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This Article is From Aug 31, 2025

जंगल की रानी का खौफनाक अंत, टाइगर रिजर्व में फैली सन्नाटे की दहशत

जहां बाघों की बढ़ती संख्या राज्य और देश के लिए खुशी की बात है, वहीं दूसरी ओर उनके बीच बढ़ते संघर्ष इस सफलता को चुनौती देते हैं.

जंगल की रानी का खौफनाक अंत, टाइगर रिजर्व में फैली सन्नाटे की दहशत
  • बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में छह साल की एक बाघिन का मृत पाया जाना वन्यजीव संरक्षण के लिए चिंताजनक है
  • बाघिन के शव पर गहरे चोट के निशान और टूटे नाखून क्षेत्रीय वर्चस्व के खूनी संघर्ष की पुष्टि करते हैं
  • वैज्ञानिक जांच के लिए नमूने राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों को भेजे गए हैं, जिससे मौत की सही वजह पता चलेगी

बिहार के इकलौते वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) से रविवार को ऐसी सनसनीखेज खबर सामने आई, जिसने वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को झकझोर कर रख दिया. राघिया फॉरेस्ट रेंज में मात्र 6 साल की एक बाघिन का शव मिला. जंगल की इस ‘रानी' की मौत ने ना केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि पूरे इलाके के लोगों को भी हैरान कर दिया है. लोग इस घटना से आश्चर्यचकित हैं. इसके बाद एनटीसीए प्रोटोकॉल के मुताबिक जंगल के रानी का अंतिम संस्कार किया गया.

संघर्ष की दर्दनाक तस्वीरें 

जांच में जुटे वन अधिकारियों ने बताया कि बाघिन के शरीर पर गहरी चोटों के निशान मिले. जबड़े और पैरों पर गंभीर घाव, टूटे हुए नाखून और झाड़ियों में बिखरे बाल, साफ इशारा करते हैं कि मौत आपसी संघर्ष में हुई है. वन अधिकारी यही मान रहे हैं कि जंगल में क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर दो बाघ आमने-सामने आ गए और इस खूनी जंग में बाघिन की जान चली गई.

वैज्ञानिक जांच जारी 

फील्ड डायरेक्टर ने बताया कि बाघिन का पोस्टमॉर्टम नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथॉरिटी (NTCA) के तय प्रोटोकॉल के तहत किया गया. जांच में कोई चूक न हो, इसके लिए अंगों के नमूने उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित IVRI (इंडियन वेटरनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट) और देहरादून स्थित WII (वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया) भेजे गए हैं. वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह का पता चल पायेगा.

बिहार का गौरव VTR खतरे में 

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व बिहार का इकलौता टाइगर रिजर्व है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इसमें करीब 70 बाघ मौजूद हैं. यह राज्य और देश दोनों के लिए गर्व की बात है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि जैसे-जैसे बाघों की संख्या बढ़ रही है, वैसे-वैसे जंगल में उनके बीच संघर्ष भी तेज हो रही है. बाघ स्वभाव से बेहद क्षेत्रीय (टेरिटोरियल) होते हैं और अपनी सीमा में दूसरे बाघ की मौजूदगी बर्दाश्त नहीं करते. ऐसे में, जैसे ही उनकी आबादी बढ़ती है, वैसे-वैसे आपसी लड़ाई की घटनाएं सामने आने लगती हैं.

संरक्षण के लिए चेतावनी 

यह घटना संरक्षण के लिए एक बड़ी चेतावनी है. जंगलों में बाघों के लिए सिर्फ बाहरी खतरे जैसे शिकार या मानव-वन्यजीव संघर्ष ही चिंता का विषय नहीं हैं, बल्कि बाघों के बीच होने वाले आपसी झगड़े भी अब उनकी जान के लिए गंभीर खतरा बन रहे हैं. ऐसे में जरूरी है कि रिजर्व में बाघों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित और विस्तारित किया जाए.

स्थानीय स्तर पर दहशत का माहौल 

बाघिन की मौत की खबर फैलते ही इलाके में दहशत और उदासी का माहौल है. ग्रामीणों और स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों ने इस पर गहरी चिंता जताई है. कई लोगों का कहना है कि जंगल की शान और पर्यावरण संतुलन की प्रतीक इस बाघिन की मौत पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है.

सरकार के लिए चुनौती 

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में यह घटना वन्यजीव संरक्षण की चुनौतियों को फिर से सामने ले आई है. एक ओर जहां बाघों की बढ़ती संख्या राज्य और देश के लिए खुशी की बात है, वहीं दूसरी ओर उनके बीच बढ़ते संघर्ष इस सफलता को चुनौती देते हैं. अब सवाल यह है कि क्या सरकार और वन विभाग ऐसे कदम उठाएंगे, जिससे जंगल के इन शाही शिकारियों को न सिर्फ जीने की पर्याप्त जगह मिले, बल्कि उनकी जान भी सुरक्षित रह सके.

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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