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This Article is From Oct 23, 2025

खौफनाक कहानी: इंस्टाग्राम की एक वायरल रील ने कैसे MP से बिहार तक कई बच्चों की आंखें फोड़ दीं

पूरे देश में 'कार्बाइड गन' का खतरनाक नया ट्रेंड मासूमों की आंखों की रोशनी छीन रहा है. इसे 'देसी पटाखा गन' या 'जुगाड़ी बम' नाम दिया जा रहा है, वह बच्चों के लिए खतरनाक खिलौना साबित हो रहा है.

खौफनाक कहानी: इंस्टाग्राम की एक वायरल रील ने कैसे MP से बिहार तक कई बच्चों की आंखें फोड़ दीं
  • मध्य प्रदेश में तीन दिनों में कार्बाइड गन के कारण 122 से अधिक बच्चों को गंभीर आंखों की चोटें आई हैं
  • भोपाल के हमीदिया अस्पताल में अकेले 26 से अधिक बच्चे इस खतरनाक जुगाड़ से घायल होकर भर्ती हुए हैं
  • कार्बाइड गन माचिस की तीलियों और बारूद को प्लास्टिक या टीन के ट्यूब में भरकर बनाई जाती है.

पूरे देश में 'कार्बाइड गन' का खतरनाक नया ट्रेंड मासूमों की आंखों की रोशनी छीन रहा है. इसे 'देसी पटाखा गन' या 'जुगाड़ी बम' नाम दिया जा रहा है, वह बच्चों के लिए खतरनाक खिलौना साबित हो रहा है. मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार सहित कई राज्यों में इस अवैध और खतरनाक जुगाड़ के कारण बच्चों की आँखों में गंभीर चोटें आई हैं.

मध्य प्रदेश में तीन दिनों में 122 से ज़्यादा बच्चे घायल

कार्बाइड गन के इस्तेमान से आंखों में गंभीर चोट के मामलों में अचानक खतरनाक वृद्धि देखी गई है. एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ तीन दिनों में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर सहित पूरे मध्य प्रदेश में 122 से ज़्यादा बच्चे गंभीर आंख की चोटों के साथ अस्पतालों में भर्ती हुए हैं. विदिशा जिले में खुलेआम बिक रही जुगाड़ की कार्बाइड गन ने तो 14 मासूमों की आंखों की रोशनी छीन ली.

भोपाल के हमीदिया अस्पताल में अकेले 26 से अधिक केस दर्ज हुए हैं. 17 वर्षीय नेहा ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि जुगाड़ की कार्बाइड गन फटने से उनकी एक आंख पूरी तरह झुलस गई. एक और पीड़ित राज विश्वकर्मा ने कहा कि “मैंने सोशल मीडिया पर देखकर देसी पटाखा गन बनाया था, तभी धमाका हो गया... मेरी आंख चली गई.” 

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अन्य राज्यों में भी कहर

उत्तर प्रदेश के जालौन में कैल्शियम कार्बाइड गन से एक नाबालिग गंभीर रूप से घायल हो गया. किशोर की आंख में चोट आई, जिसका इलाज अस्पताल में चल रहा है. वहीं, दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक, बिहार के पटना में पटाखों के विकल्प के तौर पर कार्बाइड गन का उपयोग बढ़ रहा है, जिससे 50 से ज़्यादा लोगों की आंखों की रोशनी जा चुकी है.

कैसे बनता है यह 'जानलेवा का खिलौना'?

हमीदिया अस्पताल के सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा और अन्य नेत्र विशेषज्ञों के मुताबिक, यह 'जुगाड़ी बम' बच्चों द्वारा माचिस की तीलियों और बारूद को मिलाकर प्लास्टिक या टीन के ट्यूब में भरकर बनाया जा रहा है. धमाके के दौरान, तेज़ छर्रे और धातु के कण सीधे आंखों पर वार करते हैं. कई मामलों में, आंख की पुतली फटने तक की स्थिति बन गई, जिसके कारण तुरंत सर्जरी करनी पड़ी है.

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सोशल मीडिया का खतरनाक 'चैलेंज' जिम्मेदार

इस खतरनाक ट्रेंड के पीछे मुख्य वजह इंस्टाग्राम रील्स और यूट्यूब की चैलेंज वीडियो को माना जा रहा है. ‘पटाखा गन चैलेंज' जैसे नाम से वायरल हो रहे वीडियो देखकर बच्चे घर में ही गैरेज जैसी प्रयोगशाला बना रहे हैं और खुद को व दूसरों को खतरे में डाल रहे हैं.

प्रशासन की कार्रवाई

विदिशा में हुई गंभीर घटनाओं के बाद प्रशासन ने अब अवैध रूप से बिकने वाली इन जुगाड़ की कार्बाइड गन के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है. अभिभावकों से अपील है कि वे बच्चों को सोशल मीडिया के ऐसे खतरनाक चैलेंजेस से दूर रखें और इन जानलेवा 'खिलौनों' को खरीदने से रोकें.

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