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'अगर सरकार भरोसा दे तो तोड़ दूंगा अनशन', सोनम वांगचुक ने केंद्र को लिखी चिट्ठी

तीन सप्ताह की भूख हड़ताल के बाद शनिवार को पुलिस ने वांगचुक को जंतर-मंतर से हटा दिया था. लेकिन उन्होंने अपनी भूख हड़ताल खत्म करने से इनकार कर दिया था. वह 25वें दिन भी भूख हड़ताल पर हैं.

'अगर सरकार भरोसा दे तो तोड़ दूंगा अनशन', सोनम वांगचुक ने केंद्र को लिखी चिट्ठी
सोनम वांगचुक 25 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं.
नई दिल्ली:

पर्यावरण कार्यकर्ता और 25 से ज्यादा दिनों से भूख हड़ताल कर रहे सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार को अनशन तोड़ने को लेकर चिट्ठी लिखी है. उन्होंने कहा कि अगर सरकार ये भरोसा देती है कि वे छात्रों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेंगे तो मैं अनशन तोड़ दूंगा.  उन्होंने कहा कि अगर ऐसा आश्वासन नहीं मिलता है तो मैं भूख हड़ताल जारी रखूंगा.

उन्होंने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को लिखे पत्र में कहा, "मैं सरकार से विनम्रतापूर्वक निवेदन करता हूं कि वह स्पष्ट आश्वासन दे कि आंदोलन में भाग लेने वाले किसी भी युवा प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी. उनका एकमात्र 'अपराध' निष्पक्ष और जवाबदेह शिक्षा प्रणाली के लिए आवाज उठाना है."

यदि ऐसा आश्वासन दिया जाता है, तो मैं इस विश्वास के साथ अपना अनशन समाप्त करूंगा कि सरकार ने न केवल मेरी अपील, बल्कि लाखों युवा भारतीयों की आकांक्षाओं को भी सुना है.

सोनम वांगचुक

'पूरी दुनिया ने देखा छात्रों का सब्र और जुनून'

सोनम वांगचुक ने चिट्ठी में लिखा"20 जुलाई 2026 को हुई चलो संसद यात्रा पुलिस की ज्यादतियों और असंगत बल प्रयोग के बावजूद पूरी तरह शांतिपूर्ण रही. पूरे देश और दुनिया ने उनके सब्र और लोकतांत्रिक विरोध के प्रति जुनून को देखा. मुझे उम्मीद है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में यह भरोसा किसी भी तरह के कानूनी मामलों, उत्पीड़न या इसमें भाग लेने वालों के विरुद्ध बदले की कार्रवाई से कमजोर नहीं होगा."

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