विज्ञापन
This Article is From Oct 31, 2025

घोषणापत्र में किए गए चुनावी वादे पूरे करने जरूरी होते हैं? जानें इसे लेकर क्या है नियम

Manifesto Promise Rules: बिहार में विधानसभा चुनाव के लिए तमाम दलों की तरफ से अपने घोषणापत्र जारी किए जा रहे हैं, ऐसे में सवाल है कि चुनावी वादे पूरे करने जरूरी होते हैं या फिर नहीं?

घोषणापत्र में किए गए चुनावी वादे पूरे करने जरूरी होते हैं? जानें इसे लेकर क्या है नियम
बिहार में एनडीए का मेनिफेस्टो जारी

Manifesto Promise Rules: बिहार विधानसभा चुनाव के लिए महागठबंधन के बाद अब एनडीए की तरफ से भी अपना घोषणापत्र जारी कर दिया गया है. इसे हमेशा की तरह संकल्प पत्र का नाम दिया गया है. इसमें महिलाओं, किसानों और गरीबों समेत तमाम वर्गों के लिए कई तरह के वादे किए गए हैं. बताया गया है कि अगर एनडीए फिर से सत्ता में लौटती है तो जनता को क्या-क्या दिया जाएगा. अब जिस जनता के लिए ये वादे किए जाते हैं, उनके मन में हर बार एक सवाल तो जरूर होता है कि आखिर चुनावी वादे पूरे करने जरूरी होते हैं या फिर इन्हें लिखित में देकर भी नकारा जा सकता है. ऐसे कुछ मामले कोर्ट में भी पहुंचे, जहां किसी दल पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया गया. आइए जानते हैं कि इसे लेकर क्या नियम है. 

क्या होता है घोषणापत्र?

जब भी कोई पार्टी चुनाव लड़ती है तो उससे पहले जनता से कई वादे किए जाते हैं. कुछ वादे हवा हवाई होते हैं, वहीं कुछ वादों को लिखित में जनता तक पहुंचाया जाता है. इसके लिए तमाम वर्गों का ध्यान रखा जाता है और बताया जाता है कि अगर चुनाव में पार्टी जीतती है तो जनता को क्या-क्या दिया जाएगा. यानी ये एक ऐसा दस्तावेज है, जिससे लोगों को ये पता चलता है कि कौन सी पार्टी उनके लिए क्या नया करने वाली है. 

KG से पीजी तक मुफ्त शिक्षा और आधुनिक स्किल लैब, NDA के घोषणापत्र में छात्रों के लिए क्या है?

क्या वादे पूरे करना जरूरी है?

अब उस सवाल पर आते हैं कि क्या चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादे जीत के बाद पूरे करने जरूरी होते हैं? इसे लेकर कोई भी कानूनी नियम नहीं बनाया गया है, यानी वादे पूरे करने पर किसी उम्मीदवार या दल के खिलाफ एक्शन नहीं लिया जा सकता है. हालांकि कुछ भी हवा हवाई वादे करके अगर कोई सत्ता में आता है तो उसकी जवाबदेही जरूर तय की जाती है. जैसे- पैसे बांटने या फिर कोई रिश्वत देने के वादे के मामले में सजा हो सकती है. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत बताया गया है कि पार्टियां और उम्मीदवार क्या कर सकते हैं और क्या नहीं. हालांकि इसमें वादाखिलाफी को लेकर कोई साफ जिक्र नहीं किया गया है. 

सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचे मामले

ऐसे कुछ मामले सु्प्रीम कोर्ट तक भी गए हैं और इन पर सुनवाई भी हुई है. हालांकि ऐसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने भी ये माना कि ये राजनीतिक वादे थे, जिनसे ये साबित नहीं किया जा सकता है कि किसी तरह का भ्रष्टाचार हुआ है. कुछ मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से घोषणापत्र को लेकर गाइडलाइन बनाने की भी बात कही. चुनाव आयोग आचार संहिता के नियमों के तहत पार्टियों और उम्मीदवारों के बयानों समेत बाकी चीजों पर नजर रखता है. हालांकि इसमें भी घोषणापत्र के वादों को लेकर कोई खास नियम नहीं है. 

लेखक के बारे में
img
NDTV News Desk
NDTV News Desk
पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Manifesto Promise Rules, NDA Manifesto For Bihar Election, Manifesto Promises, Election Promises
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com