विज्ञापन

66 जाति और 7% कोटा... पश्चिम बंगाल में OBC आरक्षण को लेकर शुभेंदु सरकार ने क्या कर दिया?

बंगाल में ओबीसी आरक्षण को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है. शुभेंदु सरकार ने एक नया नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसके तहत अब 66 जातियों को ही ओबीसी आरक्षण मिलेगा.

66 जाति और 7% कोटा... पश्चिम बंगाल में OBC आरक्षण को लेकर शुभेंदु सरकार ने क्या कर दिया?
बंगाल में ओबीसी की लिस्ट जारी की गई है.
  • बंगाल सरकार ने ओबीसी आरक्षण को 7% तक सीमित करते हुए केवल छियासठ जातियों को आरक्षण देने का निर्णय लिया है
  • कलकत्ता हाई कोर्ट ने मई 2024 में ममता सरकार के ओबीसी में नई जातियों को शामिल करने के फैसले को रद्द कर दिया था
  • ममता सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे शुभेंदु सरकार ने वापस ले लिया है
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
कोलकाता:

पश्चिम बंगाल में जब से शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बने हैं, तभी से उनकी सरकार धड़ाधड़ फैसले लिए जा रही है. अब सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की आरक्षण व्यवस्था को लेकर बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने इसका नोटिफिकेशन जारी कर दिया है, जिसके बाद बंगाल में ओबीसी आरक्षण की व्यवस्था में बड़ा बदलाव हो गया है.

अब शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने आरक्षण को लेकर जो फैसला लिया है, उसके बाद बंगाल में ओबीसी आरक्षण 7% पर सिमट गया है. अब सिर्फ 66 जातियों को ही आरक्षण ही मिलेगा.

सरकार ने यह नोटिफिकेशन कलकत्ता हाई कोर्ट के 22 मई 2024 को दिए गए आदेश पर जारी किया है. हाई कोर्ट ने ओबीसी में 77 जातियों को शामिल करने के तत्कालीन ममता सरकार के फैसले को रद्द कर दिया था. इसके बाद ममता सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई थी. हाल ही में शुभेंदु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से भी उस याचिका को वापस ले लिया है.

यह भी पढ़ेंः भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर BSF को मिलेगी जमीन, NHAI भी बनाएगा हाइवे... शुभेंदु सरकार का फैसला

क्या था पूरा मामला?

2010 तक बंगाल में ओबीसी लिस्ट में 66 जातियां थीं. सितंबर 2010 में बंगाल सरकार ने ओबीसी लिस्ट में 42 नई जातियों को शामिल किया. इसके साथ ही ओबीसी आरक्षण को दो कैटेगरी- A और B में बांटा गया. A के लिए 10% और B के लिए 7% आरक्षण रखा गया.

मई 2012 में ममता सरकार ने 35 और जातियों को शामिल किया. इस तरह से जिन 77 नई जातियों को जोड़ा गया था, उनमें से 75 मुस्लिमों की थीं.

इस फैसले को कलकत्ता हाई कोर्ट में इस आधार पर चुनौती दी गई थी कि जिन जातियों को ओबीसी लिस्ट में रखा गया है, उनका आधार धर्म है. 22 मई 2024 को कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस पर फैसला सुनाया और 2010 के बाद जारी सभी ओबीसी सर्टिफिकेट को रद्द कर दिया. ममता सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.

यह भी पढ़ेंः बंगाल में शुभेंदु ने लगाई 'कट मनी प्रथा' पर लगाम, जानें क्या है ये?

शुभेंदु सरकार ने क्या किया?

अब शुभेंदु सरकार ने मंगलवार को एक नया नोटिफिकेशन जारी किया है. इसमें 66 जातियों की लिस्ट है. इसके साथ ही ओबीसी के लिए कुल आरक्षण को अब 7% तक सीमित कर दिया गया है.

इस आदेश में साफ किया गया है कि इन 66 जातियां को सरकारी नौकरियों और पदों में 7% आरक्षण मिलेगा.

Notification No 945-BCW Dt 18.05.2026 by priyank.kumar.dwivedi

इस लिस्ट में कपाली, कुर्मी, नाई (नापित), तांती, धानुक, कसाई, खंडैत, तुरहा, पहाड़िया मुस्लिम, देवांगा, हज्जाम (मुस्लिम) सहित 66 जातियां हैं. इस नोटिफिकेशन में यह भी साफ किया गया है कि अनुसूचित जाति से ईसाई धर्म में परिवर्तित होने वाले व्यक्तियों और उनके वंशजों को भी लिस्ट में शामिल किया गया है.

सरकार का मानना है कि यह फैसला हाई कोर्ट के आदेश के अनुरूप सामाजिक न्याय और पारदर्शिता लेकर आएगा. वहीं, जानकारों का कहना है कि इस फैसले से राज्य की आरक्षण नीति में बड़ा बदलाव आया है.

यह भी पढ़ेंः इमामों-मुअज्जिनों का भत्ता और पुजारियों का मानदेय... एक जून से बंगाल में सब बंद

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com