- बंगाल विधानसभा चुनाव के रुझानों में बीजेपी 193 सीटों पर आगे चल रही है जबकि टीएमसी केवल 97 सीटों पर आगे है.
- टीएमसी को रुझानों में 117 सीटों का नुकसान हुआ है और बीजेपी को लगभग उतनी ही सीटों का फायदा मिला है.
- ममता बनर्जी की 15 साल की अजेय छवि इस चुनाव में बीजेपी की जीत के कारण समाप्त होती दिख रही है.
Bengal Results: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के वोटों की गिनती के अभी तक सामने आए रुझान में तृणमूल कांग्रेस (TMC) को बड़ा झटका लगता नजर आ रहा है. ममता बनर्जी की नेतृत्व वाली टीएमसी सत्ता से बाहर होती दिख रही है. करीब साढ़े घंटे की काउंटिंग के रुझान में बंगाल में बीजेपी 193 सीटों पर आगे चल रही है. पिछले विधानसभा चुनाव में बंगाल में बीजेपी को 77 सीटों पर जीत मिली थी. ऐसे में रुझानों में बीजेपी को 116 सीटों का फायदा मिलता दिख रहा है. बीजेपी की इस ऐतिहासिक जीत का मतलब है कि बंगाल में पहली बार कमल खिलने जा रहा है.
TMC को जितनी सीटों का नुकसान, लगभग उतनी ही सीटों का BJP को फायदा
दूसरी ओर टीएमसी अभी 97 सीटों पर आगे चल रही है. पिछले चुनाव में टीएमसी 214 सीटों पर जीती थी. ऐसे में ममता बनर्जी की पार्टी को रुझानों में 117 सीटों का नुकसान होता दिख रहा है. यहां गौर करने वाली बात यह है कि टीएमसी को लगभग जितनी सीटों का नुकसान हो रहा है, करीब-करीब उतनी ही सीटों का बीजेपी को फायदा होता दिख रहा है. लेफ्ट और कांग्रेस का कमोवेश 2021 जैसा ही हाल है. कांग्रेस का स्कोर अभी शून्य है. जबकि लेफ्ट मात्र 2 सीट पर आगे चल रही है.
बंगाल में TMC के हार के 5 बड़े मायने
1. ममता बनर्जी की 'अजेय' छवि का अंत
बंगाल में टीएमसी की हार का सबसे बड़ा मतलब यह है कि ममता बनर्जी की अजेय छवि का अंत हो रहा है. पिछले 15 साल से बंगाल में ममता बेहद मजबूत थीं. 2014 में केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनने के बाद भी टीएमसी अपना दबदबा बनाए रखी थी. 2014, 2019, 2024 की तीन लोकसभा चुनाव के साथ-साथ 2016, 2021 के विधानसभा चुनाव और इस बीच हुए पंचायत चुनाव में भी टीएमसी बंगाल में अजेय रही. बीजेपी की ताकत बढ़ी जरूर, लेकिन इतनी नहीं कि वो ममता का किला ढहा सके. लेकिन इस बार बीजेपी ने वो कर दिखाया. अब ममता बनर्जी की अजेय छवि समाप्त हो चुकी है. देखना होगा कि इस हार के बाद ममता और टीएमसी आगे क्या रणनीति अपनाती है?
2. INDIA में ममता का कद कमजोर होगा
केवल बंगाल ही नहीं राष्ट्रीय स्तर पर भी विपक्षी गठबंधन INDIA में ममता का कद कमजोर होगा. इस समय राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन में कांग्रेस के बाद ममता बनर्जी का कद बड़ा था. लेकिन इस चुनाव में मिली हार के बाद निश्चित तौर पर ममता में न तो तेवर रहेगा न वो तेज. राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में भी ममता की पूछ पहले से कम होगी. अभी ममता बनर्जी विपक्षी नेताओं में बीजेपी पर सबसे तीखी हमला करने वाली नेताओं में से थी. लेकिन अब ममता का तेवर कितना तेज रहता है, देखना होगा.
3. बीजेपी का 'मिशन ईस्ट' सफल हुआ
बंगाल में बीजेपी की जीत के साथ ही बीजेपी का मिशन ईस्ट सफल होता नजर आ रहा है. बीजेपी की मूल पार्टी जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी के गृहराज्य बंगाल में बीजेपी अभी तक सरकार बनाने में सफल नहीं हो सकी थी. लेकिन सालों पुराना बीजेपी का यह सपना इस बार पूरा होता दिख रहा है. अब बंगाल में मिली जीत के बाद बीजेपी की ताकत और बढ़ेगी. हाल ही में बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बनी बीजेपी की सरकार के बाद अब यूपी, बिहार के साथ-साथ बंगाल में भी बीजेपी की सरकार होगी.

4. पूर्वोत्तर के बाद पूर्वी भारत के बड़े राज्य में बीजेपी का उदय
पूर्वोत्तर के कई राज्यों में सरकार बनाने के बाद अब बंगाल का किला फतह कर बीजेपी की ताकत अब और बढ़ जाएगी. बंगाल को पूर्वोत्तर का द्वार भी कहते है. पूर्वोत्तर के इस द्वार में बीजेपी अभी तक सत्ता हासिल नहीं कर सकी थी. लेकिन इस बार बीजेपी ने बंगाल में सरकार बनाकर एक बड़ी जीत हासिल कर ली है.
5. विपक्ष की आवाज होगी बेहद कमजोर
बंगाल में टीएमसी की हार के बाद विपक्ष की आवाज बेहद कमजोर होगी. क्योंकि विपक्ष का एक मजबूत साथी अपने किले में बुरी तरह से हार चुकी है. अब ममता बनर्जी और उनकी पार्टी को विपक्षी दलों की मीटिंग में उतना महत्व नहीं मिलेगा, जितना पहले मिला करता था. इस चुनाव का असर अगले साल यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव पर भी पड़ेगा. वहां विपक्ष के साथी अखिलेश हैं, जिन्हें अपनी जमीन बनाए रखने के लिए अभी से मेहनत शुरू करनी होगी.
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