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सोनिया गांधी ने फिलिस्तीन पर चुप्पी का लगाया आरोप, भाजपा बोली- बांग्लादेशी हिंदुओं पर क्यों हैं चुप

इजरायल-फिलिस्तीन विवाद के बीच गाजा में हो रहे कत्लेआम पर कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने एक लेख लिखा है. उन्होंने इस लेख के जरिए गाजा के मामले में भारत सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए. सोनिया गांधी के लेख पर बीजेपी ने प्रतिक्रिया दी है.

सोनिया गांधी ने फिलिस्तीन पर चुप्पी का लगाया आरोप, भाजपा बोली- बांग्लादेशी हिंदुओं पर क्यों हैं चुप
गाजा के हालातों पर सोनिया गांधी ने लेख लिखा है, जिसपर बीजेपी ने भी प्रतिक्रिया दी है.
NDTV
नई दिल्ली:

कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने गाजा के मामले में नरेन्द्र मोदी सरकार की 'निरंतर चुप्पी' पर सवाल उठाते हुए शनिवार को कहा कि भारत को फिलस्तीनियों के समर्थन में स्पष्ट और मुखर रुख अपनाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि गाजा और वेस्ट बैंक में हो रही घटनाओं पर वैश्विक जनमत के अनुरूप भारत को प्रतिक्रिया देनी चाहिए. सोनिया ने एक अंग्रेजी अखबार के लिए लिखे लेख में संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि गाजा में बच्चों को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है और वहां की मानवीय स्थिति बेहद भयावह हो चुकी है. उनका कहना है कि हजारों बच्चों की मौत और तबाही अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए गंभीर चिंता का विषय है.

सोनिया गांधी के इस लेख पर भाजपा की प्रतिक्रिया भी सामने आई है. भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस विदेश नीति पर वोट बैंक की राजनीति करती है.

कांग्रेस की विदेश नीति पर वोट बैंक की राजनीतिः शहजाद पूनावाला

सोनिया गांधी के लेख पर बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि भारत ने गाजा और फिलिस्तीन के मुद्दे पर कई बार अपना रुख साफ किया है और मानवीय सहायता भी दी है. उन्होंने बताया कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र में युद्धविराम के प्रस्तावों पर वोट देकर अपना रुख दिखाया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फिलिस्तीन का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भी मिला है.

उन्होंने कहा, "समस्या यह है कि कांग्रेस हमेशा विदेश नीति को वोट बैंक से जोड़कर देखती है और इसीलिए वोट बैंक की राजनीति के कारण उन्होंने इज़राइल के साथ कभी कोई संबंध नहीं बनाए." उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी हमास के प्रति सहानुभूति रखती है और इज़राइल पर हुए हमलों के बारे में कभी कुछ नहीं कहती.

उन्होंने कहा, "सोनिया गांधी गाजा में मुसलमानों के लिए आवाज़ उठाती हैं, राफ़ा के बारे में ट्वीट करती हैं, लेकिन ढाका में हिंदुओं के मामले पर चुप रहती हैं. इससे पता चलता है कि उनके लिए विदेश नीति भी वोट बैंक के हिसाब-किताब से तय होती है."

फलस्तीनियों के खिलाफ इजरायली शासन नरसंहार कर रहाः सोनिया गांधी

मालूम हो कि सोनिया गांधी ने अपने लेख में लिखा, 'संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि गाजा में फलस्तीनियों के विरुद्ध इजरायली शासन नरसंहार कर रहा है. जून 2026 में, इसी आयोग ने मार्मिक ढंग से इस बात को दोहराया कि इजराइल की कार्रवाइयों का उद्देश्य गाजा में फलस्तीनियों के अस्तित्व को ही समाप्त करना है और इसके लिए उनके बच्चों को निशाना बनाया जा रहा है.'

गाजा पर सोनिया गांधी का लेख.

गाजा पर सोनिया गांधी का लेख.

20 हजार बच्चों की हत्या, 44 हजार बच्चे घायल

इस आयोग की अध्यक्षता अब प्रतिष्ठित भारतीय न्यायविद न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर (सेवानिवृत्त) कर रहे हैं, सोनिया गांधी के अनुसार, 94 पृष्ठों की यह रिपोर्ट पढ़ना अत्यंत पीड़ादायक है. उन्होंने कहा, 'इसमें गाजा में इज़राइल द्वारा की गई तबाही और उसके पीछे निहित नरसंहार की मंशा का भयावह विवरण दिया गया है. कम से कम 20,000 बच्चों की हत्या की जा चुकी है और अन्य 44,000 बच्चे घायल हुए हैं, जिनमें से अनेक जीवन भर के लिए अपंग हो गए हैं. बच्चों को निशाना बनाना कोई आकस्मिक घटना नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है.''

सोनिया ने लिखा- मारे गए कई बच्चों के सिर व गर्दन में मिले गोली लगने के प्रमाण

सोनिया ने लिखा है, ‘‘मारे गए या घायल हुए लोगों में 27 प्रतिशत बच्चे हैं और अनेक के सिर तथा गर्दन में गोली लगने के प्रमाण मिले हैं. गाज़ा के 97 प्रतिशत विद्यालय नष्ट कर दिए गए हैं. बाल चिकित्सा अस्पतालों सहित स्वास्थ्य अवसंरचना को भी तबाह कर दिया गया है, जिसके परिणामस्वरूप गर्भपात और प्रसव संबंधी जटिलताओं में 300 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.'

कांग्रेस नेता ने कहा कि कई पश्चिमी देशों ने फिलस्तीनी राष्ट्र को मान्यता दी है, कई देशों ने इजराइल के साथ अपने संबंधों की समीक्षा की है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इजराइल की कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं, लेकिन भारत इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है. उन्होंने आरोप लगाया कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एस. मुरलीधर की अध्यक्षता वाले आयोग की रिपोर्ट पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

सोनिया गांधी ने कहा कि भारत की ऐतिहासिक विदेश नीति उपनिवेशवाद-विरोधी एकजुटता, राष्ट्रीय संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय शांति के सिद्धांतों पर आधारित रही है, लेकिन मौजूदा समय में देश इन मूल्यों से दूर होता दिखाई दे रहा है.

सोनिया गांधी ने कहा कि मोदी सरकार की चुप्पी और निष्क्रियता केवल नैतिक दृष्टि से निंदनीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हित के दृष्टिकोण से भी समझ से परे है. उन्होंने आरोप लगाया कि भारत ऐसे समय में इजराइल के रणनीतिक प्रभाव क्षेत्र के करीब जा रहा है, जब दुनिया का एक बड़ा हिस्सा उससे दूरी बना रहा है.

मोदी सरकार की चुप्पी को उचित नहीं ठहरा सकतेः सोनिया गांधी

उन्होंने कहा कि भारत ने फिलस्तीन, ईरान और व्यापक पश्चिम एशिया में अपने ऐतिहासिक मित्रों से दूरी बना ली है और वैश्विक जनमत से खुद को अलग-थलग कर लिया है. सोनिया गांधी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को फलस्तीनी लोगों के समर्थन में आवाज उठानी चाहिए और गाजा तथा पश्चिमी तट की स्थिति पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की निरंतर चुप्पी को न तो नैतिक और न ही तार्किक आधार पर उचित ठहराया जा सकता है.

यह भी पढ़ें - युद्ध का सदमा या कुछ और... गाजा में बच्चों ने बोलना क्यों बंद कर दिया है, आखिर क्या है उनकी चुप्पी की वजह?

 

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