- संसद के मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध के कारण विधायी कार्य कम हुए और हंगामा अधिक हुआ
- विपक्ष ने पेपर लीक, छात्रों पर पेलेट गन के इस्तेमाल और राम मंदिर चंदा चोरी जैसे मुद्दे उठाकर बहस की मांग की
- संसदीय कार्यमंत्री और राहुल गांधी के बीच बातचीत हुई लेकिन विपक्ष बहस के बिना सहयोग करने को तैयार नहीं है
संसद के मानसून सत्र के तीसरे हफ्ते को खत्म होने में केवल एक दिन बचा है. वैसे भी शुक्रवार को सदन में प्राइवेट मेंबर बिल होता है, जिसकी वजह से ज्यादा विधायी कामकाज नहीं होता है. मगर संसद का ये मानसून सत्र याद किया जाएगा सरकार और विपक्ष के गतिरोध के लिए. इस सत्र में हंगामा अधिक हुआ और कामकाज कम. वैसे इस सत्र के पहले ही सरकार ने अपने विधायी कामकाज का जो एजेंडा दिया था, उसमें कोई विशेष बिल नहीं थे. मगर जो भी बिल उन्होंने सूची में रखे थे, वो सब करीब-करीब पारित हो चुके हैं.
अभी सत्ता और विपक्ष में किस बात पर तकरार
संसद का यह मानसून सत्र इस वजह से धुल गया कि सबसे पहले विपक्ष ने पेपर लीक को मुद्दा बनाया, क्योंकि उसी को लेकर जंतर मंतर पर प्रदर्शन हुआ. फिर शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हुआ और सरकार को आनन-फानन में एक नया बिल लाना पड़ा, जो आखिरकार पारित हुआ. मगर विपक्ष ने उसके बाद जंतर मंतर पर छात्रों के खिलाफ पेलेट गन और बिहार में एके 47 के इस्तेमाल के साथ साथ अयोध्या के राम मंदिर में चंदा चोरी का मुद्दा उठा लिया. गृह मंत्री अमित शाह के संसद में बयान और चंदा चोरी पर बहस की मांग पर अड़ गई.
रिजिजू-राहुल गांधी की क्या बात हुई
लिहाजा सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध बना रहा और संसद में किसी मुद्दे पर बहस नहीं हो सकी. सरकार की तरफ से पहले बीएसी यानी कार्य मंत्रणा समिति की बैठक बुलाई गई पर उसमें भी गतिरोध नहीं टूटा. उसके बाद संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की. मगर उस बैठक में राहुल गांधी ने साफ कह दिया कि पेलेट गन के इस्तेमाल पर केन्द्रीय गृह मंत्री के बयान और चंदा चोरी पर जब तक सदन में बहस नहीं होगी तब तक वो सहयोग नहीं करेंगे. मतलब तब तक वो सदन नहीं चलने देंगे. उसके बाद संसदीय कार्य मंत्री ने आज राहुल गांधी से फिर टेलीफोन पर बात की. राहुल गांधी ने उन्हें कहा कि वो विपक्ष के बाकी दलों से बात करने के बाद ही कुछ जवाब दे पाएंगे. इस फोन कॉल में राहुल गांधी ने फिर से विपक्ष के दोनों मांगों को दुहरा दिया है.
सरकार क्यों कर रही बार-बार बात
सरकार मानसून सत्र के अंतिम हफ्ते में कोई ना कोई समाधान निकालना चाहती है, जिससे की एफसीआरए यानी विदेशी अंशदान संशोधन विधेयक को पारित किया जा सके. वैसे सरकार इस बिल को बाकी बिलों की तरह शोरगुल में भी पास करा सकती है, मगर यह बिल गृह मंत्री द्वारा पेश किया जाना है और वही इस पर जवाब देंगे. इसलिए सरकार चाहती है कि सदन सुचारू ढंग से चले, मगर अभी भी गतिरोध बना हुआ है. इस बिल का दक्षिण और उत्तर पूर्व के राज्य विरोध कर रहे हैं और इसी सिलसिले में केंद्रीय गृह मंत्री ने मिजोरम के मुख्यमंत्री और कुछ अन्य ईसाई संगठनों के प्रतिनिधि से मुलाकात भी की है. मिजोरम के मुख्यमंत्री ने गृह मंत्री से मुलाकात के बाद कहा कि 12 अगस्त को यह बिल पेश किया जाएगा. संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त हो रहा है. इसका मतलब क्या इन दो दिनों में ही इस बिल को पास किया जाएगा या इसे संसदीय समिति को भेजा जाएगा, यह अभी पक्का नहीं है.
क्या गृह मंत्री संसद में बयान देंगे
इसी बीच एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात ये हुई है कि राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति ने संसदीय कार्यमंत्री को बुलाकर यह कहा कि राज्यसभा में भी गृह मंत्री के बयान और चंदा चोरी पर बहस की मांग विपक्ष लगातार कर रहा है. ऐसे में विपक्ष की इस भावना को गृह मंत्री तक पहुंचाया जाना चाहिए. यही नहीं, इस सबके बीच सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण बिल को लेकर भी विपक्षी दलों से संपर्क में है. वैसे सरकार की तरफ से ये कहा जा रहा है कि उनके पास दो तिहाई की संख्या है. तब सवाल ये उठता है कि यदि सरकार के पास दो तिहाई संख्या है तो वह परिसीमन और महिला आरक्षण बिल क्यों नहीं ला रही है? वहीं विपक्ष अपने दोनों मुद्दों पर अड़ा हुआ है. अब देखना होगा कि 10 अगस्त वाले हफ्ते में कोई कामकाज हो पाता है या नहीं.
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