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इमामों-मुअज्जिनों का भत्ता और पुजारियों का मानदेय... एक जून से बंगाल में सब बंद

पश्चिम बंगाल की सरकार 1 जून से धार्मिक आधार पर मिलने वाली सरकारी मदद को बंद करने जा रही है. 1 जून से इमामों-मुअज्जिनों और पुजारियों को भत्ता नहीं मिलेगा.

इमामों-मुअज्जिनों का भत्ता और पुजारियों का मानदेय... एक जून से बंगाल में सब बंद
सीएम शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को दूसरी कैबिनेट बैठक की.
PTI
कोलकाता:

पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. सोमवार को दूसरी कैबिनेट बैठक में सरकार ने धर्म के आधार पर दी जाने वाली सरकारी मदद को बंद करने का फैसला लिया है. ये फैसला 1 जून से लागू होगा. इसका मतलब हुआ कि 1 जून से बंगाल में इमामों-मुअज्जिनों को मिलने वाला भत्ता और पुजारियों का मानदेय बंद हो जाएगा.

ममता बनर्जी की सरकार में इन सारी योजनाओं को शुरू किया गया था. ममता सरकार में इमामों को हर महीने 3,000 रुपये, मुअज्जिनों को 1,500 और 2,000 रुपये का भत्ता मिलता था.

शुभेंदु सरकार के इस फैसले से हजारों लोगों पर असर पड़ सकता है. ममता सरकार में इमामों-मुअज्जिनों और पुजारियों को हर महीने भत्ता मिलता था. लेकिन अब 1 जून से यह सब बंद हो जाएगा. इसके अलावा और भी कई योजनाओं पर इसका असर पड़ सकता है लेकिन डिटेल नोटिफिकेशन आने के बाद ही तस्वीर साफ हो पाएगी.

कौन-कौन सी योजनाओं पर पड़ेगा असर?

  • इमामों को भत्ता: 2012 में इस योजना को शुरू किया गया था. इमामों को हर महीने 2,500 रुपये मिलते थे. बंगाल में चुनाव से पहले ममता सरकार ने इसे 500 रुपये बढ़ाकर 3,000 रुपये कर दिया था.

  • मुअज्जिनों को भत्ता: इमामों के बाद ममता सरकार ने मुअज्जिनों को भी मासिक भत्ता देने की योजना शुरू की थी. मुअज्जिन मस्जिदों में नमाज के लिए नमाजियों को बुलाने का काम करते हैं. मुअज्जिनों को हर महीने 1,500 रुपये मिलते थे.

  • पुजारियों को भत्ता: 2020 में ममता सरकार ने मंदिरों के पुजारियों और पुरोहितों के लिए भी इस तरह के भत्ते की शुरुआत की थी. शुरुआत में 1,000 रुपये मिलते थे. इस साल चुनाव से पहले इसे बढ़ाकर 2,000 रुपये कर दिया गया था.

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कैबिनेट बैठक में दो बड़े फैसले

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि पश्चिम बंगाल की पिछली सरकार के दौरान फंड डिस्ट्रीब्यूशन में हुई अनियमितताओं की जांच के लिए एक आयोग का गठन किया गया है. उन्होंने बताया कि टीएमसी की सरकार में कथित तौर पर किए संस्थागत भ्रष्टाचार की जांच के लिए रिटायर्ड जज जस्टिस बिस्वजीत दास की अगुवाई में एक जांच आयोग बनाया गया है.

इसके अलावा महिलाओं पर अत्याचार के मुद्दे को लेकर भी एक कमेटी बनाई गई है. सीएम शुभेंदु ने बताया कि रिटायर्ड जस्टिस समापति चटर्जी की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया है. इस कमेटी में आईपीएस दमयंती सेन सदस्य सचिव होंगी. राज्य में महिलाओं के खिलाफ हुए अत्याचारों से जुड़े सभी मामलों की जांच की जाएगी. उन्होंने बताया कि एक महीने के भीतर रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है.

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और क्या-क्या फैसले लिए गए?

पश्चिम बंगाल में 9 मई को शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. पहली कैबिनेट बैठक में उन्होंने 6 बड़े फैसले लिए थे. अब सोमवार को दूसरी कैबिनेट बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए हैं.

दूसरी कैबिनेट मीटिंग में 1 जून से बंगाल में अन्नपूर्णा योजना लागू करने का फैसला लिया गया है. इसके तहत महिलाओं को 3 हजार रुपये की मदद मिलेगी. साथ ही महिलाओं को सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा भी मिलेगी.

महिला और बाल विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने बताया कि नागरिकता कानून (CAA) के तहत नागरिकता के लिए आवेदन करने वालीं और वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने के लिए ट्रिब्यूनल में आवेदन करने वालीं महिलाओं को भी अन्नपूर्णा योजना का लाभ मिलेगा.

उन्होंने बताया कि सरकार ने 7वें वेतन आयोग के गठन को भी मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही सरकार ने ओबीसी लिस्ट भी कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले के अनुसार रद्द कर दी है और आरक्षण पात्रता तय करने के लिए एक जांच कमेटी गठन करने का फैसला लिया है.

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Shreyashi
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