
Radiation in Hiroshima and Nagasaki : जापान का जिक्र हो और हिरोशिमा-नागासाकी की बात न आए, ऐसा तो हो ही नहीं सकता. 80 साल पहले 1945 में इन दो शहरों पर अमेरिका ने परमाणु बम गिराए थे. इन हमलों ने लाखों जिंदगियां छीन लीं और पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया. लेकिन आज इतने सालों बाद सवाल ये उठता है कि क्या हिरोशिमा और नागासाकी में अब भी रेडिएशन का खतरा बाकी है? आइए जानते हैं इसका जवाब...
जापान के पास नहीं है अपनी, फिर भी कैसे सुरक्षित है ये देश? जानिए यहां

रेडिएशन खत्म, निशां बाकी
6 अगस्त 1945 को हिरोशिमा पर पहला परमाणु बम 'लिटिल ब्वॉय' और 9 अगस्त को नागासाकी पर 'फैट मैन' गिराया गया था. इन हमलों में करीब डेढ़ से ढाई लाख लोग मारे गए थे. बम के धमाके और आग के साथ-साथ रेडिएशन ने भी भारी तबाही मचाई थी. उस वक्त लोगों को लगता था कि इन शहरों में रेडिएशन का असर कई सालों तक रहेगा. लेकिन साइंटिफिक रिसर्च और लोकल गवर्नमेंट के आंकड़े बताते हैं कि बम गिरने के 24 घंटे के अंदर ही 80% रेडिएशन खत्म हो गया था. एक हफ्ते के अंदर रेडिएशन का लेवल सामान्य से भी बेहद कम हो गया था. आज हिरोशिमा और नागासाकी में रेडिएशन का स्तर दुनिया के बाकी शहरों जैसा ही है. लेकिन न केवल इस शहर के लोगों में बल्कि पूरी दुनिया में उस दहशत के निशान छूट गए हैं.

सर्वाइवर्स अब भी झेल रहे असर
भले ही शहर आज सुरक्षित हैं, लेकिन उस समय के सर्वाइवर्स, जिन्हें 'हिबाकुशा' कहा जाता है, अब भी रेडिएशन से जुड़ी हेल्थ प्रॉब्लम्स से जूझ रहे हैं. कई लोग कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का सामना कर रहे हैं. खासकर वो लोग जिन्हें बमबारी के बाद हुई 'काली बारिश' ने प्रभावित किया था, आज भी मेडिकल सुविधाओं के लिए कोर्ट तक लड़ाई लड़ रहे हैं.

आधुनिक और सुरक्षित शहर बन चुके हैं दोनों
आज हिरोशिमा और नागासाकी दोनों ही मॉडर्न और घनी आबादी वाले शहर हैं. हिरोशिमा में करीब 11 लाख और नागासाकी में 4 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं. यहां टूरिस्ट्स बड़ी संख्या में आते हैं और ये दोनों शहर जापान की इकॉनमी में अहम रोल निभा रहे हैं. हिरोशिमा का पीस मेमोरियल पार्क और नागासाकी का पीस पार्क उस दर्दनाक इतिहास की याद दिलाते हैं, लेकिन आज ये शहर जिंदगी और उम्मीद का प्रतीक बन चुके हैं.
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