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This Article is From Aug 02, 2025

देश की आन-बान-शान है तिरंगा, पढ़िए इसकी रोचक कहानी...

स्वतंत्रता सेनानी पिंगली वेंकैया ने बेजवाड़ा (अब विजयवाड़ा) में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में महात्मा गांधी को तिरंगे झंडे का डिजाइन भेंट किया था. शुरुआत में, इसमें हिंदू और मुस्लिम समुदायों के लिए लाल और हरे रंग की पट्टियां थीं.

देश की आन-बान-शान है तिरंगा, पढ़िए इसकी रोचक कहानी...
  • भारत का पहला राष्ट्रीय ध्वज सन 1906 में कोलकाता के पारसी बागान चौक पर फहराया गया था, जिसमें तीन पट्टियां थीं
  • मैडम भीकाजी कामा ने 1907 में जर्मनी में एक संशोधित ध्वज फहराया, जिसे बर्लिन समिति ध्वज के नाम से जाना गया
  • 1921 में पिंगली वेंकैया ने महात्मा गांधी को तिरंगे का प्रारंभिक डिजाइन भेंट किया था जिसमें चरखा था
नई दिल्ली:

दुनिया के हर स्वतंत्र राष्ट्र का अपना एक ध्वज होता है. यह एक स्वतंत्र देश का प्रतीक है. भारत ने भी ब्रिटिश शासन के विरोध में अपना ध्वज बनाया था. हालांकि, वक्त के साथ इसमें काफी बदलाव हुए और अंत में भारत को उसका तिरंगा मिला. तो अगर आप भी भारत के इस तिरंगे की कहानी जानना चाहते हैं तो हमारे इस आर्टिकल को अंत तक पढ़ें.

स्वतंत्रता आंदोलन और प्रारंभिक ध्वज

  • 1906: दरअसल, पहला राष्ट्रीय ध्वज कोलकाता (कलकत्ता) के पारसी बागान चौक पर फहराया गया था. इस ध्वज में तीन पट्टियां थीं - हरी (आठ सफेद कमल के साथ), पीली (देवनागरी में 'वंदे मातरम' लिखा हुआ), और लाल (अर्धचंद्र और सूर्य के साथ).
  • 1907: मैडम भीकाजी कामा ने जर्मनी के स्टटगार्ट में अंतर्राष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस में इसका एक संशोधित संस्करण फहराया, जिसे बर्लिन समिति ध्वज के रूप में जाना गया था.
  • शुरुआत में बनाए गए ये दोनों ही ध्वज ब्रिटिश शासन के प्रति विरोध को प्रतर्शित करते थे. 
  • 1917: एनी बेसेंट और बाल गंगाधर तिलक ने होमरूल आंदोलन के तहत एक नया ध्वज प्रस्तुत किया था.

फिर कैसे बना तिरंगा?

  • 1921: स्वतंत्रता सेनानी पिंगली वेंकैया ने बेजवाड़ा (अब विजयवाड़ा) में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में महात्मा गांधी को तिरंगे झंडे का डिजाइन भेंट किया था. शुरुआत में, इसमें हिंदू और मुस्लिम समुदायों के लिए लाल और हरे रंग की पट्टियां थीं. हालांकि बाद में गांधी के सुझाव पर सफेद पट्टी (अन्य समुदायों और शांति के लिए) जोड़ी गई थी. वहीं भारत की आत्मनिर्भरता और प्रगति का प्रतीक चरखा, बीच में रखा गया था.
  • 1931: यह सुनिश्चित करने के लिए कि झंडे का कोई सांप्रदायिक महत्व न हो, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर एक नया संस्करण अपनाया था. इसमें तीन पट्टियां शामिल थीं—सबसे ऊपर केसरिया, बीच में सफेद और सबसे नीचे हरा—और बीच में चरखा था. केसरिया साहस और बलिदान का प्रतीक था, सफेद शांति और सच्चाई का, और हरा आस्था और शौर्य और विकास का प्रतीक है.

आधुनिक भारत का तिरंगा

1947: जैसे-जैसे स्वतंत्रता निकट आ रहा था, संविधान सभा ने झंडे को अंतिम रूप देने के लिए एक समिति का गठन किया. 22 जुलाई, 1947 को स्वतंत्र भारत के ध्वज को औपचारिक रूप से अपनाया गया था. चरखे के स्थान पर अशोक चक्र को स्थापित किया गया, जो विधि, धर्म और जीवन चक्र का प्रतीक है.

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