विज्ञापन

MP: छात्राओं को हिजाब पहनने और नमाज के लिए किया मजबूर, स्कूल के 4 आरोपियों के खिलाफ FIR रद्द करने से HC का इनकार

MP हाईकोर्ट ने दमोह के गंगा जमुना स्कूल में हिंदू छात्राओं को हिजाब पहनने और नमाज के लिए मजबूर करने के मामले में 4 आरोपियों की FIR रद्द करने से इनकार किया. जस्टिस हिमांशु जोशी ने कहा धमकी-दबाव के आरोप प्रथम दृष्टया निराधार नहीं हैं.

MP: छात्राओं को हिजाब पहनने और नमाज के लिए किया मजबूर, स्कूल के 4 आरोपियों के खिलाफ FIR रद्द करने से HC का इनकार
दमोह हिजाब केस में 4 आरोपियों की FIR रद्द करने से हाईकोर्ट का इनकार (प्रतीकात्मक फोटो).
IANS
  • दमोह के गंगा जमुना स्कूल में हिंदू छात्राओं को हिजाब, नमाज और उर्दू अनिवार्य की थी.
  • 2023 का मामला, जब शिकायत की गई तो प्रशासन ने कराई थी जांच.
  • हिंदू छात्राओं का हिजाब पहने फोटो आया था सामने.

मध्य प्रदेश के दमोह जिले में स्थित गंगा जमुना उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से जुड़े विवादित हिजाब मामले में हाईकोर्ट ने आरोपियों को बड़ा झटका दिया है. कोर्ट ने स्कूल के चार पूर्व पदाधिकारियों और कर्मचारियों की तरफ से दर्ज प्राथमिकी (FIR) को रद्द करने की याचिका खारिज कर दी है. इस मामले में आरोपी स्कूल के पूर्व पदाधिकारी शैलेंद्र कुमार जैन, अब्दुल वसीम बारी, शिक्षक अनस अथर और कार्यालय सहायक रुस्तम अली हैं, जिन्होंने प्राथमिकी रद्द करने के याचिकाएं दाखिल की थीं.

न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकल पीठ ने शुक्रवार को कहा कि छात्राओं को धमकी देकर कथित तौर पर मजबूर किए जाने संबंधी विशिष्ट आरोपों को निराधार नहीं कहा जा सकता और इनकी सत्यता साक्ष्यों के आधार पर तय की जाएगी.

हिंदू छात्राओं को हिजाब पहनने को मजबूर किया

यह मामला दमोह स्थित गंगा जमुना उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से जुड़ा है. मई 2023 में हिंदू छात्राओं के हिजाब पहने हुए एक पोस्टर सामने आने के बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच के आदेश दिए थे. छात्राओं की शिकायतों के बाद जिलाधिकारी ने जांच समिति गठित की थी.

इन धाराओं में दर्ज हुआ था मामला

समिति की रिपोर्ट के आधार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 295-ए (किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए जानबूझकर और दुर्भावनापूर्वक किया गया कृत्य), 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) और 506 (आपराधिक धमकी) तथा किशोर न्याय अधिनियम और मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2021 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था.

स्कूल में हिजाब पहनने और नमाज पढ़ना किया अनिवार्य

आरोप है कि स्कूल में हिजाब पहनने, नमाज पढ़ने और उर्दू भाषा के अध्ययन को अनिवार्य कर दिया गया, जबकि तिलक और कलावा पहनने पर रोक थी.

छात्राओं पर धार्मिक प्रथाओं का पालन कराने का आरोप

कोर्ट ने कहा कि प्राथमिकी में छात्राओं को उनकी इच्छा के खिलाफ एक विशेष पहनावे और धार्मिक प्रथाओं का पालन करने के लिए धमकी और दबाव डालने के विशिष्ट आरोप हैं. पीठ ने कहा कि ऐसे में याचिकाकर्ताओं के खिलाफ लगाए गए आरोपों को प्रथम दृष्टया निराधार नहीं कहा जा सकता. आरोपों की सत्यता साक्ष्यों के आधार पर तय होगी. पुलिस इस मामले में पहले ही आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है.

ये भी पढ़ें- 'मामूली नाराजगी और नोक-झोंक क्रूरता नहीं', हाई कोर्ट ने खारिज की पति की तलाक अर्जी

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Damoh School Row, Damoh Hijab Case, Hijab In School, Hindu Students Forced To Pray, Madhya Pradesh High Court
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com