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कौन होगा बागियों का नेता? नए सांसद की एंट्री से टीएमसी के बागी गुट में लीडरशिप को लेकर खींचतान शुरू

ममता बनर्जी से बगावत करने वाले सांसदों के बीच भी खींचतान शुरू हो गई है. नए सांसद सुदीप बंदोपाध्याय के आने से बागी सांसदों के बीच नेतृत्व को लेकर घमासान शुरू हो गया है.

कौन होगा बागियों का नेता? नए सांसद की एंट्री से टीएमसी के बागी गुट में लीडरशिप को लेकर खींचतान शुरू
काकोली घोष और सुदीप बंदोपाध्याय. (फाइल फोटो)
IANS
नई दिल्ली:

पश्चिम बंगाल में चुनावी हार के बाद से शुरू हुईं ममता बनर्जी की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं. इस बीच तृणमूल कांग्रेस से बगावत करने वाले नेताओं की भी ताकत भी बढ़ रही है. सूत्रों ने बताया कि ममता बनर्जी के वफादारों की लिस्ट से हटने वाले नए नेता सुदीप बंदोपाध्याय हैं, जो 6 बार के सांसद रह चुके हैं और बंगाल की राजनीति में एक बड़े नेता माने जाते हैं. 

तृणमूल के लिए यह और भी चिंता की बात इसलिए हो सकती है, क्योंकि वह सिर्फ बगावत में ही नहीं शामिल होंगे, बल्कि इस बगावत की अगुवाई भी कर सकते हैं. तृणमूल के बागी सांसदों की अगुवाई अब तक काकोली घोष दस्तीदार कर रही थीं लेकिन अब माना जा रहा है कि सुदीप बंदोपाध्याय उनकी जगह ले सकते हैं.

तृणमूल के कम से कम 19 सांसद और 16 से ज्यादा अपना अलग गुट बनाने पर आमादा हैं. काकोली घोष ने दावा किया है कि 22 सांसद उनके साथ हैं. वहीं, तीन राज्यसभा सांसदों ने भी इस्तीफा दे दिया है. 

बंदोपाध्याय बनेंगे बागियों के नेता!

ममता बनर्जी और उनके वफादार इस संकट को संभालने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन अब तक वे नेताओं के पार्टी छोड़ने के सिलसिले को रोकने में नाकाम रहे हैं. 

सूत्रों ने बताया कि सुदीप बंदोपाध्याय ने शनिवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और बागी सांसदों के गुट में शामिल होने का फैसला कर लिया है.

सुदीप बंदोपाध्याय पार्टी के सबसे अनुभवी सांसदों में से एक हैं और काफी राजनीतिक ताकत रखते हैं. सूत्रों ने बताया कि बागी सांसद उनसे उनके गुट की अगुवाई करने के लिए के लिए कह सकते हैं, क्योंकि कई सांसद काकोली घोष के नेतृत्व से सहज नहीं हैं. इससे संकेत मिलता है कि बागी गुट के अंदर भी खींचतान चल रही है.

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काकोली घोष का नया दावा

बागी सांसदों की नेता काकोली घोष दस्तीदाव ने रविवार को दावा किया कि टीएमसी से बगावत करने वाले सांसदों की संख्या बढ़कर 22 हो गई है.

इससे पहले टीएमसी के 19 बागी सांसदों के दस्तखत वाले दस्तावेज सामने आए थे. सुदीप बंदोपाध्याय के आने से यह संख्या बढ़कर 20 पहुंच गई. काकोली का दावा है कि दो और सांसद बागी गुट में शामिल हो रहे हैं और उनके आधिकारित तौर पर शामिल होने के बाद ही उनके नामों का खुलासा किया जाएगा.

हार के बाद बिखर गई पार्टी

चुनावी हार के बाद ही ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस बिखर गई. पहले बंगाल विधानसभा में बगावत हुई. बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी को सदन में विपक्ष का नेता बनाया गया. उनका दावा है कि उन्हें पार्टी के 80 में से 64 विधायकों का समर्थन हासिल है.

अगर यह आंकड़ा सही है तो बागी विधायकों और ऋतब्रत बनर्जी पर दल-बदल कानून लागू नहीं होगा, क्योंकि उनके पास पार्टी के दो-तिहाई से ज्यादा विधायक हैं. ऋतब्रत बनर्जी का कहना है कि वह फ्लोर टेस्ट का सामना करने के लिए भी तैयार हैं.

बनर्जी ने शुक्रवार को पत्रकारों से कहा, 'जिस तरह बागी सांसदों ने संसद में लोकसभा स्पीकर को अपनी लिस्ट सौंपी थी, उसी तरह बागी TMC विधायकों ने भी विधानसभा स्पीकर को अपनी लिस्ट सौंपी है. अभी हमारे साथ 64 विधायक हैं. अगर स्पीकर को जरूरी लगे, तो वे फ्लोर टेस्ट का आदेश दे सकते हैं. हम साबित कर देंगे कि हमारे साथ कितने विधायक हैं.'

पार्टी में बगावत की बड़ी वजह अभिषेक बनर्जी हैं. ज्यादातर बागी सांसद और विधायक ममता बनर्जी के बजाय अभिषेक बनर्जी से नाराज हैं. हाल ही में टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी को 'अहंकारी' बताया था.

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