बिहार में शराबबंदी हुई. ये कितनी सफल है और कितनी विफल ये बहस का मुद्दा हो सकता है, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भले ही भाजपा के साथ मिलकर सरकार चला रहे हों लेकिन सच्चाई है ये बिहार के पड़ोसी भाजपा शासित राज्य उत्तर प्रदेश और झारखंड में गुहार लगाने के बावजूद शराबबंदी नहीं करवा पाए. उल्टे शराब की दुकानों में बेतहाशा वृद्धि हुई है. इसी को मुद्दा बनाकर शनिवार को रांची में अपनी पार्टी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में नीतीश कुमार ने कहा, 'यह क्या तरीक़ा है भाई...ये कितनी गंदी बात है.' हालांकि नीतीश ने रघुबर दास का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा साफ़ था. नीतीश ने कहा कि बहुत लोग मेरी आलोचना कर रहे हैं लेकिन बिहार को इससे (शराबबंदी से) बहुत फ़ायदा हुआ और राजस्व की जो क्षति हुई उसकी भरपाई कर ली गई है. नीतीश ने कहा कि झारखंड में भी अगर जनता दल यूनाइटेड को मौक़ा मिला तो वहां के पांच निश्चय में शराबबंदी को भी एक निश्चय के रूप रखा गया है.
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आपको बता दें कि झारखंड के विधानसभा चुनाव को देखते हुए नीतीश कुमार इन दिनों राज्य में सक्रिय हैं. उन्होंने झारखंड इकाई को चुनाव में कितनी सीटों पर लड़ना है या किसके साथ गठबंधन करना है, इस फैसले के लिए अधिकृत किया है. नीतीश कुमार ने अपने भाषण के अधिकांश हिस्से में बिहार में किए गए कार्यों को गिनाया और कहा कि जबसे उनकी सरकार बनी है, समाज के सभी वर्गों का विकास हुआ है. इस सम्बंध में उन्होंने कई आंकड़े भी दिए. उन्होंने झारखंड के लिए पांच निश्चय, जिसमें हर क्षेत्र के लिए विकास प्राधिकरण, बिहार की तर्ज़ पर पिछड़ी और अति पिछड़ी जातियों के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान, बुनकरों के लिए विशेष व्यवस्था आदि को शामिल किया है.
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हालांकि नीतीश की इन घोषणाओं का कितना असर होगा, ये विधानसभा चुनाव के बाद ही पता चलेगा, लेकिन जनता दल यूनाइटेड का जो संगठन ढांचा है, उसमें फ़िलहाल इस विधान सभा चुनाव में उनके अपने पार्टी के नेता मानते हैं कि बहुत ज़्यादा दाल नहीं गलने वाली है. हालांकि पार्टी की कोशिश होगी कि उसका खाता खुले, लेकिन सच्चाई यही है कि भाजपा ने जिस प्रकार से आक्रामक तरीक़े से अपने सरकार में काम और संगटन का विस्तार किया है, वैसे में बिहार केंद्रित जनता दल यूनाइटेड चुनाव में कोई असरदार भूमिका शायद ही इस बार निभा पाए.
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