विज्ञापन

प्रदर्शन के दौरान हिरासत या गिरफ्तारी हो तो आपके पास क्या होते हैं संवैधानिक अधिकार? Explainer

संविधान हर व्यक्ति को विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार देता है लेकिन यह 'असीमित' नहीं है. ऐसे में अगर किसी को हिरासत में लिया जाता है या गिरफ्तार किया जाता है तो उसके पास कई सारे अधिकार भी होते हैं.

प्रदर्शन के दौरान हिरासत या गिरफ्तारी हो तो आपके पास क्या होते हैं संवैधानिक अधिकार? Explainer
मजिस्ट्रेट की इजाजत के बगैर 24 घंटे से ज्यादा हिरासत में नहीं रख सकती पुलिस.
PTI
नई दिल्ली:

राजधानी दिल्ली में दो दिन दो बड़े प्रदर्शन हुए. पहला प्रदर्शन 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की अगुवाई में हुआ, जिसमें हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन का घिराव करने की कोशिश की. दूसरा प्रदर्शन 21 जुलाई को हुआ, जिसमें लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में कई विपक्षी सांसद प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठ गए.

20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के मामले में कई जगह टकराव हुआ. प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े. इस मामले में पुलिस ने 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था. वहीं, 21 जुलाई को जब विपक्षी सांसद धरने पर बैठे तो राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत धरना देने वाले सभी सांसदों को हिरासत में ले लिया गया और कुछ घंटों बाद रिहा किया गया.

इन दोनों प्रदर्शनों के बाद एक सवाल मन में आता है कि अगर प्रदर्शन के दौरान हिरासत या गिरफ्तार होने पर किसी व्यक्ति के पास कौन-कौन से संवैधानिक अधिकार होते हैं? और हिरासत या गिरफ्तारी करते समय पुलिस को क्या-क्या करना पड़ता है? 

विरोध प्रदर्शन करना संवैधानिक अधिकार

संविधान का अनुच्छेद 19 हर नागरिक को शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने और सरकार के किसी भी काम या फैसले के खिलाफ विरोध करने का अधिकार देता है.

1972 में एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया था कि सरकार सड़कों पर होने वाले विरोध प्रदर्शन पर रोक को नियंत्रित कर सकती है, ताकि आम जनता को कोई परेशानी न हो, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन करते हुए सभी सड़कों या सार्वजनिक जगहों को बंद कर दे.

Latest and Breaking News on NDTV

2020 में शाहीन बाग के विरोध प्रदर्शनों के मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को सरकार को बढ़ावा देना चाहिए. हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया था कि विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार कानूनन 'असीमित' नहीं है. सार्वजनिक जगहों पर अनिश्चित काल तक कब्जा नहीं किया जा सकता.

इससे पहले 2018 में एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन प्रदर्शनकारियों को संसद भवन, नॉर्थ और साउथ ब्लॉक, सुप्रीम कोर्ट और गणमान्य व्यक्तियों के आवास से थोड़ी दूरी बनाकर रखनी चाहिए.

यह भी पढ़ेंः सुबह स्पीकर से मिले राहुल, फिर छात्रों का जाना हाल, शाम में धरने पर बैठे... 7 पॉइंट में समझें क्या-क्या हुआ

क्या हिरासत या गिरफ्तार कर सकती है पुलिस?

विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है लेकिन अगर लगता है कि कोई व्यक्ति हिंसा भड़का सकता है या कोई साजिश रच रहा है तो उसे हिरासत में लिया जा सकता है या गिरफ्तार किया जा सकता है. हालांकि, इसके लिए पुलिस के पास वाजिब कारण होने चाहिए.

संविधान का अनुच्छेद 22 साफ करता है कि जिस व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, उसे गिरफ्तारी के कारण बताए बगैर हिरासत में नहीं रखा जा सकता या उसे अपने वकील से बात करने से नहीं रोका जा सकता.

अनुच्छेद 22 (2) कहता है कि जिस किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करके हिरासत में रखा गया है, उसे 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना जरूरी है. मजिस्ट्रेट की इजाजत के बगैर किसी भी व्यक्ति को 24 घंटे से ज्यादा हिरासत में नहीं रखा जा सकता.

Latest and Breaking News on NDTV

Photo Credit: IANS

हालांकि, 24 घंटे वाला नियम उन लोगों पर लागू नहीं होगा, जो दुश्मन देश के नागरिक हैं या फिर जिन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) जैसे 'प्रिवेंटिव डिटेंशन' जैसे कानून की तहत हिरासत में लिया गया है. ऐसे लोगों को 3 महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है.

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 170 के तहत, अगर कोई व्यक्ति कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की साजिश रच रहा हो तो उसे बिना वारंट के हिरासत में लिया जा सकता है, लेकिन 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना होगा.

यह भी पढ़ेंः जिस डील पर साइन भी नहीं हुए, उसे लेकर विरोध क्यों कर रहे हैं किसान?

