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राजनीतिक पारी थमी तो दोबारा शिक्षक बने बीजेपी के पूर्व सांसद रेबती त्रिपुरा, बतौर PGT टीचर किया ज्वाइन

बीजेपी के पूर्व सांसद रेबती त्रिपुरा अपने पुराने प्रोफेशन में लौट गए हैं. उन्होंने कहा कि उनके पास कोई विशेष राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं है इसलिए वो बतौर शिक्षक अपना काम फिर से शुरू कर रहे हैं.

राजनीतिक पारी थमी तो दोबारा शिक्षक बने बीजेपी के पूर्व सांसद रेबती त्रिपुरा, बतौर PGT टीचर किया ज्वाइन
रेबती त्रिपुरा ने बतौर शिक्षक अपनी पारी शुरू की (फोटो- एक्स)
नई दिल्ली:

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पूर्व सांसद रेबती त्रिपुरा ने राजनीति से दूरी बनाते हुए अपने पुराने पेशे शिक्षण के क्षेत्र में वापसी कर ली है. स्कूल शिक्षक से बीजेपी सांसद और अब फिर शिक्षक बने रेबती त्रिपुरा का कहना है कि अपने पुराने पेशे में लौटकर उन्हें न केवल उद्देश्य मिला है, बल्कि राजनीतिक जीवन में आए अचानक ठहराव के बाद भविष्य की आर्थिक सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी.

2019 में बीजेपी के टिकट पर बने सांसद 

त्रिपुरा के धलाई जिले के एक सुदूर गांव के निवासी रेबती त्रिपुरा ने राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर करने के बाद वर्ष 2001 में अगरतला के महात्मा गांधी मेमोरियल स्कूल में शिक्षक के रूप में नौकरी शुरू की थी. हालांकि, उनके मन में राजनीति में आने की इच्छा भी थी. वर्ष 2014 में बीजेपी में शामिल होने के साथ उन्हें मौका मिला. साल 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें पूर्वी त्रिपुरा संसदीय सीट से उम्मीदवार बनाया और वह चुनाव जीतकर सांसद बने.

2024 के चुनाव में रेबती का टिकट काटा 

शिक्षक से नेता बने रेबती त्रिपुरा को पिछले लोकसभा चुनाव में झटका लगा, जब बीजेपी ने इस सीट से त्रिपुरा राजपरिवार की सदस्य और टिपरा मोथा पार्टी (टीएमपी) के प्रमुख प्रद्योत किशोर देबबर्मा की बहन कृति देवी देबबर्मन को उम्मीदवार बनाया. रेबती बीजेपी की त्रिपुरा इकाई की कोर कमेटी के सदस्य तो बने रहे, लेकिन पिछले दो वर्षों से पार्टी की गतिविधियों में उनकी सक्रियता लगभग नहीं के बराबर रही. हाल ही में घोषित बीजेपी पदाधिकारियों की सूची में भी उनका नाम शामिल नहीं था.

राजनीतिक करियर लगभग ठहर जाने के बाद रेबती त्रिपुरा ने अपने मूल पेशे में लौटने का फैसला किया और 20 जुलाई को दोबारा स्कूल में कार्यभार संभाल लिया. पूर्व सांसद ने से कहा कि पिछले ढाई वर्षों में पार्टी की कोर कमेटी के सदस्य के रूप में मेरे पास वस्तुतः कोई काम नहीं था. इस दौरान मैंने केवल बीजेपी जनजाति मोर्चा की एक बैठक में हिस्सा लिया. फिलहाल मेरे पास कोई विशेष राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं है, इसलिए मैंने सरकारी स्कूल में स्नातकोत्तर शिक्षक के अपने पुराने पेशे में लौटने का फैसला किया है. 


तो स्वैच्छिक सेवानिवृति भी ले लूंगा!

उन्होंने कहा कि अगर विद्यार्थियों के साथ मुझे सहज महसूस हुआ, तो मैं पढ़ाना जारी रखूंगा और यदि मन नहीं लगा, तो स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति भी ले सकता हूं. कम से कम इस नौकरी से सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभ सुनिश्चित होंगे, जिनमें लगभग 50,000 रुपये मासिक पेंशन भी शामिल है। यह अच्छी-खासी राशि है.  स्कूल के कार्यवाहक प्रधानाध्यापक टीटू साहा ने कहा कि दोबारा कार्यभार संभालने के बाद से रेबती त्रिपुरा पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं. उन्होंने कहा कि रेबती त्रिपुरा ने सहकर्मियों और विद्यार्थियों के साथ अच्छा तालमेल बना लिया है और स्कूल परिवार ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया है.

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