"मुंबई में अब शांति नहीं मिलती"... अभिनेता संजय दत्त के इस कथित बयान पर महाराष्ट्र की राजनीति में भारी बवाल मचा हुआ है. एक तरफ जहां बीजेपी विधान परिषद सदस्य (MLC) परिणय फुके ने संजय दत्त पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें सीधे पाकिस्तान या यरवदा जेल जाने की नसीहत दे डाली, वहीं दूसरी तरफ संजय दत्त ने इस पर सफाई जारी कर इसे 'मुन्ना भाई' स्टाइल की गांधीगिरी और मजाक बताया है. उन्होंने साफ किया है कि उनका उद्देश्य किसी को भी दुख पहुंचाना नहीं था. इस बीच, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले भी संजय दत्त के समर्थन में उतर आए हैं और उन्होंने मुंबई में कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
#WATCH | Nagpur, Maharashtra | On actor Sanjay Dutt's reported statement, BJP MLC Parinay Fuke says, "Sanjay Dutt is not thinking straight; the effects of age are starting to show. He has launched several liquor brands, which might be taking a toll on him. Perhaps he finds peace in Pakistan or Yerawada Jail—if that is the case, he should simply go there..."
— ANI (@ANI) October 5, 2026
"संजय दत्त को यरवडा जेल में मिलेगी शांति"
संजय दत्त के इस कथित बयान को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधान परिषद सदस्य (MLC) परिणय फुके ने उन पर सीधा हमला बोला है. नागपुर में मीडिया से बात करते हुए परिणय फुके ने संजय दत्त के मानसिक संतुलन पर सवाल खड़े कर दिए और कहा कि उन पर अब उम्र का असर दिखने लगा है.परिणय फुके ने कहा, "संजय दत्त इस समय ठीक से सोच-समझ नहीं पा रहे हैं. उन पर अब बढ़ती उम्र का असर साफ दिखाई देने लगा है. उन्होंने कई शराब के ब्रांड लॉन्च किए हैं, शायद उसी का असर अब उन पर हावी हो रहा है." बीजेपी MLC ने ये भी कहा कि यदि उन्हें देश के माहौल से दिक्कत है, तो उनके पास दूसरे विकल्प भी मौजूद हैं. फुके ने तंज कसते हुए कहा, "शायद संजय दत्त को पाकिस्तान में या फिर पुणे की यरवदा जेल में ही शांति मिलती है. अगर ऐसा ही है, तो उन्हें बिना किसी देरी के सीधे वहीं चले जाना चाहिए."
मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूँ कि किसी भी व्यक्ति, समुदाय या संस्था की भावनाओं को ठेस पहुँचाना, उनका अपमान करना या उनका अनादर करना मेरा उद्देश्य कभी नहीं रहा है। मेरी टिप्पणियाँ एक स्क्रिप्टेड बातचीत के संदर्भ में की गई थीं, जिसका उद्देश्य हल्का-फुल्का और हास्यपूर्ण संवाद करना था। इसके पीछे की भावना मुन्ना भाई जैसी फिल्मों में दिखाई गई हास्य और व्यंग्य की शैली के समान थी, विशेष रूप से ‘गांधीगिरी' की उस सोच से प्रेरित थी, जिसका उद्देश्य प्रेम, एकजुटता और सद्भावना का संदेश देना था। दुर्भाग्यवश, मेरी बातों को उस मूल संदर्भ से अलग तरीके से समझा गया।
— Sanjay Dutt (@duttsanjay) October 4, 2026
संजय दत्त की सफाई: 'मुन्ना भाई' की गांधीगिरी थी
चौतरफा घिरने के बाद अभिनेता संजय दत्त ने बयान जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की है. उन्होंने कहा, "मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूँ कि किसी भी व्यक्ति, समुदाय या संस्था की भावनाओं को ठेस पहुंचाना, उनका अपमान करना या उनका अनादर करना मेरा उद्देश्य कभी नहीं रहा है." उन्होंने आगे कहा, "मेरी टिप्पणियां एक स्क्रिप्टेड बातचीत के संदर्भ में की गई थीं, जिसका उद्देश्य हल्का-फुल्का और हास्यपूर्ण संवाद करना था. इसके पीछे की भावना 'मुन्ना भाई' जैसी फिल्मों में दिखाई गई हास्य और व्यंग्य की शैली के समान थी, जो विशेष रूप से 'गांधीगिरी' की सोच से प्रेरित थी. जिसका उद्देश्य प्रेम, एकजुटता और सद्भावना का संदेश देना था. दुर्भाग्यवश, मेरी बातों को उस मूल संदर्भ से अलग तरीके से समझा गया."
'जब सेलिब्रिटी ही असुरक्षित हैं तो सरकार सोचे'
जहां एक तरफ बीजेपी नेता संजय दत्त की आलोचना कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस नेता नाना पटोले ने खुलकर अभिनेता का समर्थन किया है. नाना पटोले ने कहा, "हां, यहां हर कोई असुरक्षित महसूस कर रहा है. भारत जैसे महानगर में, जहां दुनिया भर से लोग रहते हैं, वहां लोग खुद को असुरक्षित पाते हैं. यहां हर रोज हत्याएं हो रही हैं, ऐसे में कलाकारों का असुरक्षित महसूस करना स्वाभाविक है क्योंकि उन्हें धमकियां मिलती हैं. संजय दत्त ने जो कहा वह गलत नहीं है. केंद्र और राज्य सरकार को यह समझना चाहिए कि अगर मशहूर हस्तियां भी सुरक्षित नहीं हैं, तो इस पर तुरंत ध्यान दिया जाना चाहिए."
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