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वाराणसी से सिलीगुड़ी सिर्फ 3 घंटे में, यूपी-बिहार-बंगाल की बदलेगी तस्वीर, इस महीने शुरू होगा बुलेट ट्रेन का सर्वे

Varanasi to Siliguri Bullet Train: वाराणसी से सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के लिए जुलाई से हवाई और जमीनी सर्वे का काम शुरू होने जा रहा है.

वाराणसी से सिलीगुड़ी सिर्फ 3 घंटे में, यूपी-बिहार-बंगाल की बदलेगी तस्वीर, इस महीने शुरू होगा बुलेट ट्रेन का सर्वे
  • वाराणसी से सिलीगुड़ी तक हाई स्पीड बुलेट ट्रेन से यात्रा तीन घंटे में पूरी होगी
  • वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर में यूपी, बिहार और पश्चिम बंगाल के आठ प्रमुख स्टेशन प्रस्तावित किए गए हैं
  • इस बुलेट ट्रेन की रफ्तार 300 से 350 किलोमीटर प्रति घंटे होगी, जिससे पटना-वाराणसी सफर केवल 50 मिनट में होगा
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यूपी के आध्यात्मिक शहर वाराणसी से पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक का सफर महज तीन घंटे में पूरा होगा. यह सफर फिलहाल करीब 15 घंटे में पूरा होता है. यह संभव होगा वाराणसी-सिलीगुड़ी हाई स्पीड बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट से. केंद्र सरकार ने पहले ही इस रूट को मंजूरी दी है और बजट-2026 में इसका प्रस्ताव भी था. अब इस रूट पर जल्द सर्वे शुरू होने वाला है. इस बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के तहत वाराणसी से पटना और सिलीगुड़ी को जोड़ा जाएगा. नेशनल हाईस्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी NHSRCL ने इस कॉरिडोर के लिए एक स्पेशल सर्वे टीम का गठन कर दिया है, जो इसी साल जुलाई 2026 से हवाई और जमीनी सर्वे का काम शुरू करने जा रही है. आखिर इस बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का रूट क्या होगा और कौन-कौन से स्टेशन इस कॉरिडोर पर पड़ेंगे? आइए पूरी जानकारी बताते हैं.

15 घंटे का सफर 3 घंटे में होगा पूरा

फिलहाल वाराणसी से बंगाल के सिलीगुड़ी तक पहुंचने में ट्रेनों को करीब 12 से 15 घंटे का लंबा वक्त लगता है. करीब 700 से 744 किलोमीटर लंबे इस बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के बनने के बाद यह दूरी महज 2 घंटे 55 मिनट (लगभग 3 घंटे) में तय की जा सकेगी. इतना ही नहीं, बिहार की राजधानी पटना से वाराणसी का सफर तो सिर्फ 50 मिनट का रह जाएगा. इस रूट पर बुलेट ट्रेनें 300 से 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेंगी.

कहां-कहां बनेंगे स्टेशन?

यह बुलेट ट्रेन कॉरिडोर यूपी के वाराणसी से शुरू होकर बिहार होते हुए पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक पहुंचेगा. बिहार के हिस्से में पड़ने वाला करीब 650 किलोमीटर का ट्रैक मुख्य रूप से एलिवेटेड बनाया जाएगा. यानी इस कॉरिडोर का सबसे ज्यादा हिस्सा बिहार में होगा. इस रूट में ये स्टेशन प्रस्तावित हैं

  • वाराणसी (यूपी)
  • बक्सर (बिहार)
  • आरा (बिहार)
  • पटना (बिहार)
  • बेगूसराय (बिहार)
  • कटिहार (बिहार) 
  • किशनगंज (बिहार)
  • सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल)
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कैसे होगा बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का सर्वे?

इस पूरे प्रोजेक्ट की विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का लक्ष्य मार्च 2027 रखा गया है. इसके लिए एडवांस लेजर टेक्नोलॉजी के जरिए जुलाई 2026 से जमीन, पहाड़ों और नदियों का सटीक नक्शा तैयार किया जाएगा. इसके साथ ही जमीन पर मिट्टी की जांच और पिलर खड़े करने के लिए मार्किंग का काम भी शुरू होगा.

कब तक दौड़ेगी ट्रेन?

सर्वे और DPR को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद कॉरिडोर का मुख्य काम शुरू होगा. उम्मीद जताई जा रही है कि साल 2031 तक इस रूट पर देश की सबसे आधुनिक बुलेट ट्रेन दौड़ने लगेगी.

तीन राज्यों को होगा सीधा फायदा?

यह कॉरिडोर तीन प्रमुख राज्यों के लोगों को फायदा पहुंचाएगा. इससे यूपी के पूर्वांचल, पूरे बिहार और उत्तरी बंगाल के विकास को नई ऊंचाई मिलेगी. यह कॉरिडोर बनारस से नॉर्थ ईस्ट के प्रवेश द्वार यानी सिलीगुड़ी तक का रास्ता आसान कर देगा. सिलीगुड़ी भारत के चिकन नेक कहे जाने वाले इलाके के काफी करीब है. ऐसे में उस इलाके में इसका फायदा होगा और सुरक्षा के नजरिए से भी यह रूट काफी अहम बन जाएगा. इस रूट से सिक्किम और दार्जिलिंग जाने वाले लोगों को भी काफी फायदा होगा.

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