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कुत्ते के काटने के मामलों में सुप्रीम कोर्ट इतना सख़्त क्यों? आंकड़ों से समझिए पूरी कहानी

भारत में आवारा कुत्तों के काटने का मामला काफी गंभीर है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी चिंता जताई है. हर साल देश में 37 लाख से ज्यादा डॉग बाइट के मामले आते हैं.

कुत्ते के काटने के मामलों में सुप्रीम कोर्ट इतना सख़्त क्यों? आंकड़ों से समझिए पूरी कहानी
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले में सुनाया बड़ा फैसला
  • सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों से संबंधित डॉग लवर्स की याचिकाएं खारिज करते हुए राज्य की जिम्मेदारी पर बल दिया
  • भारत में कुत्ते के काटने के लगभग 37.17 लाख मामले 2024 में रिपोर्ट हुए
  • आवारा कुत्तों की संख्या भारत में 1.53 करोड़ है और उनके नियंत्रण के लिए नसबंदी और टीकाकरण आवश्यक है
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा कुत्तों पर डॉग लवर्स की याचिकाएं खारिज कर दी हैं. अदालत ने पशु कल्याण बोर्डों द्वारा जारी एसओपी को कायम रखा है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश भर में कुत्ता काटने की घटनाओं को सुप्रीम कोर्ट अनदेखा नहीं कर सकती. इसमें बच्चों, महिलाओं को बुरी तरह घायल किया गया है. कुत्ते के काटने के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी सख्ती दिखाई है. आखिर आवारा कुत्तों का मामला कोर्ट के दरवाजे तक कैसे पहुंचा और इस मामले में कोर्ट ने इतनी सख्ती क्यों दिखाई? टाइमलाइन के साथ पूरी बात समझिए.

आज कोर्ट ने क्या दिए आदेश?

  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा हमने 7 नवंबर के फैसले को वापस लेने की मांग करने वाले आवेदनों पर विस्तार से विचार किया है - हमने सभी आवेदनों को खारिज कर दिया है.
  • राज्य के दायित्वों के लिए एक रूपरेखा तैयार करना आवश्यक है.
  • गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार में, कुत्ते के काटने के हमले के खतरे के बिना, स्वतंत्र रूप से जीने का अधिकार भी शामिल है.
  • राज्य मूक दर्शक बनकर नहीं रह सकता, अदालत उन कठोर जमीनी वास्तविकताओं से आंखें नहीं फेर सकती, जहां बच्चे, अंतर्राष्ट्रीय यात्री और बुज़ुर्ग लोग कुत्तों के काटने की घटनाओं का शिकार बने हैं.
  • संविधान ऐसे समाज की परिकल्पना नहीं करता, जहां बच्चों और बुज़ुर्गों को अपनी शारीरिक शक्ति या किस्मत के भरोसे जीना पड़े.

भारत में कुत्ते के काटने की घटनाएं, जो रिपोर्ट हुईं (2024)

  • हर साल  – 37,15,713
  • हर महीने - 3,09,643
  • हर दिन – 10,321
  • हर घंटा – 430
  • हर मिनट - 7
  • दिल्ली में कुत्ते के काटने के मामले - हर दिन लगभग 103 (जनवरी 2025)
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भारत में रेबीज के कारण होने वाली मौंते

रेबीज का कोई इलाज नहीं है और यह 100% जानलेवा है. सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल रेबीज के कारण लगभग 300 लोगों की मौत होती है. लेकिन WHO के अनुसार भारत में हर साल रेबीज के कारण 18 से 20 हजार लोगों की मौत होती है. ज्यादातर मामले रिपोर्ट नहीं किए जाते. 

भारत में कुत्ते के काटने के मामले, जो रिपोर्ट हुए

  • 2024- लगभग 37.17 लाख
  • 2023- लगभग 30.53 लाख
  • 2022- लगभग 21.9 लाख
  • 2021- 17 लाख से अधिक
  • 2020- 46 लाख से अधिक 
  • 2024 में- सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक और बिहार से सामने आए.
  • 2025: एक RTI के हवाले से, मीडिया रिपोर्ट्स में 2025 में भारत में 47.48 लाख कुत्ते के काटने के मामले बताए गए हैं. हालांकि अभी तक कोई ऑफिशियल डेटा नहीं.
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दिल्ली में कुत्ते के काटने के मामले

  • 2025 - 3,196 (केवल जनवरी 2025) (रोजाना लगभग 103)
  • 2024 - 25,210 (रोजाना लगभग 69)
  • 2023 - 17,874 (रोजाना लगभग 49)
  • 2022 - 6,691 (रोजाना लगभग 18)

(स्रोत - संसद, PIB)

भारत में कितने आवारा कुत्ते

साल 2019 में हुई 20वीं पशुगणना के अनुसार, भारत में आवारा कुत्तों की संख्या 1.53 करोड़ है. वहीं दिल्ली में आवारा कुत्ते 60452 है.

कुत्तों की आबादी पर कंट्रोल

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 2030 तक भारत से कुत्तों वाले रेबीज उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना शुरू की है. भारत सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग ने पशु जन्म नियंत्रण (कुत्ते) नियम, 2001 (2010 में संशोधित) अधिनियमित किया है जिसे आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय प्राधिकरण द्वारा लागू किया जाना है. नियमों का मुख्य फोकस जनसंख्या के साधन के रूप में आवारा कुत्तों के रेबीज रोधी टीकाकरण और आवारा कुत्तों के नसबंदी पर है.

कुत्तों को क्यों नहीं हटाया जा सकता?

पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के अनुसार स्वस्थ जानवरों को मारने पर प्रतिबंध है. यह किसी भी स्थान (क्षेत्र, हाउसिंग सोसायटी, आदि) से जानवरों को हटाने से भी रोकता है. आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित या प्रबंधित करने का एकमात्र प्रभावी तरीका पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम है. सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश (2015) में निर्देश दिया है कि स्थानीय प्राधिकारी द्वारा अधिसूचित नियम के तहत निर्धारित तरीकों के अलावा कोई नवीन विधि नहीं अपनाया जाना चाहिए.

आवारा कुत्तों का टीकाकरण और नसबंदी चुनौती क्यों?

आवारा कुत्तों को ट्रैक करना बहुत मुश्किल है, वे एक जगह से दूसरी जगह घूमते रहते हैं. किसी भी विशेष क्षेत्र में सभी आवारा कुत्तों का पता लगाना असंभव है. विभिन्न नगर निगम, राज्य, सरकार, एजेंसियों के बीच कोआर्डिनेशन की आवश्यकता है. आवारा कुत्तों के स्वास्थ्य पर नजर रखना बहुत मुश्किल है. ये पता लगाना मुश्किल है कि कौन सा रेबीज संक्रमित है और कौन सा नहीं.

रेबीज पर क्या कहता है WHO?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, रेबीज 150 से अधिक देशों में पाया जाता है. सभी स्तनधारी रेबीज का कारण बन सकते हैं. हालांकि, मनुष्यों में रेबीज के लिए अधिकतर कुत्ते, बंदर, बिल्ली, मवेशी, चमगादड़, लोमड़ी आदि जिम्मेदार होते हैं. भारत में रेबीज के लगभग 99% मामलों के लिए कुत्ते जिम्मेदार होते हैं. इसकी वजह उनकी इंसानों से निकटता है. हालांकि, सभी कुत्ते रेबीज से संक्रमित नहीं होते हैं. रेबीज के कारण हर साल दुनिया भर में 55,000 से अधिक लोगों की जान चली जाती है. 95% मानव मौतें एशिया और अफ़्रीका में होती हैं. विश्व में रेबीज से होने वाली मौतों का लगभग 36% भारत में है.

WHO के अनुसार, भारत में यह हर साल लगभग 18,000 - 20,000 मौतों का कारण बनता है. 5 से 14 साल की उम्र के बच्चे इसके अक्सर शिकार होते हैं. भारत में रिपोर्ट किए गए रेबीज के लगभग 30% - 60% मामले और मौतें 15 साल से कम उम्र के बच्चों में होती हैं. क्योंकि बच्चों में होने वाले काटने के मामले अक्सर पता नहीं चलते और रिपोर्ट नहीं किए जाते हैं.

रेबीज कितना खतरनाक?

लक्षण प्रकट होने पर रेबीज लगभग 100% घातक होता है.सभी कुत्ते रेबीज से संक्रमित नहीं होते हैं. रेबीज से संक्रमित कुत्ते ज्यादातर लक्षण दिखने के 10 दिनों के भीतर मर जाते हैं. संक्रमित कुत्ते आम तौर पर अधिक आक्रामक हो जाते हैं. लापरवाही सबसे बड़ी समस्या है. लोग आमतौर पर रेबीज से ग्रस्त जानवर के काटने या खरोंच लगने से संक्रमित होते हैं. 99% तक मामलों में रेबीज ग्रस्त कुत्तों द्वारा मनुष्यों में संक्रमण होता है. आमतौर पर लोग मानते हैं कि कुत्ते के काटने से ही रेबीज होता है, लेकिन रेबीज का संक्रमण बिना काटे भी हो सकता है. मनुष्यों में रेबीज, संक्रमित जानवर द्वारा खरोंच या खुले घाव पर लार से भी हो सकता है. ऐसे मामलों में लोग एंटी रेबीज वैक्सीन नहीं लेते हैं, जिससे रेबीज हो सकता है.

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टीकाकरण से खतरा हो सकता है कम

मनुष्यों में रेबीज से होने वाली मौतों को शीघ्र और उचित टीकाकरण के माध्यम से 100% रोका जा सकता है. लोगों में रेबीज को रोकने के लिए कुत्तों का टीकाकरण सबसे अधिक लागत प्रभावी रणनीति है. रेबीज टीकाकरण (उचित) इस बीमारी को रोकने में 100% प्रभावी है. आम तौर पर लोग लागत के कारण या अनुपलब्धता के कारण सभी खुराक लेने से बचते हैं.

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