- SC ने सबरीमाला सोना चोरी मामले में पूर्व देवासम बोर्ड सदस्य के.पी. शंकरदास की याचिका पर कड़ी मौखिक टिप्पणी की.
- कोर्ट ने केरल HC के फैसले के उन पांच पैरा को हटाने से इनकार किया जिनमें शंकरदास की जिम्मेदारी बताई गई थी.
- SC ने कहा कि शंकरदास ने बोर्ड की बैठक के मिनट्स पर हस्ताक्षर किए हैं इसलिए वे जिम्मेदारी से नहीं बच सकते.
सबरीमाला सोना चोरी मामले में पूर्व त्रावणकोर देवासम बोर्ड (TDB) सदस्य के.पी. शंकरदास की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी मौखिक टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा कि उन्होंने भगवान को भी नहीं छोड़ा. जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एस.सी. शर्मा की पीठ ने केरल हाईकोर्ट के एकल पीठ के फैसले में उनके खिलाफ की गई कुछ टिप्पणियों को हटाने से इनकार कर दिया.
'शंकरदास जिम्मेदारी से नहीं बच सकते...'
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि देवस्वोम बोर्ड की बैठक के मिनट्स पर हस्ताक्षर करने के बाद शंकरदास जिम्मेदारी से नहीं बच सकते. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले के उन पांच पैरा को हटाने से भी इनकार कर दिया, जिनमें यह कहा गया था कि सोना चोरी मामले में देवासम बोर्ड के सदस्य के.पी. शंकरदास और विजयकुमार की जिम्मेदारी बनती है.
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सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि शंकरदास ने बोर्ड के फैसलों पर हस्ताक्षर किए हैं, ऐसे में वह खुद को पूरी तरह अलग नहीं कर सकते. अदालत ने कहा कि इस स्तर पर हाईकोर्ट की टिप्पणियों में हस्तक्षेप का कोई कारण नहीं है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि शंकरदास चाहें तो हाईकोर्ट में जाकर एकल पीठ के आदेश से आपत्तिजनक टिप्पणियां हटाने के लिए आवेदन कर सकते हैं.
स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला देते हुए भी राहत की मांग
शंकरदास ने अपनी याचिका में यह तर्क दिया था कि हाईकोर्ट ने उनकी बात सुने बिना उनके खिलाफ टिप्पणियां कीं, जिससे निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है. उन्होंने अपनी उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला देते हुए भी राहत की मांग की थी.
सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि यदि शंकरदास अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करते हैं, तो उस पर कानून के अनुसार, गुण-दोष के आधार पर विचार किया जाएगा.
प्रायोजक उन्नीकृष्णन पोट्टी ने 9 दिसंबर, 2019 को त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) को एक पत्र लिखा था. पत्र में उन्होंने कहा था, 'सबरीमाला गर्भगृह के मुख्य द्वार और द्वारपालक के सोने के काम को पूरा करने के बाद कुछ सोना बच गया है. वह इस अतिरिक्त सोने का उपयोग टीडीबी के समन्वय में एक जरूरतमंद लड़की की शादी के लिए करना चाहते हैं. उन्होंने इस संबंध में टीडीबी से मूल्यवान राय मांगी थी.'
दरअसल, मंदिर के गर्भगृह के बाहर द्वारपालक की पत्थर की मूर्तियों पर सोने की परत चढ़ी तांबे की शीटें लगी हैं. इन्हीं पर सोने की चोरी और गड़बड़ी के आरोप लगे हैं. हाई कोर्ट ने मामले पर स्वत: संज्ञान लिया और करीब 4.54 किलोग्राम सोने का पता न चलने पर चिंता जताई है. बताया जा रहा है कि साल 2019 में जब मूर्तियों की प्लेटिंग दोबारा की गई थी उसी समय से यह सोना गायब है. बताया जा रहा है कि इस सोने की कीमत करीब 7 करोड़ रुपये है.
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