बंगाल की सियासत में आए बदलाव के बाद पहली बार 22 जून 2026 को सूबे का बजट आ रहा है. सुवेंदु सरकार बंगाल की ग्रोथ को बुलेट स्पीड देने के लिए कल विधानसभा में साल भर का खाका पेश करेंगे. अब अर्थशास्त्रियों, निवेशकों के साथ आम नागरिकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अब बंगाल की किस्मत बदलने वाली है?
ममता सरकार ने कुछ ऐसे फैसले लिए थे, जिनके जरिए बंगाल वो कामयाबी हासिल नहीं कर सका है, जिसके लिए इसे जाना जाता था..नतीजन वित्त वर्ष 2025 के अनुसार पश्चिम बंगाल की प्रति व्यक्ति आय 1,81,786 रुपये है. ये भारत की प्रति व्यक्ति आय 2,34,859 रुपये से बहुत कम है. वहीं नीति आयोग के अनुसार वित्त वर्ष 2023-24 में बंगाल का देश की जीडीपी में हिस्सा सिर्फ 5.60% रहा था.
आज के समय में युवा, किसान और व्यापारी चाहता है कि बंगाल देश के टॉप इकोनॉमिक हब में शामिल हो. इसके लिए मौजूदा बंगाल की सरकार को वो 6 बड़े रिफॉर्म्स करने होंगे जो सूबे की किस्मत बदल सकते हैं. चलिए इस खबर में समझने की कोशिश करते हैं कि किन बड़े बदलाव के जरिए बंगाल दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात जैसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले राज्य की लिस्ट में शामिल हो सकता है.
1. ताजपुर पोर्ट जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स को देनी होगी रफ्तार
बंगाल के विकास में राजनीतिक खींचतान रोड़ा बनी है. साल 2022 की बात है जब टीएमसी सरकार ने अदाणी ग्रुप को ताजपुर डीप सी पोर्ट के लिए लेटर ऑफ इंटेंट तो दिया था पर बाद में राजनीतिक समस्या के चलते इसे वापस ले लिया. इस वजह से 25 हजार करोड़ का ये बड़ा प्रोजेक्ट रुक गया. ना सिर्फ इस प्रोजेक्ट पर ब्रेक लगा, बल्कि इस स्थिति को देखकर कई बड़े निवेशकों ने बंगाल में आने से मुंह फेर लिया. अब ईज ऑफ डूइंग बिजनेस जमीनी स्तर पर सरकार को दिखानी होगी, जिससे बड़े इन्वेस्टर्स निवेश करने से हिचकिचाएंगे नहीं.
2. आईटी और टेक हब पर बढ़ाना होगा फोकस
ममता सरकार ने सिर्फ साल्ट लेक (बिधाननगर) या न्यू टाउन तक आईटी सेक्टर को सीमित रखा. पर अब बंगाल के टियर-2 और टियर-3 शहरों जैसे सिलीगुड़ी, आसनसोल को टेक हब बनाने की जरूरत है. यहां डेटा सेंटर, एआई रिसर्च लैब्स और बीपीओ इंडस्ट्री के लिए टैक्स में छूट देकर इन्हें निवेश के लिए बुलाया जा सकता है. इससे राज्य की तो ग्रोथ होगी ही साथ में युवाओं को नौकरी के लिए बेंगलुरु या फिर हैदराबाद नहीं जाना पड़ेगा.
3. इंफ्रा पर करनी होगी मेहनत
तीसरा रिफॉर्म जुड़ा है राज्य के इंफ्रा से. समझिए बंगाल में विकास की संभावनाएं बहुत है. टीएमसी सरकार का फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा नहीं था. एलएंडटी, एनबीसीसी के साथ कई बड़ी कंपनियां बंगाल में काम करने के लिए तैयार हैं. पॉलिसी को बदलने के साथ इंफ्रा पर फोकस बढ़ाने से बंगाल में सड़को, रेलवे और इंडस्ट्रियल पार्क का जाल बिछाया जा सकेगा.
4. एग्रो प्रोसेसिंग रिवॉल्यूशन से बढ़ेगी किसानों की आय
पुरानी सरकार ने कोल्ड स्टोरेज चेन के साथ फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स का विस्तार जरूरत के हिसाब से नहीं किया. नतीजन हर साल टन के हिसाब से फसल बर्बाद हो जाती है. ऐसे में सुधार के जरिए सूबे के हर जिले में मेगा फूड पार्क बनने चाहिए. इससे आलू किसान सीधे चिप्स या जूस बनाने वाली कंपनी से जुड़ पाएगा. किसानों की आय बढ़ेगी और गांव की अर्थव्यवस्था मजबूत बन सकेगी. कई रिपोर्ट्स ऐसी हैं जिसमें कोल्ड स्टोरेज के मालिकों ने कहा है कि राज्य सरकार का तय किया गया किराया बहुत कम है. रख-रखाव का खर्चा बढ़ने से मॉर्डन कोल्ड स्टोरेज बनाने में समस्या आ रही हैं.
5. इंडस्ट्री को देनी होगी मंजूरी
बात साल 2006 की है. जब देश की पहली एक लाख रुपये की कार यानी टाटा नैनो को बनाने के लिए 1,000 एकड़ कृषि भूमि का अधिग्रहण किया गया था. TMC नेता ममता बनर्जी ने इस प्रोजेक्ट को रोकने के लिए करीब 26 दिनों का आमरण अनशन किया. नतीजा ये हुआ कि अक्तूबर 2008 में रतन टाटा ने बंगाल से नैनो प्रोजेक्ट हटाने का ऐलान कर दिया. इसलिए अब बंगाल में इंडस्ट्री को बुलाने के लिए मौजूदा सरकार को काम करने की जरूरत है.
6. छोटे व्यापारियों को मिलेगा खुलकर लोन
अभी तक देखा जाता रहा है कि बंगाल में केंद्र और राज्य सरकार के बीच चल रहे झगड़ों की वजह से पीएसयू बैंक बंगाल में लोन देने से कतराते थे. बैंकों को इसी बात का डर रहता था कि कहीं उनका पैसा फंस ना जाए. इस समस्या के चलते छोटे और मध्यम उद्योगों यानी एमएसएमई सेक्टर को क्रेडिट सपोर्ट नहीं मिल पाता था. रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम बंगाल में लगभग 45 लाख रजिस्टर्ड MSME यूनिट्स हैं, जो देश के कुल रजिस्टर्ड MSME का 7% हैं. राज्य के 14 जिलों का क्रेडिट-डिपॉजिट रेश्यो राज्य के औसत 40% से कम है. ऐसे में एमएसएमई सेक्टर के लिए लोन की सुविधा को आसान बनाना होगा.
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