साहित्य

वेदों के उपदेश सार्वकालिक, इनके प्रचार में मैक्समूलर का महत्वपूर्ण अवदान : प्रो राधावल्लभ त्रिपाठी

वेदों के उपदेश सार्वकालिक, इनके प्रचार में मैक्समूलर का महत्वपूर्ण अवदान : प्रो राधावल्लभ त्रिपाठी

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मैक्समूलर के बारे में कहा जाता रहा है कि वह भारत से भगवत गीता को चुराकर ले गया था. यह कहना गलत है. जो कभी भारत आया ही नहीं, वह गीता को यहां से कैसे ले गया? मैक्समूलर का तो वेदों के प्रचार में महत्वपूर्ण अवदान है. पश्चिमी दुनिया में इसी विद्वान के कारण वेदों को लोग समझ पाए. इसी तरह दारा शिकोह ने वेदों का फारसी में अनुवाद किया जिससे बाद यह बाकी भाषाओं में दुनिया में पहुंचे. केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के पूर्व कुलपति प्रो राधावल्लभ त्रिपाठी ने यह बात मध्यप्रदेश के सागर के डॉ हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय में यह बात कही. वे विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग की ओऔर से आयोजित एक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे. 

लमही पत्रिका समीक्षा: कहकहों के पीछे की उदासी

लमही पत्रिका समीक्षा: कहकहों के पीछे की उदासी

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शर्मिला जालान और संपादक ने उनके लिखे-पढ़े को इस तरह संयोजित किया है कि हम प्रबोध कुमार के व्यक्तित्व, स्वभाव और उनके जीवन-दृष्टि के सामाजिक पक्ष से परिचित होते हैं.

गांधारी : स्त्री अगर सक्रिय न हो तो होती है त्रासदी

गांधारी : स्त्री अगर सक्रिय न हो तो होती है त्रासदी

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महाभारत की कथाओं पर आधारित साहित्य इतना विशाल और विपुल है कि उसमें किया गया हर प्रयत्न पुराने प्रयत्नों की भी याद दिलाता है, इसके बावजूद पढ़ते हुए हर बार नया लगता है.

पुस्तक समीक्षा: रजा की आध्यात्मिक आभा है 'रजा जैसा मैंने देखा'

पुस्तक समीक्षा: रजा की आध्यात्मिक आभा है 'रजा जैसा मैंने देखा'

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कलावार्ता के रज़ा विशेषांक के संपादकीय में अखिलेश का देखना यह था कि रज़ा का आत्म एक बिंधा आत्म है. ताप और तप से.

पुस्तक समीक्षा: रजा की आध्यात्मिक आभा है 'रजा जैसा मैंने देखा'

पुस्तक समीक्षा: रजा की आध्यात्मिक आभा है 'रजा जैसा मैंने देखा'

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कलावार्ता के रज़ा विशेषांक के संपादकीय में अखिलेश का देखना यह था कि रज़ा का आत्म एक बिंधा आत्म है. ताप और तप से.

लमही पत्रिका: अमृत राय के समग्र मूल्यांकन का सार्थक दस्तावेज

लमही पत्रिका: अमृत राय के समग्र मूल्यांकन का सार्थक दस्तावेज

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लमही पत्रिका के फणीश्वर नाथ रेणु विशेषांक के बाद अमृत राय विशेषांक का कई दृष्टियों से अपना अलग और ऐतिहासिक महत्व है.

नटखट बंदर ने की हिरण की सवारी, लोगों ने कहा- दोनों की दोस्ती अमर रहे

नटखट बंदर ने की हिरण की सवारी, लोगों ने कहा- दोनों की दोस्ती अमर रहे

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देखा जाए तो सोशल मीडिया वायरल वीडियो का अड्डा है. इंसानों से ज़्यादा यहां जानवरों के वीडियोज़ ज़्यादा वायरल होते हैं. रोज़ कोई ऐसै वीडियो देखने को मिल जाता है, जिसे देखकर दिल ख़ुश हो जाता है.

Hindi Diwas 2021: पढकर नहीं बल्कि सुनकर लें हिंदी किताबों का आनंद, रामायण से लेकर गीता तक

Hindi Diwas 2021: पढकर नहीं बल्कि सुनकर लें हिंदी किताबों का आनंद, रामायण से लेकर गीता तक

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Hindi Diwas 2021: आपको अच्‍छे से हिंदी पढ़नी आती हो या नहीं, आप भी ऑडिबल पर हमारे समय के कुछ सबसे बेहतरीन हिंदी लेखकों की इन कालातीत हिंदी रचनाओं को सुनकर इस उत्सव में भाग ले सकते हैं.

