- दतिया विधायक घनश्याम सिंह की जीत हाईकोर्ट में चुनौती, चुनाव रद्द करने की मांग
- चुनावी हलफनामे में केस छिपाने का आरोप, भाजपा नेता ने हाईकोर्ट पहुंचाया दतिया उपचुनाव मामला
- कांग्रेस विधायक बोले- यह विरोधियों की साजिश
दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज करने वाले घनश्याम सिंह की विधायकी अब कानूनी चुनौती का सामना कर रही है. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में दायर एक याचिका में आरोप लगाया गया है कि घनश्याम सिंह ने चुनावी हलफनामे में अपने खिलाफ दर्ज एक पुराने आपराधिक मामले की जानकारी नहीं दी. याचिकाकर्ता का दावा है कि यह जानकारी छिपाना चुनावी नियमों का उल्लंघन है. मामले में उनकी जीत को शून्य घोषित कर दोबारा उपचुनाव कराने की मांग की गई है. हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई अगले सप्ताह हो सकती है.
हाईकोर्ट में दायर हुई याचिका
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ में भाजपा नेता और अधिवक्ता दीपक बेलपत्री ने याचिका दायर की है. याचिका में हाल ही में दतिया विधानसभा उपचुनाव जीतने वाले कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह के चुनाव को चुनौती दी गई है. याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि घनश्याम सिंह ने अपने चुनावी शपथपत्र में सभी आपराधिक मामलों की जानकारी नहीं दी और एक मामले को छिपाया.

दतिया उपचुनाव के दौरान कांग्रेस, बीजेपी और बीएसपी के प्रत्याशी
आपराधिक मामला छिपाने का आरोप
याचिका के अनुसार, घनश्याम सिंह ने अपने हलफनामे में दतिया कोतवाली में दर्ज दो आपराधिक मामलों की जानकारी तो दी, लेकिन वर्ष 1991 में दर्ज एक अन्य मामले का उल्लेख नहीं किया. याचिकाकर्ता का कहना है कि चुनाव आयोग को दिए गए शपथपत्र में सभी लंबित और दर्ज मामलों की जानकारी देना अनिवार्य होता है. ऐसे में पुराने मामले का उल्लेख नहीं करना गंभीर तथ्य है.
राजीव गांधी हत्या के बाद दर्ज हुआ था मामला
याचिका में बताया गया है कि वर्ष 1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद दतिया में विरोध प्रदर्शन और चक्काजाम किया गया था. उस समय पुलिस ने 22 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था, जिसमें घनश्याम सिंह का नाम भी शामिल था. आरोप है कि यही मामला उपचुनाव के दौरान दाखिल किए गए शपथपत्र में नहीं दर्शाया गया.
चुनाव निरस्त करने की मांग
याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी छिपाने के आधार पर घनश्याम सिंह का निर्वाचन निरस्त घोषित किया जाए. साथ ही दतिया विधानसभा सीट पर दोबारा चुनाव कराने का भी अनुरोध किया गया है. माना जा रहा है कि मामले की सुनवाई अगले सप्ताह हो सकती है.

दतिया से कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह
घनश्याम सिंह ने बताया साजिश
दतिया में पत्रकारों से बातचीत करते हुए घनश्याम सिंह ने कहा कि जिस मामले का जिक्र किया जा रहा है वह लगभग 35 साल पुराना है. उन्होंने कहा कि उन्हें अभी तक याचिका की पूरी जानकारी नहीं मिली है और न ही पुलिस या अदालत की ओर से कोई आधिकारिक सूचना दी गई है. कांग्रेस विधायक ने इसे राजनीतिक विरोधियों की साजिश करार देते हुए कहा कि वह ऐसे प्रयासों से डरने वाले नहीं हैं.
उपचुनाव में दर्ज की थी जीत
हाल ही में हुए दतिया विधानसभा उपचुनाव में घनश्याम सिंह ने भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को हराया था. निर्वाचन आयोग के अनुसार, घनश्याम सिंह को 66,757 वोट मिले थे, जबकि भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को 60,741 वोट प्राप्त हुए थे. उन्होंने 6,016 मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी.
क्यों हुआ था उपचुनाव?
दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव इसलिए कराना पड़ा क्योंकि कांग्रेस के तत्कालीन विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त हो गई थी. अप्रैल 2026 में दिल्ली की एक अदालत ने बैंक धोखाधड़ी और ठगी के मामले में राजेंद्र भारती को तीन साल की सजा सुनाई थी. इसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई थी, जिससे सीट रिक्त हो गई थी.
अब कोर्ट के आदेश का इंतजार
दतिया उपचुनाव को भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए प्रतिष्ठा का चुनाव माना जा रहा था. भाजपा ने इस बार पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया था, जिसके बाद पार्टी के भीतर भी विरोध के स्वर सामने आए थे. अब हाईकोर्ट में दायर याचिका के बाद दतिया की राजनीति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है. यदि अदालत में मामला आगे बढ़ता है तो कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह की जीत पर कानूनी संकट गहरा सकता है.
यह भी पढ़ें : दतिया में हार पर नरोत्तम मिश्रा बोले- ये मेरी व्यक्तिगत क्षति, 70 चुनाव हार चुके राहुल गांधी हमें नसीहत न दें
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं