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This Article is From Aug 22, 2025

Exclusive: नागपुर की प्रोफेसर विपक्ष के उपराष्ट्रपति कैंडिडेट से क्यों नाराज?

प्रतीक्षा पटवारी ने पूछा कि कई कांग्रेसी नेताओं ने पहले माओवादियों को क्रांतिकारी बताया है. क्या रेड्डी और राहुल गांधी को भी माओवादी क्रांतिकारी लगते हैं?

Exclusive: नागपुर की प्रोफेसर विपक्ष के उपराष्ट्रपति कैंडिडेट से क्यों नाराज?
  • इंडिया गठबंधन ने बी सुदर्शन रेड्डी को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया है, जिस पर सवाल उठाए गए हैं.
  • प्रोफेसर ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर न्यायमूर्ति रेड्डी के 2011 के फैसले पर स्पष्टीकरण मांगा है.
  • कांग्रेस नेता नाना पटोले ने कहा है कि अदालत के फैसले पर आपत्ति हो तो अपील का रास्ता उपलब्ध है.
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इंडिया गठबंधन ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश बी सुदर्शन रेड्डी को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है. इस पर नागपुर की एक प्रोफेसर प्रतीक्षा पटवारी ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर कुछ सवाल पूछे हैं. वर्ष 2011 में न्यायमूर्ति रेड्डी द्वारा सलवा जुडूम मामले में दिए गए फैसले का हवाला देते हुए, उन्होंने कुछ सवाल उठाए हैं, जैसे कि, अगर माओवादियों को जीने, समानता और मानवाधिकार का अधिकार है तो क्या अन्य आदिवासियों को यह अधिकार नहीं है? और क्या रेड्डी और राहुल गांधी भी अन्य कुछ कांग्रेसी नेताओं की तरह माओवादियों को क्रांतिकारी मानते हैं? इस पत्र के विषय में एनडीटीवी ने उनसे बातचीत की तो उन्होंने कहा कि जब कई अन्य योग्य व्यक्ति मौजूद थे, तो बी सुदर्शन रेड्डी को ही उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने का क्या कोई खास कारण है?

प्रोफेसर ने राहुल गांधी से भी पूछे सवाल

प्रोफेसर प्रतीक्षा पटवारी ने सवाल किया कि क्या 2011 में सलवा जुडूम के खिलाफ नलिनी सुंदर की याचिका पर उनका दिया गया फैसला क्या इसका कारण है? संविधान को न मानने वाले माओवादियों की भीषण हिंसा के कारण, जिनका जीना मुश्किल हो गया था, उन आदिवासियों ने अंतिम उपाय के रूप में शांतिपूर्ण सलवा जुडूम आंदोलन शुरू किया और अपने गांवों में इसका विरोध करना शुरू किया, लेकिन न्यायमूर्ति रेड्डी के 2011 के एक फैसले के कारण वह आंदोलन समाप्त हो गया. क्या उन आदिवासियों को भी जीने, समानता और मानवाधिकार का अधिकार नहीं था?

प्रतीक्षा पटवारी ने पूछा कि कई कांग्रेसी नेताओं ने पहले माओवादियों को क्रांतिकारी बताया है. क्या रेड्डी और राहुल गांधी को भी माओवादी क्रांतिकारी लगते हैं? चूंकि, जंगल में अस्तित्व अब खत्म हो रहा है, इसलिए माओवादियों को अब सामाजिक और राजनीतिक संगठनों की शरण लेते हुए हम देख रहे हैं. इस पर राहुल गांधी क्या कहना चाहेंगे?

हालांकि, इस सवाल पर कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा है कि किसी को अदालती फैसले पर आपत्ति हो तो वे अपील कर सकते हैं, लेकिन, अब सुदर्शन चक्र घूम चुका है जो एनडीए के प्रत्याशी को पराजय दिलाएगा.

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