- शहबाज शरीफ सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के निमंत्रण पर तीन दिन की यात्रा पर सऊदी अरब गए हैं
- प्रधानमंत्री के साथ चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज और आर्मी चीफ असीम मुनीर तथा विदेश मंत्री इशाक डार भी मौजूद रहेंगे
- पाकिस्तान ने सऊदी अरब की सुरक्षा और लाल सागर से समुद्री व्यापार के निरंतर प्रवाह के प्रति प्रतिबद्धता जताई है
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ तीन दिन की यात्रा पर सऊदी अरब के लिए रवाना हो गए हैं. पाकिस्तान सरकार ने 'X' पर एक पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के निमंत्रण पर इस यात्रा पर गए हैं. विदेश कार्यालय के अनुसार, सऊदी अरब में उनके साथ चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज और आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर भी होंगे.
साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिग में, विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने बताया कि उनके साथ उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार भी होंगे, जो जॉर्डन की यात्रा पूरी करने के बाद अभी सऊदी अरब में ही हैं. उन्होंने कहा, "इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मिलेंगे. बातचीत का मुख्य फोकस पाकिस्तान और सऊदी अरब के आपसी रिश्तों को मजबूत करने और आपसी हित के क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर विचारों के आदान-प्रदान पर होगा."
अंद्राबी ने इस बात पर जोर दिया कि यह दौरा सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान की लंबे समय से चली आ रही साझेदारी को दर्शाता है, जो उनके अनुसार, दशकों के आपसी भरोसे, सहयोग और भाईचारे पर टिकी है. अंद्राबी ने कहा कि हालांकि यह दौरा खाड़ी क्षेत्र में बढ़े तनाव के बीच हो रहा है, लेकिन इसका महत्व मौजूदा संकट और अल्पकालिक विचारों से कहीं अधिक होगा. उन्होंने कहा कि इस दौरे से दोनों देशों के संबंध और मजबूत होंगे, रणनीतिक सहयोग गहरा होगा, आपसी हित के क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर तालमेल बेहतर होगा और बहुपक्षीय सहयोग को भी मजबूती मिलेगी.
मुलाकात का क्या है कारण
इसके कुछ ही समय बाद, इस दौरे के बारे में एक आधिकारिक बयान भी जारी किया गया. शरीफ ने पिछली बार अप्रैल में सऊदी अरब का दौरा किया था और वहां के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की थी. जैसे-जैसे मिडिल ईस्ट का टकराव नए मोर्चों पर फैला है, सऊदी अरब ने रेड सी इलाके में शिपिंग और एनर्जी सप्लाई रूट की सुरक्षा के लिए एक मल्टीनेशनल मैरीटाइम डिफेंस गठबंधन बनाने की योजना का ऐलान किया है. पाकिस्तान समेत चौदह देशों ने इस गठबंधन का समर्थन किया है. माना जा रहा है कि पाकिस्तान अब मध्य पूर्व की राजनीति में बड़ी भूमिका निभाने के लिए इस गठबंधन को मजबूत कर सकता है. इसके बदले में वो सऊदी से आर्थिक मदद की उम्मीद करेगा.
हूतियों के टारगेट पर सऊदी
जुलाई में, पाकिस्तान ने इराक में सऊदी अरब के हवाई हमलों को आत्मरक्षा के अधिकार के तहत की गई कार्रवाई बताते हुए उसका समर्थन भी किया था. ये बयान तब आया जब सऊदी अरब और अमेरिका ने इराक की पॉपुलर मोबिलाइजेशन यूनिट्स' के ठिकानों पर मिलकर हमले किए; उन्होंने इस ग्रुप के कुछ हिस्सों पर सऊदी तेल सुविधाओं पर हमले करने का आरोप लगाया था. यह बयान पाकिस्तान की उस पिछली चेतावनी के बाद आया है, जब यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब से जुड़े जहाजों को निशाना बनाते हुए समुद्री नाकेबंदी का ऐलान किया था. तब इस्लामाबाद ने पाकिस्तानी समुद्री हितों पर हमलों को रेड लाइन करार दिया था और चेतावनी दी थी कि पाकिस्तानी झंडे वाले जहाजों या कमर्शियल शिपिंग के खिलाफ किसी भी तरह की आक्रामक कार्रवाई को पाकिस्तान पर हमला माना जाएगा.
साथ ही, देश ने सऊदी अरब की सुरक्षा और लाल सागर व बाब अल-मंदेब से होकर होने वाले वैध समुद्री व्यापार के निर्बाध प्रवाह के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई. पिछले साल, इस्लामाबाद और रियाद के बीच एक रणनीतिक आपसी रक्षा समझौता हुआ था, जो इस साल की शुरुआत में लागू हुआ. इसी दौरान पाकिस्तान ने ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता के लिए राजनयिक प्रयास भी शुरू किए थे.
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