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CM के सामने इंतजाम, दौरा खत्म होते ही गायब? हाजीपुर बाढ़ राहत शिविर में वायरल वीडियो-ऑडियो से उठे बड़े सवाल

बिहार के हाजीपुर स्थित बाढ़ राहत शिविर में CM के दौरे के बाद पशुओं के चारे के बोरे हटाए जाने का आरोप लगा है. वायरल वीडियो और ऑडियो के बाद गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

हाजीपुर बाढ़ राहत शिविर से सामने आया विवाद
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बिहार के हाजीपुर स्थित बाढ़ राहत शिविर से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने राहत व्यवस्था और प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. आरोप है कि मुख्यमंत्री के दौरे से पहले पशुओं के चारे के नाम पर राहत शिविर में चोकर के बोरे रखे गए, लेकिन दौरा खत्म होते ही उन्हें वापस ले जाया गया. इस पूरे मामले से जुड़ा एक कथित ऑडियो भी वायरल हो रहा है.

मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान राहत शिविर की तस्वीरों में पशु राहत केंद्र के पीछे बड़ी संख्या में चोकर के बोरे रखे दिखाई दिए. दावा किया जा रहा है कि इन बोरों को पशुओं में बांटने के लिए नहीं, बल्कि केवल व्यवस्था दिखाने के लिए रखा गया था.

एंबुलेंस में भरकर ले जाए गए चोकर के बोरे

मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के बाद सामने आए एक वीडियो में कुछ लोग एंबुलेंस में चोकर के बोरे लादते हुए दिखाई दे रहे हैं. इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि पशुओं के लिए लाया गया चारा आखिर एंबुलेंस में भरकर वापस क्यों ले जाया जा रहा था?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि राहत शिविर में मौजूद पशुपालकों और उनके जानवरों को चोकर नहीं बांटा गया. वहीं बोरे कार्यक्रम के बाद हटाए जाने लगे.

वायरल ऑडियो ने बढ़ाया विवाद

मामले को लेकर एक कथित ऑडियो भी सामने आया है, जिसे पशुपालन विभाग के एक अधिकारी का बताया जा रहा है. ऑडियो में कहा जा रहा है कि, टडीएम मैडम ने कहा है कि मुख्यमंत्री आ रहे हैं, इसलिए चोकर रख दीजिए, बांटना नहीं है.'

ऑडियो में यह भी दावा किया जा रहा है कि चोकर सरकारी पैसे से नहीं बल्कि संबंधित अधिकारी अपने पैसे से खरीदकर लाए थे और उसे केवल निरीक्षण के दौरान दिखाने के लिए रखा गया था. हालांकि इस ऑडियो की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसके सामने आने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं.

राहत शिविर में रह रहे लोगों ने भी उठाए सवाल

राहत शिविर में रह रहे संतोष कुमार का आरोप है कि उन्हें पशुओं के लिए कोई चोकर नहीं मिला. वहीं शिविर में मौजूद फुला देवी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि एंबुलेंस मरीजों के लिए होती है, चोकर ढोने के लिए नहीं. उनका कहना है कि यदि चोकर मौजूद था तो उसे पशुपालकों में थोड़ा-थोड़ा ही बांट दिया जाता, जिससे उनके जानवरों को फायदा मिलता. स्थानीय लोगों के अनुसार पशुओं के चारे में चोकर मिलाने से दूध उत्पादन बढ़ता है और यह अपेक्षाकृत महंगा भी होता है.

अब सवाल है कि अगर चोकर खराब था तो मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के कुछ घंटे पहले शिविर मे क्यों लाया गया और अधिकारी की इस पूरे मामले पर आडियो की जांच कर क्या करवाई करते हैं?

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