देशभर में जब भी सड़कों पर कोई नया पुल बनता है या कोई अन्य निर्माण कार्य होता है, तो महीनों तक रास्ते को बंद कर दिया जाता है. आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. यह आम बात बन गई है. लेकिन दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने इंजीनियरिंग का एक ऐसा अनोखा कारनामा कर दिखाया है, जिसने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया. दिल्ली मेट्रो ने एक एक्सप्रेसवे के ऊपर विशाल स्टील का पुल (स्पैन) तैयार किया. सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि इस बेहद जटिल और भारी-भरकम काम के दौरान नीचे एक्सप्रेसवे पर गाड़ियों की रफ्तार एक पल के लिए भी नहीं थमी और न ही कोई जाम लगा.
ब्लू लाइन पर बनाया गया यह पुल
दिल्ली मेट्रो ने ब्लू लाइन पर नोएडा इलेक्ट्रॉनिक सिटी मेट्रो स्टेशन के ठीक बाद नेशनल हाइवे-9 और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के ऊपर 58 मीटर लंबे विशाल स्पैन को सफलतापूर्वक लगाकर इंजीनियरिंग का एक बड़ा मील का पत्थर हासिल किया है.
नोएडा इलेक्ट्रॉनिक सिटी के बाद मेट्रो ट्रेनों के लिए एक 'रिवर्सल फैसिलिटी' यानी ट्रेन की दिशा बदलने की जगह बनाई जा रही है ताकि ट्रेनें अपनी यात्रा पूरी करने के बाद आसानी से दिशा बदल सकें. इस सेक्शन में 58 मीटर और 73 मीटर के दो खास स्टील स्पैन लगाए जाने हैं, जो NH-9 और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे दोनों को पार करेंगे.
बिल्कुल नहीं रोका गया ट्रैफिक
जहां 58 मीटर का स्पैन अब पियर 384 और 385 के बीच लगा दिया गया है, वहीं दूसरा स्पैन इस साल के अगले कुछ महीनों में लगाया जाएगा. इस रिवर्सल फैसिलिटी का सिविल काम साल के अंत तक पूरा हो जाएगा, जिसके बाद ट्रैक बिछाने और बिजली लगाने जैसे अन्य काम किए जाएंगे. यह दिल्ली मेट्रो के इंजीनियरों के लिए इंजीनियरिंग का एक बड़ा कारनामा था, क्योंकि नीचे व्यस्त हाइवे और एक्सप्रेसवे पर ट्रैफिक एक दिन के लिए भी नहीं रुका. इसके अलावा, स्पैन को पियर 384 के पास एक चालू ओवरहेड हाई-टेंशन लाइन के नीचे से भी गुजारना था.

कैसे किया गया पुल तैयार?
हाइवे और एक्सप्रेसवे पर खास जगहों पर ट्रसल यानी ढांचे खड़े किए गए, जिन पर बीम रखे गए. फिर 'विंच' नाम की मशीनरी का इस्तेमाल करके खास प्री-कास्ट स्टील स्पैन को खींचा गया. स्पैन को इंदिरापुरम की तरफ से बीम पर रखा गया और धीरे-धीरे नोएडा सिटी साइट की ओर खींचा गया, जिससे नीचे का हाईवे और एक्सप्रेसवे सुरक्षित रूप से पार हो गया. यह स्पैन हाइवे और एक्सप्रेसवे से लगभग 14 मीटर की ऊंचाई पर लगाया गया है.
दो दिन और रात नॉनस्टाप हुआ काम
दिल्ली मेट्रो के प्रिंसिपल एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनुज दयाल ने बताया कि इस ऑपरेशन के लिए महीनों की प्लानिंग, बारीकी से डिजाइनिंग और बहुत सटीक तरीके से काम करने की जरूरत थी. पूरे ऑपरेशन पर DMRC के इंजीनियरों ने चौबीसों घंटे बारीकी से नजर रखी. खींचने का पूरा काम 20 जुलाई दोपहर से 22 जुलाई सुबह तक लगातार दो दिनों और रातों तक किया गया, जबकि इस दौरान पूरे दिन ट्रैफिक चलता रहा.
DMRC ने पहले भी दिल्ली NCR में कई जगहों पर व्यस्त हाईवे के ऊपर और इतनी ऊंचाई पर निर्माण कार्य सफलतापूर्वक किया है. मूलचंद चौराहे पर मेट्रो ब्रिज का निर्माण और धौला कुआं चौराहे पर एयरपोर्ट लाइन और पिंक लाइन के वायाडक्ट इसके कुछ उदाहरण हैं. हालांकि यह पहला मौका है जब मेट्रो वायाडक्ट किसी चालू एक्सप्रेसवे के ऊपर से गुजरा है.
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