- ऐतिहासिक नगरी मल्हारगढ़ का किला वेतवा नदी किनारे बसा है.
- लगभग 12वीं सदी का किला क्षतिग्रस्त होता जा रहा, तोपें हुईं चोरी.
- राजा ज्वाला सिंह ने बनवाया, मछला हरण से जुड़ी है कहानी.
कभी अपनी भव्यता से लोगों को आकर्षित करने वाला ऐतिहासिक एवं धार्मिक नगरी मल्हारगढ़ का किला आज अपना अस्तित्व खोता जा रहा है. यह धीरे-धीरे अपने इतिहास को समेटते हुए खंडहर में बदल रहा है. पुरातत्व विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के चलते मल्हारगढ़ किला इस पर पहुंचा है. यह ऐतिहासिक किला सदियों पुराना है, जिसे पथरीगढ़ के राजा ज्वाला सिंह ने बनवाया था. इस किले का इतिहास बुंदेलखंड के दो वीर योद्धा भाइयों आल्हा-ऊदल (Alha Udal) से जुड़ा हुआ है.
बताया जाता है कि ज्वाला सिंह आल्हा की पत्नी रानी मछला का हरण (Machhla Haran) करके इसी किले में लाए थे. जिस कुंड में मछला को रखा गया था, वह आज भी मौजूद है. लेकिन वर्षों से अनदेखी के चलते आज कुंड में किले की दीवारें गिरने लगीं है.
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बात करें तो इस जर्जर किले के अंदर आज भी विशाल तोप रखीं हुई हैं और इस तोप का नाम भेलसा बताया जाता है, लेकिन लगातार असमाजिक तत्वों द्वारा यहां मौजूद कई तोपों को चोरी कर लिया गया है. जो बड़ी तोप हैं, वही बची हुई हैं. अगर जिम्मेदार अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों ने ध्यान नहीं दिया तो यह ऐतिहासिक धरोहर अपना अस्तित्व पूरी तरह खो देगी.

जगह-जगह से टूटने लगीं दीवारें तो राजा रानी महल जमींदोज
किले की भव्यता की बात की जाए तो इसकी दीवारों व गुंबदों को देखकर ही इसके बारे में कल्पना की जा सकती है. बताया जाता है कि इसकी दीवारों पर घोड़े खड़े रहते थे, जिनसे निगरानी की जाती थी. तीन लेयर में पूरी तरह से वेतवा नदी किनारे इस किले का निर्माण कराया गया था, लेकिन वर्तमान में इसकी दीवारें जगह-जगह से टूटने लगी हैं.

असमाजिक तत्व किले की सामग्री चोरी करके ले जा रहे हैं. जहां राजा रानी के महल बने हुए थे, वह आज पूरी तरह से जमींदोज हो चुके हैं और सिर्फ उनका मलवा यहां नजर आ रहा है.

अंदर मंदिर और मस्जिद में आज भी होती है पूजा-अजान
इस ऐतिहासिक किले के अंदर हनुमान जी का सिद्ध मंदिर है. इसके अलावा किले में एक मस्जिद भी बनीं हुई है. यहां लगातार ग्रामीण जाकर पूजा व अदावत करते नजर आते हैं.

प्लानिंग तैयार करके करेंगे सहेजने का प्रयास
बीते दिनों NDTV ने इसकी दुर्दशा की ग्राउंड रिपोर्ट दिखाई थी, जिसके बाद अधिकारियों का दल इस किले के अंदर पहुंचा था और पूरे किले की वीडियोग्राफी कराकर भोपाल पुरातत्व विभाग को भेजने की बात कही थी, लेकिन कलेक्टर व एसडीएम के बदलते ही कार्रवाई शून्य नजर आती है. जब NDTV ने एसडीएम मुंगावली बृजबिहारी श्रीवास्तव से इसकी दुर्दशा सुधारने के लिए क्या तैयारियां हैं, के बारे में जब बात की तो उन्होंने बताया कि अधिकारियों से चर्चा करके प्लान तैयार करते हैं कि आखिर कैसे इस ऐतिहासिक विरासत को सहेजा व सुरक्षित किया जा सकता है.

आल्हा-ऊदल रानी मछला को लाए वापस
आल्हा और ऊदल बुंदेलखंड के दो भाई वीर योद्धा थे. इनकी वीरता की गाथाएं खूब गाई जाती हैं. बताया जाता है कि जब पथरीगढ़ के राजा ज्वाला सिंह ने मछला का हरण किया तो आल्हा-ऊदल ने सैनिकों के साथ मिलकर आक्रमण किया था और रानी मछला को बरामद कर लिया. यह किला 12वीं सदी का बताया जाता है.
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