- तेलंगाना के निजामाबाद से बीजेपी सांसद धर्मपुरी अरविंद ने शहर का नाम बदलने का प्रस्ताव दिया है
- सांसद ने कहा है कि नगर निगम की मंजूरी के बाद नाम बदलकर निजामाबाद को इंदूर रखा जाएगा
- उनका दावा है कि इंदूर शहर का मूल नाम है जिसे आगामी स्थानीय चुनाव के बाद पुनः स्थापित किया जाएगा
निजामाबाद (तेलंगाना) से बीजेपी सांसद धर्मपुरी अरविंद ने शहर का नाम बदलने की घोषणा कर राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है. अरविंद ने कहा कि आगामी स्थानीय निकाय चुनावों के बाद नगर निगम के प्रस्ताव के जरिए निजामाबाद का नाम बदलकर “इंदूर” रखा जाएगा. उनका दावा है कि यह नाम शहर का मूल नाम है और इसे बहाल किया जाएगा. इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. विपक्षी दल इसे चुनावी रणनीति बता रहे हैं, जबकि बीजेपी समर्थक इसे सांस्कृतिक पहचान से जोड़ रही है.
नाम बदलने की राजनीति का बढ़ता चलन
भारत में शहर से लेकर सड़कों जैसी जगहों के नाम बदलने की राजनीति पिछले कुछ वर्षों में खूब सुर्खियों में रही है. कई राज्यों में सरकारें ऐतिहासिक, सांस्कृतिक या धार्मिक पहचान को सामने रखकर शहरों, सड़कों और स्थानों के नाम बदल रही हैं. समर्थक इसे अपनी विरासत और गौरव से जोड़ते हैं, जबकि दूसरी ओर आलोचक इसे विकास और प्रशासनिक प्राथमिकताओं से ध्यान भटकाने वाला कदम मानते हैं.
सियासी लाभ और सामाजिक असर
नाम बदलने के फैसले अक्सर चुनावी गणित और वोट बैंक की राजनीति से जुड़ जाते हैं. इससे समाज में ध्रुवीकरण बढ़ने का खतरा भी रहता है. राजनीति हलकों से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि नाम बदलने की बजाय बुनियादी सुविधाओं, शिक्षा और स्वास्थ्य पर ध्यान देना ज़रूरी है, क्योंकि नाम बदलने से आम जनता की समस्याओं का समाधान नहीं होता.
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