- मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर को वाग्देवी का मंदिर मानते हुए नमाज पर रोक लगाई थी
- मुस्लिम पक्ष के काजी मोइनुद्दीन ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है
- धार प्रशासन ने शुक्रवार को शांति बनाए रखने के लिए 1500 जवान तैनात कर विशेष सुरक्षा इंतजाम किए हैं
मध्य प्रदेश के धार का भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद अब देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) पहुंच गया है. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच द्वारा 15 मई 2026 को दिए गए ऐतिहासिक फैसले को चुनौती देते हुए मुस्लिम पक्ष के हस्तक्षेपकर्ता काजी मोइनुद्दीन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है.
बता दें कि हाईकोर्ट ने अपने फैसले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट और ऐतिहासिक दस्तावेजों को मुख्य आधार मानते हुए इस परिसर को वाग्देवी का मंदिर माना था. एएसआई की रिपोर्ट में परिसर के स्तंभों पर हिंदू प्रतीक और संस्कृत अभिलेख पाए गए थे, जिसके बाद हाईकोर्ट ने परिसर में नमाज अदा करने पर रोक लगाने के आदेश जारी किए थे.
पहले शुक्रवार को लेकर प्रशासन मुस्तैद, 1500 जवान तैनात
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद आने वाले पहले शुक्रवार (जुमा) को देखते हुए धार जिला और पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है. पुलिस मुख्यालय ने धार और उसके आसपास के संवेदनशील जिलों के लिए विशेष अलर्ट भेजा है. पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने धार के आला पुलिस अधिकारियों से सीधे बातचीत कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया है.
प्रशासनिक स्तर पर उठाए गए मुख्य कदम
धारा 144 और फ्लैग मार्च: शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए धार कलेक्टर राजीव रंजन मीना और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में पूरे शहर में फ्लैग मार्च निकाला गया. इस दौरान वाहनों पर तिरंगा झंडा और डीजे पर देशभक्ति के गाने बजाकर नागरिकों में सुरक्षा का भाव पैदा किया गया.
लाउडस्पीकर से घोषणा: संवेदनशील इलाकों में पुलिस लगातार पेट्रोलिंग कर रही है. पुलिस द्वारा माइक (लाउडस्पीकर) के जरिए समुदाय विशेष के लोगों को कोर्ट के आदेश की जानकारी दी जा रही है और यह समझाया जा रहा है कि कल से परिसर में नमाज क्यों अदा नहीं की जा सकती.
धर्मगुरुओं से संवाद: धार पुलिस ने मुस्लिम धर्मगुरुओं से भी चर्चा की है ताकि शहर में अमन-चैन और भाईचारा कायम रहे.
हिंदू संगठन करेंगे महाआरती, ड्रोन से रखी जा रही नजर
मीडिया की खबरों के अनुसार भोज उत्सव समिति के संरक्षक अशोक जैन ने शुक्रवार के दिन को ऐतिहासिक बताते हुए दोपहर के समय एक विशाल जुलूस निकालकर भोजशाला में महाआरती करने का ऐलान किया है. उन्होंने कहा, "721 साल बाद यह शुक्रवार आया है, जो हमारे स्वाभिमान से जुड़ा है. अब पूरा हिंदू समाज भोजशाला में निर्बाध रूप से पूजा करेगा." गौरतलब है कि साल 2003 में जारी एएसआई के आदेश के मुताबिक, हर मंगलवार और बसंत पंचमी को हिंदू पक्ष पूजा करता था और हर शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय नमाज अदा करता था.
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