'सर चढ़ के बोलता है उर्दू जबां का जादू' उसी जादू को आसान तरीके से सिखाती है 'रेख्ता उर्दू लर्निंग गाइड'

'सर चढ़ के बोलता है उर्दू जबां का जादू' उसी जादू को आसान तरीके से सिखाती है 'रेख्ता उर्दू लर्निंग गाइड'

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'रेख्ता उर्दू लर्निंग गाइड' को पांच मॉड्यूल में बांटा गया है, और इसमें 23 ईकाई हैं. इस तरह इस किताब को एक कोर्स की तरह तैयार किया गया है.

अमीर खुसरो को समझने के लिए शानदार पहल है यह किताब, 10 पहेलियां बूझो तो जानें

अमीर खुसरो को समझने के लिए शानदार पहल है यह किताब, 10 पहेलियां बूझो तो जानें

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अमीर खुसरो का जन्म 1253 ईसवी में एटा जिले के पटियाली में हुआ. आठ वर्ष की उम्र में उनके पिता का निधन हो गया था. पिता के निधन के बाद नाना ने उनका पालन-पोषण किया.

नए लेखकों को अपनी बात कहने का मंच देता है 'यॉर वॉइस' , बन रहा है नौजवानों की पसंद

नए लेखकों को अपनी बात कहने का मंच देता है 'यॉर वॉइस' , बन रहा है नौजवानों की पसंद

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कहानी, कविता, शेयर शायरी कहने और सुनने की प्रथा का तो इस देश में लंबा इतिहास रहा है. जहां चंदा मामा से लेकर दादी अम्मा तक कि कहानियां बच्चों को सोने से पहले सुनाई जाया करती थी मगर डिजिटल जमाने ने इस प्रवृत्ति को बादल कर रख दिया है. 

अब किसी नई 'पहल' का इंतज़ार है

अब किसी नई 'पहल' का इंतज़ार है

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'पहल' के पहले दौर से भी मैं जुड़ा रहा - एक पाठक की तरह और एक 'पहल' विक्रेता की तरह. यह 87 से 90 के बीच के कभी के दिन थे, जब रांची में रहते हुए और जन संस्कृति मंच के लिए उत्साह और सक्रियता से काम करते हुए हम बाहर की पत्रिकाएं बांटना-बेचना भी अपना कर्तव्य समझते थे.

शरण कुमार लिंबाले के मराठी उपन्यास 'सनातन' को साल 2020 का सरस्वती सम्मान

शरण कुमार लिंबाले के मराठी उपन्यास 'सनातन' को साल 2020 का सरस्वती सम्मान

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साल 2010-2019 की अवधि में प्रकाशित पुस्तकों पर विचार करने के बाद साल 2020 के सरस्वती सम्मान के लिए मराठी के प्रतिष्ठित साहित्यकार डॉक्टर शरण कुमार लिंबाले के उपन्यास 'सनातन' को चुना गया है. अब तक जिन साहित्यकारों को सरस्वती सम्मान मिला हैं उनमें हरिवंश राय बच्चन (1991), रमाकांत रथ (1992), प्रो. के. अय्यप्प पणिक्कर (2005), गोविंद मिश्र (2013), डॉक्टर एम.वीरप्पा मोइली (2014) समेत अन्य शामिल हैं. 

Book Excerpt: वाजपेयी-आडवाणी संबंध : उथल-पुथल भरी यात्रा, बेमिसाल सहयोग और कामयाबी

Book Excerpt: वाजपेयी-आडवाणी संबंध : उथल-पुथल भरी यात्रा, बेमिसाल सहयोग और कामयाबी

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दीनदयाल उपाध्याय की मृत्यु के बाद नेतृत्व को लेकर चल रही खींचतान में आडवाणी और वाजपेयी ने एक-दूसरे की पूरक भूमिकाएं स्वीकार कर लीं. जब देश में वैचारिक उदारवाद का मूड था – जैसे 1970 के दशक में या 1990 के उत्तरार्ध में – तो वाजपेयी ने नेतृत्व किया और आडवाणी ने उनका अनुसरण किया. जब चिंता का मूड होता था – जैसे 1980 के दशक में और 1990 के दशक के पूर्वार्ध में – तब आडवाणी ने पार्टी का मार्गनिर्देशन किया और वाजपेयी ने उनकी बात मानी.

हिंदी के युवा आलोचक आशुतोष भारद्वाज को देवीशंकर अवस्थी सम्मान देने की घोषणा

हिंदी के युवा आलोचक आशुतोष भारद्वाज को देवीशंकर अवस्थी सम्मान देने की घोषणा

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आशुतोष भारद्वाज मूलतः अंग्रेजी के पत्रकार रहे हैं और बस्तर के उनके अनुभवों की हिंदी-अंग्रेज़ी दोनों में ख़ूब चर्चा हुई है. अंग्रेज़ी में यह किताब 'द डेथ ट्रैप' के नाम से प्रकाशित हुई है. इसके अलावा भारतीय उपन्यासों में आधुनिकता और राष्ट्रवाद जैसे महत्वपूर्ण विषय पर उनका काम बहुचर्चित रहा है.

