- ठाणे जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के चुनाव में BJP-शिवसेना ने बहुमत हासिल कर अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद जीते
- अरुण बालू पाटील को अध्यक्ष और भाग्यश्री निलेश भोईर को उपाध्यक्ष के रूप में निर्वाचित किया गया है
- बहुजन विकास आघाड़ी का सालों से चला आ रहा वर्चस्व इस चुनाव में समाप्त हो गया है
महाराष्ट्र के ठाणे जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक (TDCC Bank) की सत्ता पर आखिरकार भाजपा-शिवसेना महायुति ने कब्जा जमा लिया. संचालक मंडल के चुनाव में बहुमत हासिल करने के बाद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव में भी महायुति ने जीत दर्ज की. भाजपा-शिवसेना समर्थित अरुण बालू पाटील बैंक के नए अध्यक्ष चुने गए, जबकि भाग्यश्री निलेश भोईर उपाध्यक्ष निर्वाचित हुईं. इस जीत के साथ ही बैंक पर सालों से कायम बहुजन विकास आघाड़ी (BVA) का वर्चस्व समाप्त हो गया.
ये चुनाव केवल सहकार क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ठाणे की बदलती राजनीतिक तस्वीर का भी बड़ा संकेत माना जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की रणनीति ने एक बार फिर निर्णायक भूमिका निभाई.
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संचालक चुनाव से ही तय हो गई थी तस्वीर
बैंक के संचालक मंडल के चुनाव में सहकार पैनल और परिवर्तन पैनल के बीच सीधा मुकाबला था. दिलचस्प बात यह रही कि महायुति के दोनों प्रमुख दल भाजपा और शिवसेना अलग-अलग पैनलों में होने के बावजूद उनका मुख्य उद्देश्य वर्षों से बैंक पर प्रभाव रखने वाली बहुजन विकास आघाड़ी को सत्ता से हटाना था.
चुनाव परिणाम में दोनों पैनलों से जीतने वाले भाजपा और शिवसेना समर्थित उम्मीदवारों की कुल संख्या 14 पहुंच गई, जबकि बहुजन विकास आघाड़ी को 7 सीटों पर संतोष करना पड़ा. इसके बाद अध्यक्ष पद पर महायुति की जीत लगभग तय मानी जा रही थी.

अध्यक्ष चुनाव में भाजपा नेताओं ने दिखाई एकजुटता
अध्यक्ष पद के चुनाव में सबसे अहम घटनाक्रम भाजपा के वरिष्ठ नेताओं किशन कथोरे और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल पाटील का एक मंच पर आना रहा. संचालक चुनाव में दोनों अलग-अलग पैनलों से मैदान में थे, लेकिन अध्यक्ष पद के चुनाव में दोनों ने महायुति उम्मीदवार के समर्थन में मतदान किया. इसे रविंद्र चव्हाण की संगठनात्मक क्षमता और राजनीतिक संतुलन का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है.
हालांकि, चुनाव के दौरान शिवसेना समर्थित खेमे का एक वोट टूटने की चर्चा भी रही, जिसे राजनीतिक हलकों में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के लिए हल्का झटका माना जा रहा है. इसके बावजूद महायुति ने स्पष्ट बहुमत से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पद जीत लिए.
हितेंद्र ठाकुर के गढ़ में बड़ी सेंध
ठाणे जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक लंबे समय से हितेंद्र ठाकुर के नेतृत्व वाली बहुजन विकास आघाड़ी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है. इस बार भाजपा और शिवसेना ने रणनीतिक तरीके से उम्मीदवार उतारकर इस वर्चस्व को चुनौती दी. चुनाव परिणाम ने स्पष्ट कर दिया कि सहकार क्षेत्र में भी महायुति ने अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत कर ली है.
सहकार राजनीति में दूरगामी असर
सहकार संस्थाओं को महाराष्ट्र की राजनीति की नर्सरी मानी जाती है. जिला सहकारी बैंक पर नियंत्रण का सीधा असर स्थानीय राजनीति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और भविष्य के चुनावी समीकरणों पर पड़ता है. ऐसे में ठाणे जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक पर महायुति का कब्जा आगामी स्थानीय निकाय और सहकार क्षेत्र की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह जीत केवल बैंक के अध्यक्ष पद तक सीमित नहीं है, बल्कि ठाणे जिले में भाजपा-शिवसेना महायुति की बढ़ती राजनीतिक ताकत का भी संकेत है. वहीं, बहुजन विकास आघाड़ी के लिए यह परिणाम संगठनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ा झटका माना जा रहा है.
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