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नेपाल के ISKCON गुरुकुल में 8 साल की बच्ची के साथ यौन शोषण, 8 कर्मचारी सस्पेंड, भारत की CBI से मांगी मदद

नेपाल की राजधानी काठमांडू के ISKCON गुरुकुल में 8 साल की बच्ची का एक साल तक यौन शोषण किया गया. उसके माता-पिता, दोनों इसी संस्थान के लिए काम करते थे और भक्ति-विश्वास के दम पर अपने दो बच्चों को यहां पढ़ाते थे.

नेपाल के ISKCON गुरुकुल में 8 साल की बच्ची के साथ यौन शोषण, 8 कर्मचारी सस्पेंड, भारत की CBI से मांगी मदद
नेपाल के काठमांडू में मौजूद ISKCON सेंटर की फाइल फोटो
  • काठमांडू के एक ISKCON गुरुकुल में बच्चों के साथ कथित यौन शोषण और मारपीट का मामला सामने आया है
  • 8 साल की बेटी के साथ गुरुकुल में लंबे समय तक यौन शोषण हुआ, 5 साल के बेटे के साथ प्रिंसिपल ने हिंसा की- परिवार
  • इस्कॉन की ग्लोबल गवर्निंग बॉडी कमीशन ने अपनी नेपाल शाखा के आठ अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है

नेपाल की राजधानी काठमांडू के एक ISKCON गुरुकुल में बच्चों के साथ कथित यौन शोषण और मारपीट का मामला सामने आया है. मामला एक ही परिवार के दो मासूम बच्चों से जुड़ा है. परिवार का आरोप है कि उनकी 8 साल की बेटी के साथ गुरुकुल में लंबे समय तक यौन शोषण हुआ, जबकि 5 साल के बेटे को भी उस समय के प्रिंसिपल ने पीटा और पिन चुभाकर सजा दी. अब मामले में पुलिस जांच और अदालत की कार्रवाई जारी है. अब इस्कॉन की ग्लोबल गवर्निंग बॉडी कमीशन ने अपनी नेपाल शाखा के आठ अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है. लेकिन नेपाल शाखा की ओर से इसका विरोध भी हो रहा है.

बच्चों को गुरुकुल में पढ़ने भेजा था

काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार बच्चों के पिता काठमांडू के बुढ़ानीलकंठ स्थित ISKCON गुरुकुल में स्कूल बस ड्राइवर थे. उनकी पत्नी भी इसी संस्थान के रेस्टोरेंट में खाना बनाती थीं. उनके दोनों बच्चे वहीं बने रेजिडेंशियल गुरुकुल में पढ़ते थे. रिपोर्ट के अनुसार पिता अपने काम को धार्मिक सेवा मानते थे और उन्हें भरोसा था कि बच्चों के साथ वहां कुछ गलत नहीं होगा. उस समय स्कूल के प्रिंसिपल सूरज कृष्ण श्रेष्ठ थे. पिता के अनुसार प्रिंसिपल के अपने दो बच्चे भी इसी संस्थान में पढ़ते थे, इसलिए उनका भरोसा और बढ़ गया था.

लेकिन बाद में बच्चों ने घर पर जो बातें बताईं, उससे परिवार को बड़ा झटका लगा.

परिवार का आरोप है कि उनकी बेटी, जो अब 13 साल की है, के साथ अगस्त 2021 से सितंबर 2022 के बीच गुरुकुल में कथित यौन शोषण हुआ. परिवार के मुताबिक, वह उस समय इतनी छोटी थी कि उसे ठीक से समझ भी नहीं आया कि उसके साथ क्या हो रहा है. बच्ची ने 2025 के बीच में दूसरी स्कूल की एक महिला टीचर को इसके बारे में बताया. इसके बाद परिवार को जानकारी मिली. पिता के मुताबिक, बेटी ठीक से सो नहीं पाती थी और कई बार रोती या चीखती थी.

परिवार की शिकायत में स्कूल के सीनियर स्टूडेंट ईश्वर श्रेष्ठ को कथित आरोपी बताया गया है. परिवार का कहना है कि वह अभी फरार है. पुलिस ने बताया है कि उसकी तलाश के लिए इंटरपोल और भारत की CBI को भी जानकारी दी गई है. परिवार का दूसरा आरोप उनके 5 साल के बेटे से जुड़ा है. बच्चे ने बताया कि तत्कालीन प्रिंसिपल उसे पीटते थे, पिन चुभाते थे और माता-पिता को बताने पर सजा देने की धमकी देते थे.

इसके बाद परिवार ने इस साल 30 अप्रैल को काठमांडू के जिला पुलिस कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई. रिपोर्ट के अनुसार इसके बाद पूर्व प्रिंसिपल सूरज कृष्ण श्रेष्ठ को बच्चों के साथ हिंसा के आरोप में गिरफ्तार किया गया. बाद में उन्हें जमानत मिल गई.

ISKCON ने 8 अधिकारियों को सस्पेंड किया

परिवार ने पुलिस के पास जाने से पहले ISKCON के चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिस में शिकायत की थी. 5 अगस्त 2025 को शिकायत भेजी गई थी. परिवार के मुताबिक जब वहां से संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई तो पुलिस में शिकायत की गई. इसके बाद ISKCON की ग्लोबल गवर्निंग बॉडी ने मामले की इंटरनल जांच कराई. 14 सितंबर को नेपाल शाखा के 8 अधिकारियों को जांच पूरी होने तक मैनेजमेंट और नेतृत्व से जुड़े कामों से सस्पेंड कर दिया गया. इनमें पूर्व प्रिंसिपल भी शामिल हैं. ISKCON ने साफ किया कि निलंबन को दोष साबित होने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.

ISKCON नेपाल के अध्यक्ष प्रदीप भंडारी ने कहा कि बच्चों के खिलाफ हिंसा को लेकर संगठन की जीरो टॉलरेंस नीति है और वह कानूनी प्रक्रिया में सहयोग करेगा. हालांकि ISKCON नेपाल की जनरल असेंबली ने स्टाफ के सस्पेंसन के आदेश को गैरकानूनी और अमान्य बताया है.

ISKCON नेपाल जनरल असेंबली ने सस्पेंसन के आदेश को मानने से इनकार कर दिया है

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5 अक्टूबर को अदालत में अहम सुनवाई

दोनों मामलों की कार्रवाई काठमांडू जिला अदालत में चल रही है. अदालत ने 5 अक्टूबर को बच्चों, उनके माता-पिता और एक अहम गवाह के बयान दर्ज करने की तारीख तय की है. परिवार चाहता है कि ISKCON की ग्लोबल गवर्निंग बॉडी का निलंबन आदेशन (सस्पेंसन ऑर्डर) लागू हो. वहीं ISKCON नेपाल का कहना है कि निलंबित लोगों को दोषी नहीं माना गया है और कानूनी प्रक्रिया जारी है.

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