पीएम मोदी को लेकर क्या सोचते थे पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, किताब में उनके मन की बात

पीएम मोदी को लेकर क्या सोचते थे पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, किताब में उनके मन की बात

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पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ( Pranab Mukherjee) की नई किताब 'द प्रेसिडेंशियल इयर्स' (The Presidential Years) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के साथ उनके खट्टे-मीठे रिश्तों की दास्तान भी है. इस किताब में जहां संसद से नदारद रहने और नोटबंदी को लेकर प्रणब मुखर्जी ने पीएम मोदी को आड़े हाथों लिया वहीं कई मुद्दों पर जमकर तारीफ भी की है. प्रणब मुखर्जी के संस्मरणों से साफ है कि चाहे मुखर्जी और मोदी अलग-अलग वैचारिक पृष्ठभूमि से आए हों लेकिन मुखर्जी के मन में पीएम मोदी और देश के प्रति उनके समर्पण को लेकर बहुत सम्मान था. चुनाव जीतने के बाद पहली मुलाकात में मोदी मुखर्जी से मिलने आए तो एक अखबार की कतरन साथ लाए जिसमें मुखर्जी का पुराना भाषण था जो राजनीतिक रूप से स्थिर जनादेश की उम्मीद व्यक्त करता था.

अपाहिज सोच को झटका देने वाली कहानियां - तुम्हारी लंगी

अपाहिज सोच को झटका देने वाली कहानियां - तुम्हारी लंगी

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अपने पहले कहानी संग्रह ‘तुम्हारी लंगी’ में लेखिका अपने इस यथार्थ से बहुत सहजता से आंख मिलाती है. संग्रह की पहली ही कहानी में उनकी नायिका कहती है- ‘महिला दुहरी विकलांग है’- और अचानक हमारे सामने यह समझने का अवसर छोड़ देती है कि विकलांगता को हम किसी नियति या प्रकृति प्रदत्त चीज़ की तरह नहीं, एक सामाजिक निर्मिति की तरह देखना सीखें.

सब कुछ नष्ट करने पर तुली सभ्यता की ज़रूरी कहानी - 'बंदूक़ द्वीप'

सब कुछ नष्ट करने पर तुली सभ्यता की ज़रूरी कहानी - 'बंदूक़ द्वीप'

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अमिताभ घोष के लेखन में जितनी विश्वजनीन अपील होती है, उतना ही गहरा स्थानिकता का बोध होता है - और यह स्थानिकता इतिहास और भूगोल से इस तरह अनुस्युत रहती है कि अमिताभ घोष का लेखन साहित्य की सीमा (अगर ऐसी कोई सीमा होती हो तो) को फलांगता हुआ लगभग समाज-वैज्ञानिक शोध और अध्ययन की परिधि में चला जाता है.

कोरोना वायरस संक्रमण के असर और उससे निपटने के तरीके सुझाती है सत्यार्थी की नयी पुस्तक

कोरोना वायरस संक्रमण के असर और उससे निपटने के तरीके सुझाती है सत्यार्थी की नयी पुस्तक

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नोबेल पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी (Kailash Satyarthi) ने एक पुस्तक लिखी है जिसमें उन्होंने बताया है कि किस तरह से कोरोना वायस संक्रमण ने जीने के तरीके पर असर डाला है, साथ ही इससे पार पाने के तरीकों का भी जिक्र पुस्तक में किया गया है.

ब्रिटिश भारतीय लेखिका अनिता आनंद की कहानी जालियांवाला बाग को मिला इतिहास साहित्य पुरस्कार

ब्रिटिश भारतीय लेखिका अनिता आनंद की कहानी जालियांवाला बाग को मिला इतिहास साहित्य पुरस्कार

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ब्रिटिश भारतीय पत्रकार और लेखिका अनिता आनंद की किताब ‘‘ द पेशेंट असैसिन : ए ट्र टेल ऑफ मैसकर, रिवेंज ऐंड द राज’’ को यहां का प्रतिष्ठित इतिहास साहित्य पुरस्कार प्रदान किया गया है. उल्लेखनीय है कि इस किताब में उन्होंने वर्ष 1919 में अमृतसर के जालियांवाला बाग में हुए नरसंहार से घिरे एक युवक (क्रांतिकारी उधम सिंह)की कहानी को पिरोया है.

 
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