गिरफ्तारी या हिरासत की क्या है गाइडलाइंस?

1996 में सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी और हिरासत को लेकर गाइडलाइंस जारी की थीं. ये गाइडलाइंस डीके बासु बनाम पश्चिम बंगाल सरकार के मामले पर फैसला देते हुए जारी की गई थीं. इसे सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला माना जाता है, जो गिरफ्तारी, हिरासत या पूछताछ के दौरान लोगों को कुछ अधिकार देता है.

  • गिरफ्तारी करने और गिरफ्तार व्यक्ति से पूछताछ करने वाले पुलिसकर्मियों की पहचान साफ दिखनी चाहिए. उनका नेमटैग लगा होना चाहिए, जिसमें उनकी पोस्ट भी दिखे. पूछताछ करने वाले पुलिसकर्मियों के नाम रजिस्टर में दर्ज किए जाने चाहिए.
  • गिरफ्तारी करने वाले पुलिस अधिकारी को गिरफ्तारी के समय अरेस्ट मेमो तैयार करना होगा और ऐसे मेमो पर कम से कम एक गवाह के साइन लेने होंगे. गवाह या तो व्यक्ति के परिवार का सदस्य होगा या उस क्षेत्र में रहने वाला कोई सम्मानित व्यक्ति. गिरफ्तार व्यक्ति के भी साइन लिए जाएंगे. इस मेमो में गिरफ्तारी का समय और तारीख लिखनी होगी.
  • जिस व्यक्ति को गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया है और उसे पुलिस स्टेशन या पूछताछ केंद्र या लॉक-अप में हिरासत में रखा जा रहा है, तो उसके पास अपने किसी परिवार, दोस्त या रिश्तेदार को गिरफ्तारी की जानकारी देना हक होगा. 
  • गिरफ्तारी का समय, स्थान और गिरफ्तार व्यक्ति की हिरासत की जगह की सूचना, पुलिस को उस जिले या कस्बे में दी जानी चाहिए जहां गिरफ्तार व्यक्ति का दोस्त या रिश्तेदार रहता है. 
Latest and Breaking News on NDTV

Photo Credit: IANS

  • गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को उसके इस अधिकार के बारे में अवगत कराया जाना चाहिए कि जैसे ही उसे गिरफ्तार या हिरासत में लिया जाता है, उसकी गिरफ्तारी या हिरासत के बारे में किसी को सूचित किया जाए.
  • हिरासत के स्थान पर डायरी में व्यक्ति की गिरफ्तारी के संबंध में एक एंट्री की जानी चाहिए जिसमें उस व्यक्ति के किसी रिश्तेदार का नाम भी दर्ज किया जाएगा जिसे गिरफ्तारी की सूचना दी गई है और उन पुलिस अधिकारियों के नाम और विवरण भी होंगे जिनकी हिरासत में गिरफ्तार व्यक्ति है.
  • गिरफ्तार व्यक्ति का गिरफ्तारी के समय मेडिकल टेस्ट किया जाना चाहिए और उसके शरीर पर मौजूद किसी भी बड़ी और छोटी चोट, यदि कोई हो, को उस समय दर्ज किया जाना चाहिए।. 'इंस्पेक्शन मेमो' पर गिरफ्तार व्यक्ति और गिरफ्तारी करने वाले पुलिस अधिकारी दोनों के साइन होने चाहिए और उसकी एक कॉपी गिरफ्तार व्यक्ति को दी जानी चाहिए.
  • हिरासत में रहने के दौरान हर 48 घंटे में गिरफ्तार व्यक्ति की मेडिकल जांच की जानी चाहिए.
  • अरेस्ट मेमो सहित सभी दस्तावेजों की कॉपियां उसके रिकॉर्ड के लिए मजिस्ट्रेट को भेजी जानी चाहिए.
  • गिरफ्तार व्यक्ति को पूछताछ के दौरान अपने वकील से मिलने की अनुमति दी जा सकती है, हालांकि पूरी पूछताछ के दौरान नहीं.

अपने खिलाफ बयान देने के लिए मजबूर नहीं कर सकते

किसी भी आरोपी को पुलिस अपने ही खिलाफ गवाही देने के लिए मजबूर नहीं कर सकती. संविधान का अनुच्छेद 20(3) साफ करता है कि आरोपी को अपने ही खिलाफ कोई बयान देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता.

जिस किसी व्यक्ति को हिरासत में लिया जाता है या गिरफ्तार किया जाता है, वह अपना बयान अपने वकील की मौजूदगी में दर्ज करवा सकता है.

यह भी पढ़ेंः सोनम वांगचुक का अस्पताल से अनशन जारी, क्या किसी की भूख हड़ताल जबरन तुड़वा सकते हैं? क्या कहता है कानून

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Protest, Delhi Protest, Arrest Rules, Constitutional Rights, CJP Protest
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com