलिसिस यूनिट के आंकड़े कर रहे चिंतित
बड़वानी जिला अस्पताल के डायलिसिस यूनिट से सामने आए आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं. जानकारी के अनुसार वर्ष 2026 के मार्च तक 1300 से अधिक डायलिसिस सत्र किए जा चुके हैं. वहीं, हर महीने औसतन 450 से ज्यादा मरीजों को डायलिसिस की जरूरत पड़ रही है. यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है, जिससे यह साफ है कि जिले में किडनी रोग तेजी से पैर पसार रहा है और स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ता जा रहा है.

Kidney Disease: बड़वानी में किडनी रोग के बढ़ते मामले
लापरवाही और गलत आदतें बन रहीं बड़ी वजह
विशेषज्ञों के अनुसार, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज के मरीजों द्वारा नियमित जांच न कराना किडनी रोग बढ़ने की एक बड़ी वजह है. कई मरीज लंबे समय तक बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयां लेते रहते हैं. वहीं, थोड़े से हाथ‑पैर या सिर दर्द में लोग पेनकिलर और एंटीबायोटिक का सेवन शुरू कर देते हैं. यह आदत धीरे‑धीरे किडनी को क्षति पहुंचाती है, जिसका असर बाद में गंभीर रूप में सामने आता है.
ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा गंभीर स्थिति
ग्रामीण इलाकों में हालात और भी चिंताजनक बताए जा रहे हैं. यहां लोग जरा‑सी तकलीफ होने पर झोलाछाप डॉक्टरों के पास पहुंच जाते हैं, जहां उन्हें दर्द बंद होने तक हाई डोज की दवाएं दी जाती हैं. मरीज बिना यह जाने कि इन दवाओं का किडनी पर क्या प्रभाव पड़ रहा है, लंबे समय तक उनका सेवन करते रहते हैं. इसी वजह से किडनी के साथ‑साथ पेट से जुड़ी बीमारियों में भी इजाफा हो रहा है.
सप्ताह में कई बार कराना पड़ रहा डायलिसिस
स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि कई मरीजों को सप्ताह में दो से तीन बार डायलिसिस कराना पड़ रहा है. इससे न केवल मरीजों की शारीरिक स्थिति प्रभावित हो रही है, बल्कि उन पर आर्थिक बोझ भी बढ़ता जा रहा है. नियमित डायलिसिस के कारण मरीजों की दिनचर्या और सामाजिक जीवन भी प्रभावित हो रहा है, जिससे परिवार पर भी मानसिक दबाव बन रहा है.
युवा भी हो रहे प्रभावित
किडनी की बीमारी अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही है. 20 से 50 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं में भी इसके मामले लगातार बढ़ रहे हैं. डॉक्टरों का कहना है कि शराब, तंबाकू और अन्य नशे की लत, जंक फूड का बढ़ता सेवन और व्यायाम की कमी युवाओं में किडनी रोग को बढ़ावा दे रही है. भागदौड़ भरी जिंदगी और तनाव भी इसके कारणों में शामिल हैं.
लगातार बढ़ते आंकड़े बढ़ा रहे चिंता
पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े भी स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं. हर साल किडनी रोगियों की संख्या और डायलिसिस सत्रों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. इससे स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है और संसाधनों की कमी भी महसूस की जा रही है. यदि यह रुझान यूं ही जारी रहा, तो आने वाले समय में हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं.
“साइलेंट किलर” है किडनी रोग
डॉक्टरों के मुताबिक किडनी की बीमारी को “साइलेंट किलर” कहा जाता है, क्योंकि इसके लक्षण समय पर सामने नहीं आते. जब तक मरीज को समस्या का अहसास होता है, तब तक किडनी काफी हद तक प्रभावित हो चुकी होती है. इसी वजह से समय पर जांच और सतर्कता बेहद जरूरी मानी जाती है.
क्या रखें ध्यान? एक्सपर्ट्स की राय
विशेषज्ञों का कहना है कि किडनी को सुरक्षित रखने के लिए कुछ अहम बातों पर ध्यान देना जरूरी है.
- बिना डॉक्टर की सलाह दवाएं लेने से बचें
- बीपी और शुगर को नियंत्रण में रखें
- समय‑समय पर हेल्थ चेकअप कराएं
- नशे और अनहेल्दी खान‑पान से दूरी बनाएं
- किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें
डॉक्टरों का कहना है कि यदि लोग समय रहते जागरूक हो जाएं, तो किडनी रोग की बढ़ती समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है.
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