Bhojshala Case: मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला में अब मुस्लिम समाज को नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं है. हाईकोर्ट ने 15 मई को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए भोजशाला परिसर को मंदिर करार दिया था. उस फैसले के बाद से यह पहला शुक्रवार है, जब यहां जुम्मे की नमाज नहीं पढ़ी जाएगी. वहीं, भोजशाला के आसपास सुरक्षा-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की भी तैनाती की गई है. गौरतलब है कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार शुक्रवार को भोजशाला परिसर में दिनभर हिंदू समुदाय द्वारा पूजा-अर्चना की जाएगी. इसके अलावा मुस्लिम समाज ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.
कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष और भोजशाला प्रकरण के प्रतिवादी अब्दुल समद खान ने मीडिया से चर्चा में कहा कि मुस्लिम समाज न्यायालय के फैसले और संविधान का सम्मान करता है. उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की गई है और मामले में जल्द स्टे मिलने की उम्मीद है. अब्दुल समद खान ने कहा कि प्रशासन द्वारा अनुमति नहीं दिए जाने के कारण शुक्रवार को भोजशाला परिसर में नमाज अदा नहीं की जाएगी. मुस्लिम समाज के लोग अपने घरों और नजदीकी मस्जिदों में जुम्मे की नमाज अदा करेंगे.
#WATCH | Dhar, Madhya Pradesh: On Bhojshala-Kamal Maula Verdict, Kamal Maulana Welfare Society President Abdul Samad says, "SLP has been filed on our behalf in the Supreme Court... This matter, which we could not put before the High Court, we will try to put our point through the… pic.twitter.com/wqdrr1ODz0
— ANI (@ANI) May 21, 2026
क्या बोले शहर काजी
शहर काजी वकार सादिक ने जुम्मे की नमाज को लेकर जो विरोधाभास उत्पन्न हो रहा है उसको स्पष्ट करते हुए कहा कि पिछले दिनों उच्च न्यायालय द्वारा जो आदेश पारित किया गया है, उसके खिलाफ मुस्लिम समाज सुप्रीम कोर्ट गया है, जहां हमारी एसएलपी दायर हो गई है. सुप्रीम कोर्ट से हमें न्याय की उम्मीद है. हमारा पक्ष बहुत मजबूत है, जहां से हमें न्याय मिलने की पूरी उम्मीद है. सुप्रीम कोर्ट से जो भी निर्णय या स्टे आएगा, उसका सम्मान करते हुए आने वाले दिनों में हम फिर एक बार आप सभी के सहयोग से जुम्मे की नमाज अदा करेंगे.
शहर काजी वकार सादिक ने शुक्रवार को होने वाली नमाज को लेकर कहा कि प्रशासन की गाइडलाइन के अनुसार सभी समुदाय शांति बनाए रखें. आज जुम्मे की नमाज मोहल्लों की मस्जिदों में अदा की जाएगी.
हाईकोर्ट ने भोजशाला को माना मंदिर
दरअसल, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने 15 मई को फैसला सुनाते हुए भोजशाला को मंदिर करार दिया था. इसके बाद से से हिंदू पक्ष में खुशी का माहौल है. इस दौरान कोर्ट ने कहा, भोजशाला परिसर-कमाल मस्जिद का विवादित क्षेत्र एक मंदिर और संस्कृत शिक्षा का केंद्र है. केंद्र सरकार देवी सरस्वती की मूर्ति ला सकती है. हालांकि यहां ASI का पूरा नियंत्रण रहेगा.
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