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जेट्स की कमी से जूझ रही वायुसेना को क्या समय पर मिल पाएगा तेजस-मार्क1ए? HAL चीफ ने क्या कहा है?

तेजस मार्क 1ए की हर डिलीवरी वायुसेना के लिए ऑपरेशनल तौर पर बेहद अहम है. लेकिन पिछले कुछ सालों में इस प्रोग्राम की समयसीमा बार-बार आगे खिसकती रही है. पहले अक्टूबर में डिलीवरी की बात कही गई, फिर 2025 के अंत तक का भरोसा दिया गया और अब मार्च 2026 तक डिलीवरी करने की बात कही गई है.

जेट्स की कमी से जूझ रही वायुसेना को क्या समय पर मिल पाएगा तेजस-मार्क1ए? HAL चीफ ने क्या कहा है?
नई दिल्ली:

भारत के स्वदेशी फाइटर जेट एलसीए (लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) तेजस मार्क -1ए को लेकर हो रही देरी के बीच हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) की ओर से एक अहम बयान सामने आया है. एचएएल के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. डी.के. सुनील ने कहा है कि तेजस मार्क-1ए के पांच विमान पूरी तरह तैयार हैं. इन विमानों के सारे जरूरी फायरिंग ट्रायल और मिसाइल ट्रायल पूरे किए जा चुके हैं. जल्द ही इन्हें वायुसेना को सौंप दिया जाएगा. हालांकि एचएएल  चेयरमैन ने विमानों की डिलीवरी की कोई तय तारीख नहीं बताई है. 

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प्रक्रिया के तहत अब एचएएल, भारतीय वायुसेना से संपर्क करेगा ताकि इन पांच विमानों को मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान ही वायुसेना में शामिल किया जा सके. अगर सब कुछ तय समय पर हुआ , तो तेजस मार्क-1ए प्रोग्राम में एक मील का पत्थर साबित होगा.एचएएल चीफ के मुताबिक, जिन पांच तेजस मार्क -1ए विमानों की बात हो रही है, उन पर एयर-टू-एयर यानी हवा से हवा में मार करने वाले हथियारों के ट्रायल, मिसाइल फायरिंग और जरूरी फ्लाइट टेस्ट सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं. इन विमानों को ऑपरेशनल जरूरतों के हिसाब से तैयार किया गया है और अब वे वायुसेना में शामिल किए जाने के लिए तैयार हैं.

तेजस मार्क-1ए, तेजस के पुराने वर्जन की तुलना में कहीं ज्यादा एडवांस है. इसमें ऐसा (AESA) रडार, बेहतर इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) सिस्टम, आधुनिक एवियोनिक्स और ज्यादा हथियार ले जाने की क्षमता जैसे कई अहम अपग्रेड शामिल हैं.

वायुसेना को है जेट्स की जरूरत

भारतीय वायुसेना इस समय फाइटर स्क्वाड्रन की भारी कमी से जूझ रही है. कई पुराने विमान रिटायर हो चुके हैं. कुछ विमानों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जा रहा है. तेजस मार्क-1ए को खास तौर पर पुराने मिग-21 विमानों की जगह लेने के लिए तैयार किया गया है.लेकिन जेट्स की इस कमी के पीछे एचएएल की लेटलतीफी एक बड़ा कारण है. तेजस के शुरुआती मॉडल को 1993 में hee वायुसेना में शामिल करने का प्लान था. लेकिन इसे शुरुआती क्लियरेंस ही 2013 में मिला. नतीजा ये हुआ कि मिग-21 और जगुआर जैसे विमान लगातार पुराने होते गए. नए फाइटर जेट्स के नाम पर बस 36 रफाल मिले जो कि जाहिर तौर पर काफी नहीं है. 

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ऐसे में तेजस मार्क 1ए की हर डिलीवरी वायुसेना के लिए ऑपरेशनल तौर पर बेहद अहम है. लेकिन पिछले कुछ सालों में इस प्रोग्राम की समयसीमा बार-बार आगे खिसकती रही है. पहले अक्टूबर में डिलीवरी की बात कही गई, फिर 2025 के अंत तक का भरोसा दिया गया और अब मार्च 2026 तक डिलीवरी करने की बात कही गई है.

एचएएल की मानें तो इस लड़ाकू की डिलीवरी में देरी की बड़ी वजह अमेरिकी इंजन के सप्लाई में देरी बताई जा रही हैं. तेजस में अमेरिकन कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक का FN-404-IN20 इंजन लगता है. इसके अलावा देरी की एक और वजह बताई जाती है कि विमान में वेपन इंटीग्रेशन और फायरिंग ट्रायल में देरी. और ये जिम्मेदारी एचएएल की है. लेकिन एचएएल यह बात दोहराता रहा है कि शुरुआती डिलीवरी में देरी के बावजूद तेजस मार्क -1ए लंबी अवधि में भारतीय वायुसेना के लिए एक मजबूत और भरोसेमंद प्लेटफॉर्म साबित होगा.

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