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मजदूर पिता की बेटियों ने किया कमाल: बड़ी बेटी एमपी एसआई रिजल्ट में आई फर्स्ट, छोटी बनी कांस्टेबल

मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले की पूजा अहिरवार ने आर्थिक तंगी को मात देकर एमपी एसआई परीक्षा में एससी कैटेगरी में पूरे प्रदेश में टॉप किया है. जानिए मजदूर पिता की दो बेटियों के संघर्ष और सफलता की ये भावुक कर देने वाली कहानी.

मजदूर पिता की बेटियों ने किया कमाल: बड़ी बेटी एमपी एसआई रिजल्ट में आई फर्स्ट, छोटी बनी कांस्टेबल

यदि हौसलों में उड़ान हो और कुछ करने की इच्छाशक्ति हो, तो गरीबी रास्ते की रुकावट नहीं बन सकती. इसे सच कर दिखाया है अशोकनगर जिले के एक छोटे से गांव आकेत की रहने वाली पूजा अहिरवार ने. पूजा ने मध्य प्रदेश सब-इंस्पेक्टर (एमपी एसआई) परीक्षा में एससी कैटेगरी में पूरे प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है. परीक्षा का रिजल्ट बीते 7 जुलाई को ही आया है. एक बेहद साधारण परिवार से आने वाली पूजा की यह सफलता आज उन सभी युवाओं के लिए एक मिसाल है, जो संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं. बता दें कि पूजा के पिता किसान हैं और परिवार को चलाने के लिए मजदूरी भी करते हैं. पूजा की बहन करिश्मा का भी बीते साल ही आरक्षक के पद पर चयन हुआ है.

पिता की मजदूरी और परिवार का संघर्ष

पूजा के पिता सनमान अहिरवार के पास गांव में सिर्फ 7 बीघा जमीन है. इतने कम संसाधनों में चार बच्चों के परिवार को पालना और उन्हें पढ़ाना बेहद मुश्किल काम था. लेकिन पिता ने हिम्मत नहीं हारी और गांव में ही मजदूरी करके बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाया. उनकी इसी मेहनत का नतीजा है कि आज उनकी तीन बेटियों में से दो बेटियां मध्य प्रदेश पुलिस का हिस्सा बनकर देश की सेवा करेंगी. खुद अहिरवार बड़े गर्व से ये बात बतातें हैं कि उनकी मेहनत को उनकी बेटियों ने सफल कर दिखाया है. 

सरकारी स्कूल से लेकर पहली रैंक तक का सफर

पूजा की शुरुआती पढ़ाई गांव के ही सरकारी स्कूल में हुई. इसके बाद हाईस्कूल तक की पढ़ाई उन्होंने पास के गांवों के सरकारी स्कूलों से की. आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने पिपरई के एक स्कूल में दाखिला लिया, जहां वे पूरे जिले में टॉपर रहीं. इसके बाद तैयारी के लिए वे गुना चली गईं. इस बीच पूजा ने एनटीपीसी, एमपीपीएससी और आरपीएफ जैसी कई परीक्षाएं पास कीं, लेकिन फाइनल सिलेक्शन में कुछ नंबरों से रह जाती थीं. इन असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने पहले ही प्रयास में एमपी एसआई की परीक्षा में पूरे प्रदेश में टॉप कर दिया.

जब सब बंद होने वाला था, तब छोटी बहन बनी सहारा

इस संघर्ष में एक समय ऐसा भी आया जब आर्थिक तंगी के कारण पूजा का सब कुछ बिखरने वाला था. साल 2020 में गुना जाने के बाद भी जब काफी समय तक नौकरी नहीं मिली, तो परेशान होकर पूजा ने वापस घर लौटने का मन बना लिया था. तब उनकी छोटी बहन करिश्मा अहिरवार ने मोर्चा संभाला. करिश्मा ने एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाना शुरू किया और अपनी सैलरी से बड़ी बहन की पढ़ाई का खर्च उठाया. करिश्मा खुद भी तैयारी करती रहीं और साल 2025 की परीक्षा में उनका चयन आरक्षक के पद पर हो गया.पूजा अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय अपने पिता और इसी छोटी बहन को देती हैं.

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महिलाओं को न्याय दिलाना है मुख्य उद्देश्य

गांव में इस सफलता से खुशी का माहौल है. पूजा ने बताया कि उन्हें और उनकी बहन को गर्व है कि वे मध्य प्रदेश पुलिस में सेवाएं देंगे. ग्रामीण क्षेत्र से होने के कारण पूजा ने महिलाओं और बच्चियों की परेशानियों को बहुत करीब से देखा है. उनका कहना है कि पुलिस विभाग में सब-इंस्पेक्टर बनने के बाद उनका सबसे पहला मकसद पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाना और बच्चियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना होगा.
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