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This Article is From Oct 10, 2025

क्या होता है ग्रीन गोल्ड, जिससे बना होता है नोबेल प्राइज- जानें कितनी होती है इसकी कीमत

Nobel Prize Facts: नोबेल प्राइज में इस्तेमाल होने वाले सोने में एक ऐसी चीज मिलाई जाती है, जिससे वो ग्रीन गोल्ड कहलाता है. इसका वजन करीब 175 ग्राम होता है.

क्या होता है ग्रीन गोल्ड, जिससे बना होता है नोबेल प्राइज- जानें कितनी होती है इसकी कीमत
नोबेल पीस प्राइज का ऐलान

Nobel Prize: वेनेजुएला की मारिया कोरिना मचाडो को इस साल का नोबेल शांति पुरस्कार मिला है. इस सम्मान के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार अपनी पैरवी कर रहे थे, लेकिन नोबेल कमेटी ने उनके नाम की जगह मकाडो को इसके लिए चुना. नोबेल प्राइज एक खास तरह का मेडल होता है, जिस पर अल्फ्रेड नोबेल की तस्वीर छपी होती है. नोबेल प्राइज में मिलने वाला मेडल एक खास तरह के सोने से बना होता है, जिसे ग्रीन गोल्ड कहा जाता है. इसे अलग तरह से तैयार किया जाता है और ये गहरे पीले रंग का दिखता है. नोबेल प्राइज पर 24 कैरेट गोल्ड की कोटिंग होती है. आइए जानते हैं कि ग्रीन गोल्ड क्या होता है इसकी कीमत कितनी होती है. 

क्या होता है ग्रीन गोल्ड?

अब नाम से भले ही आपको लगे कि ये सोना हरा दिखता है, लेकिन ऐसा नहीं है. ये खास तरह का सोना काफी मजबूत होता है और चांदी को मिलाकर बनाया जाता है. इसमें करीब 65% सोना होता है और 35% चांदी होती है. इससे करीब 16 कैरेट ग्रीन गोल्ड बनता है, इसे इलेक्ट्रम भी कहा जाता है. नोबेल प्राइज मेडल में अब 18 कैरेट सोने का इस्तेमाल किया जाता है. इसका व्यास 66 मिलीमीटर होता है और वजन करीब 175 ग्राम होता है. इसकी जो चमक होती है वो 24 कैरेट गोल्ड की कोटिंग से आती है. 

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कितनी होती है कीमत?

नोबेल प्राइज में मिलने वाले इस मेडल में करीब 60 प्रतिशत से ज्यादा 18 कैरेट सोना होता है और बाकी चांदी का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे में इसकी कीमत करीब 10 लाख रुपये तक हो सकती है. नोबेल प्राइज मनी की बात करें तो हर नोबेल पुरस्कार जीतने वाले को 11 मिलियन स्वीडिश क्रोनर यानी करीब 10.38 करोड़ रुपये दिए जाते हैं. अगर एक ही प्राइज दो लोगों को दिया गया है तो ये पैसा दो हिस्सों में बराबर बांटा जाता है. 

नोबेल प्राइज के साथ मिलने वाला पूरा पैसा अल्फ्रेड नोबेल के ही फंड से आता है. जब उनकी मौत हुई थी तो उन्होंने अपनी संपत्ति का ज्यादातर हिस्सा नोबेल पुरस्कार के लिए दिया था. उनकी इच्छा थी कि इस पैसे को एक फंड में बदलकर इनवेस्ट किया जाए. इसके बाद से ही उनके इसी पैसे और उसके ब्याज से नोबेल पुरस्कार और उसमें मिलने वाली प्राइज मनी दी जाती है. 

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