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न्यूटन के पैदा होने से 1000 साल पहले इस भारतीय ऋषि ने गुरुत्‍वाकर्षण को लेकर कह दी थी ये बात

हमारे देश में कई ऐसे महान ऋषि हुए हैं, जिन्‍होंने हजारों साल पहले ऐसे सिद्धांत खोज लिए थे जिनका आधुनिक विज्ञान भी लोहा मानता है. ऐसे ही महान गणितज्ञ, खगोलशास्त्री और वैज्ञानिक हुए, जिनका नाम था- ब्रह्मगुप्त (Brahmagupta).

न्यूटन के पैदा होने से 1000 साल पहले इस भारतीय ऋषि ने गुरुत्‍वाकर्षण को लेकर कह दी थी ये बात

हमारे देश में कई ऐसे महान ऋषि हुए हैं, जिन्‍होंने हजारों साल पहले ऐसे सिद्धांत खोज लिए थे जिनका आधुनिक विज्ञान भी लोहा मानता है. ऐसे ही महान गणितज्ञ, खगोलशास्त्री और वैज्ञानिक हुए, जिनका नाम था- ब्रह्मगुप्त (Brahmagupta). उन्‍होंने कई खोजें की, पर सबसे प्रमुख थी यह बता देना कि पृथ्‍वी पर गुरुत्‍वाकर्षण है यानी ग्रेविटी. खास बात ये है कि जब ब्रह्मगुप्त ने गुरुत्‍वाकर्षण के बारे में लिखा, वह समय न्‍यूटन के पैदा होने के करीब 1000 साल पहले का था. 

कौन थे ब्रह्मगुप्त, कब हुआ था जन्‍म 

ब्रह्मगुप्त का जन्म 598 ईस्वी के आसपास माना जाता है. वे राजस्थान के भीनमाल (प्राचीन भिल्लमाल) में पैदा हुए. उन्होंने गणित और खगोल विज्ञान के क्षेत्र में ऐसे योगदान दिए, जिनका प्रभाव भारत ही नहीं, बल्कि अरब और यूरोप के वैज्ञानिकों पर भी पड़ा. उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना मानी जाती है- ब्रह्मस्फुटसिद्धांत (Brahmasphutasiddhanta), जिसे उन्होंने 628 ईस्वी में लिखा था. 

ब्रह्मगुप्त ने कहां गुरुत्वाकर्षण का जिक्र किया 

ब्रह्मगुप्त ने अपनी पुस्तक ब्रह्मस्फुटसिद्धांत में पृथ्वी के स्वभाव और वस्तुओं के नीचे गिरने का उल्लेख किया है. उन्होंने यह विचार रखा कि पृथ्वी अपने स्वभाव के कारण वस्तुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है, इसलिए वस्तुएं नीचे गिरती हैं. इसी आधार पर दावा किया जाता है कि ब्रह्मगुप्त ने न्यूटन से लगभग 1000 वर्ष पहले गुरुत्वाकर्षण की अवधारणा प्रस्तुत कर दी थी. 

ब्रह्मगुप्त ने लिखा था, 

"कृत्स्नः संसारः स्वभावेन एव आकृष्टः पतति... यतः आकृष्टिगुणात्मिका पृथिवी"‌
(अर्थात्: इस संसार की सभी वस्तुएं स्वभाव से ही पृथ्वी की ओर आकर्षित होकर गिरती हैं, क्योंकि पृथ्वी का स्वभाव ही चीजों को अपनी ओर आकर्षित करने का है)

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ब्रह्मगुप्त की कहीं अन्‍य महत्‍वपूर्ण बातें 

शून्य (Zero) के नियम- ब्रह्मगुप्त पहले गणितज्ञों में थे जिन्होंने शून्य के साथ जोड़, घटाव और अन्य गणितीय क्रियाओं के नियम स्पष्ट रूप से बताए. 

ऋणात्मक संख्याएं- उन्होंने धनात्मक और ऋणात्मक संख्याओं के साथ गणना के नियम दिए. 

बीजगणित- उन्होंने कई जटिल बीजगणितीय समीकरणों के समाधान प्रस्तुत किए. 

खगोल विज्ञान- उन्होंने ग्रहों की गति, ग्रहण और खगोलीय गणनाओं पर महत्वपूर्ण कार्य किया. 

ज्यामिति- उन्होंने चक्रीय चतुर्भुज का क्षेत्रफल निकालने का प्रसिद्ध सूत्र दिया, जिसे आज Brahmagupta Formula के नाम से जाना जाता है. 

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