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TMC सिंबल पर चुनाव आयोग कितने दिन में फैसला देगा, सुप्रीम कोर्ट ने 4 दिन में बताने को कहा

ममता बनर्जी की टीएमसी के नाम और सिंबल फ्रीज मामले में सुप्रीम कोर्ट ने EC से सोमवार तक टाइमलाइन मांगी है. ममता गुट ने कहा- नवंबर में कॉर्पोरेशन चुनाव हैं, जल्द फैसला नहीं हुआ तो असर पड़ेगा.

TMC सिंबल पर चुनाव आयोग कितने दिन में फैसला देगा, सुप्रीम कोर्ट ने 4 दिन में बताने को कहा
ममता बनर्जी की तरफ से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल कोर्ट में पेश हुए. (File Photo)
नई दिल्ली:

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह फ्रीज किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ दायर ममता बनर्जी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से सोमवार तक ये बताने को कहा है कि सिंबल फ्रीज करने को लेकर फाइनल फैसला कब तक लिया जाएगा. आयोग ने अभी उपचुनाव को देखते हुए अंतरिम फैसला लिया है. ममता बनर्जी गुट की तरफ से कहा गया कि अगर जल्द सिंबल पर आयोग फाइनल फैसला नहीं लेता है, तो नवंबर मे होने वाला कॉर्पोरेशन चुनाव प्रभावित होगा. इस मामले पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट अगली सुनवाई करेगा.

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई की. सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने ममता की तरफ से कहा कि वो चुनाव रोकने को नहीं कह सकते, लेकिन उन्हें पार्टी का मूल नाम और चुनाव चिह्न बनाए रहने दिया जाए.

'हमारे अस्तित्व का मामला...'

कपिल सिब्बल ने कहा कि ये हमारे अस्तित्व का सवाल है, कोर्ट समुचित उपाय करे. इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि उपाय तो एक ही है कि निर्वाचन आयोग इस मामले पर जल्द फैसला करे.

कपिल सिब्बल ने कहा कि चुनावी प्रकिया के बीच आयोग ने पार्टी के चुनाव चिन्ह को फ्रीज कर दिया. आयोग हर रोज नई नई मिसाल कायम कर रहा है. अगर सुप्रीम कोर्ट इस आदेश मे दखल नहीं देगा तो चुनाव आयोग आगामी चुनावों में भी ऐसा ही करेगा और चुनाव के बीच सिंबल बदल देगा.

चुनाव आयोग ने पिछले दिनों ममता बनर्जी के गुट का नाम 'ममता TMC' और सिंबल 'फुटबॉल प्लेयर' अलॉट किया है. जबकि बागी गुट को 'डेमोक्रेटिक TMC' नाम और 'लिफाफा' सिंबल अलॉट किया गया.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' के नाम और चुनाव चिन्ह पर दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच विवाद का चुनाव आयोग द्वारा उचित समय-सीमा के अंदर निपटारा किया जाना चाहिए. ⁠कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि वह सोमवार तक बताए कि इस विवाद के निपटारे में कितना समय लगेगा.

विद्रोही गुट की ओर से पेश हुए सीनियर वकील नीरज किशन कौल ने कहा, "अदालत यह कैसे कह सकती है कि 20 दिन या एक महीने में फैसला कर दिया जाए? ⁠ये विस्तृत सुनवाई वाले मामले हैं. हमें दस्तावेज और सबूत दाखिल करने हैं."

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कोर्ट ने कहा- पता कीजिए कितना वक्त लगेगा...

CJI ने चुनाव आयोग की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट दामा शेषाद्रि नायडू से कहा, "पता कीजिए कि विवाद के निपटारे में कितना वक्त लगेगा, कितने वक्त की जरूरत होगी. चुनाव आयोग स्वयं कह रहा है कि मौजूदा व्यवस्था उपचुनाव के लिए है. आयोग उचित समय ले सकता है."

सीजेआई ने आगे कहा कि सभी पक्षों को निष्पक्ष सुनवाई का मौका मिलना चाहिए और चुनाव आयोग को भी अपना स्वतंत्र विवेक लगाने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए.

चीफ जस्टिस ने चुनाव आयोग के वकील को आयोग से निर्देश लेकर सोमवार, 28 सितंबर को अदालत को समय-सीमा बताने को कहा है. 

इलेक्शन कमीशन ने दोनों गुटों के दावे के बीच मूल नाम 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' और ‘फूल-घास' चुनाव चिन्ह को फिलहाल फ्रीज किया है और आगामी उपचुनावों के लिए दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित किए हैं.

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