Doodh Ganga Controversy: बालोद जिले की प्रमुख दुग्ध संस्था “दूध गंगा” एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है. संस्था से जुड़े पंजीकृत दुग्ध उत्पादक किसानों ने प्रबंधन और प्राधिकृत अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कलेक्टर के नाम संयुक्त कलेक्टर को शिकायत ज्ञापन सौंपा है. किसानों का आरोप है कि दूध गंगा में पारदर्शिता की कमी है और वित्तीय मामलों में अनियमितताएं हो रही हैं. उन्होंने दूध के दाम बढ़ाने, लंबित बोनस भुगतान और आय-व्यय का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की है. किसानों ने संस्था के प्राधिकृत अधिकारी और प्रबंधक को हटाने की भी मांग उठाई है. वहीं प्रबंधन ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि सभी खर्च नियमों के तहत किए गए हैं. NDTV के लिए बालोद से एस के साहू की रिपोर्ट.
किसानों ने खोला मोर्चा
दूध गंगा से जुड़े दुग्ध उत्पादक किसानों ने संयुक्त कलेक्टर को शिकायत ज्ञापन सौंपकर संस्था के संचालन पर सवाल उठाए हैं. किसानों का कहना है कि संस्था के महत्वपूर्ण फैसलों में उन्हें शामिल नहीं किया जाता और पारदर्शिता का अभाव बना हुआ है.

Doodh Ganga Controversy: बालोद के किसान पत्र के साथ
दूध की कीमत बढ़ाने की मांग
किसानों ने ज्ञापन में दूध की मौजूदा कीमत 44 रुपये प्रति किलो से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलो करने की मांग की है. उनका कहना है कि चारा, दवाई, पशुपालन और अन्य खर्च लगातार बढ़ रहे हैं, जबकि दूध का भाव लागत के मुकाबले कम है.
बोनस भुगतान लंबित होने का आरोप
दुग्ध उत्पादकों ने वर्ष 2025-26 का लंबित बोनस जल्द जारी करने की मांग भी उठाई है. किसानों का आरोप है कि बोनस भुगतान में देरी से आर्थिक परेशानी बढ़ रही है.
आय-व्यय का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग
किसानों ने संस्था के वित्तीय लेन-देन को लेकर भी सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि दूध गंगा की आय और खर्च का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि सभी सदस्य वास्तविक स्थिति जान सकें.
मरम्मत कार्यों पर उठे सवाल
किसानों ने आरोप लगाया कि 9 अप्रैल 2026 को कलेक्टर निरीक्षण के बाद जब दूध गंगा बंद रही, उस दौरान मरम्मत और अन्य कार्यों के नाम पर जरूरत से ज्यादा खर्च किया गया. उनका दावा है कि इन खर्चों की जानकारी किसानों को नहीं दी गई.
निष्पक्ष जांच की मांग
किसान पवन कुमार यादव ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. उन्होंने कहा कि यदि अनियमितताएं सामने आती हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए.
“प्रबंधन किसानों को सौंपा जाए”
किसानों ने प्राधिकृत अधिकारी और प्रबंधक को हटाकर संस्था का संचालन सीधे किसानों के हाथों में देने की मांग भी उठाई है. उनका कहना है कि दुग्ध उत्पादकों की भागीदारी बढ़ने से संस्था में पारदर्शिता आएगी.
प्रबंधन ने आरोपों को बताया निराधार
दूसरी ओर, दूध गंगा के प्राधिकृत अधिकारी गणेश जोशी ने किसानों द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि दूध की कीमत हाल ही में 42 रुपये से बढ़ाकर 44 रुपये प्रति किलो की गई है. इसके अलावा 50 रुपये करने की मांग पर आगामी बैठक में चर्चा की जाएगी.
“हर खर्च का पूरा हिसाब मौजूद”
गणेश जोशी ने कहा कि मरम्मत और अन्य कार्यों में किए गए खर्च का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध है. उनके अनुसार सभी कार्य नियमों और प्रक्रिया के अनुसार कराए गए हैं तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई है.
बोनस भुगतान पर क्या कहा?
प्राधिकृत अधिकारी ने बताया कि बोनस का भुगतान वार्षिक आमसभा के बाद किया जाएगा. उन्होंने किसानों से धैर्य बनाए रखने की अपील की. कुल मिलाकर दूध गंगा में किसानों और प्रबंधन के बीच बढ़ते विवाद ने जिला स्तर पर हलचल बढ़ा दी है. अब सबकी नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है कि शिकायतों की जांच होती है या नहीं और किसानों की मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है.
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