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क्या है डार्विन वाली थ्योरी? आवारा कुत्तों पर कंट्रोल के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने क्यों इसका उदाहरण दिया

Supreme Court On Stray Dogs: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम  सार्वजनिक जगहों से कुत्तों को हटाने के अपने पहले के निर्देशों पर कायम है. अगर ऐसी स्थितियों को बिना किसी रोक-टोक के जारी रहने दिया गया, तो इसका लाज़मी नतीजा यह होगा कि हम डार्विन के विकासवाद के सिद्धांत की ओर लौट जाएंगे.

क्या है डार्विन वाली थ्योरी? आवारा कुत्तों पर कंट्रोल के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने क्यों इसका उदाहरण दिया
आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट ने किया डार्विन वाली थ्योरी का जिक्र.
  • सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने का 2025 का आदेश जारी रखने का निर्णय लिया है
  • अदालत ने आवारा कुत्तों द्वारा बच्चों और महिलाओं पर हमलों को गंभीर सुरक्षा खतरा मानते हुए याचिकाएं खारिज कीं
  • SC ने डार्विन के विकासवाद के सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट सिद्धांत का हवाला देते हुए स्थिति की गंभीरता जताई
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नई दिल्ली:

आवारा कुत्तों पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आखिर डार्विन के 'सर्वाइवल ऑफ़ द फ़िटेस्ट' सिद्धांत का हवाला क्यों दिया? आखिर ये सिद्धांत है क्या, जिसका जिक्र अदालत को कुत्तों पर सुनाए गए फैसले में करना पड़ा. अदालत ने कहा कि इस बात को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता कि ABC नियम आबादी को कंट्रोल करने में नाकाम रहे हैं. 

डार्विन के विकासवाद के सिद्धांत का हवाला

अदालत ने कहा कि हम  सार्वजनिक जगहों से कुत्तों को हटाने के अपने पहले के निर्देशों पर कायम है. अगर ऐसी स्थितियों को बिना किसी रोक-टोक के जारी रहने दिया गया, तो इसका लाज़मी नतीजा यह होगा कि हम डार्विन के विकासवाद के सिद्धांत की ओर लौट जाएंगे. मतलब यह कि सार्वजनिक जगहों पर नागरिक जीवन पर असल में 'सर्वाइवल ऑफ़ द फ़िटेस्ट' (जो सबसे ज़्यादा काबिल है, वही बचेगा) का सिद्धांत ही हावी हो जाएगा. ऐसी स्थिति संवैधानिक लोकतंत्र के पूरी तरह से विपरीत होगी, जो कि 'कानून के राज' पर आधारित होता है. 

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क्या है चार्ल्स डार्विन के विकासवाद वाली थ्योरी?

चार्ल्स डार्विन के विकासवाद का सिद्धांत यह बताता है कि पृथ्वी पर जीवों की सभी प्रजातियां प्राकृतिक चयन की प्रक्रिया द्वारा धीरे-धीरे विकसित हुई हैं.प्रकृति सिर्फ उन्हीं जीवों को चुनती है जो जीवित रहने में सबसे ज्यादा सक्षम होते हैं. इसके मुताबिक, बेहतर अनुकूलन वाले जीव ही जीवित रहते हैं. उनको संसाधनों की सीमित मौजूदगी की वजह से आपस में संघर्ष करना पड़ता है.

आवारा कुत्तों पर 2025 वाला आदेश जारी

बता दें कि अदालत ने कहा है कि सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने वाला 2025 का उनका आदेश जारी रहेगा. जस्टिस विक्रमनाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने एनिमल वेलफेयर बोर्ड की सभी याचिकाएं खारिज कर दीं. अदालत ने कहा कि यह लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा का मामला है. आवारा कुत्तों ने हमलों में  बच्चों, महिलाओं को बुरी तरह घायल किया गया है.

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आवारा कुत्तों के काटने पर आंख नहीं मूंद सकते

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि  राज्यों को एनिमल बर्थ कंट्रोल का पालन करना चाहिए. रेबीज की वजह से बहुत से लोगों की मौत हुई है.. लोगों के जीवन की सुरक्षा करना राज्य की जिम्मेदारी है. राज्यों ने अदालत के पिछले आदेशों का ठीक से पालन नहीं किया. अगर अब आदेश का पालन नहीं हुआ तो अवमानना की कार्रवाई की जाएगी. अदालत ने कहा कि आवारा कुत्तों के काटने पर हम आंख नहीं मूंद सकते.

डॉग लवर्स को बड़ा झटका

अदालत के इस आदेश से डॉग लवर्स को बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने उनकी याचिकाएं खारिज करते हुए पशु कल्याण बोर्डों द्वारा जारी नए मानक संचालन (एसओपी) को कायम रखा. अदालत ने कहा कि देश भर में कुत्ते के काटने की घटनाओं को अनदेखा नहीं किया जा सकता. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने डार्विन के 'सर्वाइवल ऑफ़ द फ़िटेस्ट' सिद्धांत का हवाला दिया.

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