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This Article is From Oct 07, 2025

सबरीमला मंदिर से 'गायब' सोने का राज खुला, शादी में इस्तेमाल करना चाहता था प्रायोजक

एनडीटीवी को प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रायोजक उन्नीकृष्णन पोट्टी ने 9 दिसंबर, 2019 को त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) को एक पत्र लिखा था. पत्र में उन्होंने कहा था, 'सबरीमाला गर्भगृह के मुख्य द्वार और द्वारपालक के सोने के काम को पूरा करने के बाद कुछ सोना बच गया है. वह इस अतिरिक्त सोने का उपयोग टीडीबी के समन्वय में एक जरूरतमंद लड़की की शादी के लिए करना चाहते हैं.

सबरीमला मंदिर से 'गायब' सोने का राज खुला, शादी में इस्तेमाल करना चाहता था प्रायोजक

सबरीमाला अय्यप्पन मंदिर में सोने की प्लेटों की कथित चोरी और भारी अनियमितताओं का मामला सामने आया है, जहां अदालती निष्कर्षों ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. मंदिर के प्रायोजक, उन्नीकृष्णन पोट्टी, ने 9 दिसंबर, 2019 को त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) को एक पत्र लिखकर बचे हुए सोने का इस्तेमाल एक जरूरतमंद लड़की की शादी के लिए करने की अनुमति मांगी थी. पोट्टी ने बताया था कि सबरीमाला गर्भगृह के मुख्य द्वार और द्वारपालक पर सोने का काम पूरा करने के बाद उनके पास कुछ सोना शेष है और इस संबंध में उन्होंने टीडीबी की राय मांगी थी. 

एनडीटीवी को प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रायोजक उन्नीकृष्णन पोट्टी ने 9 दिसंबर, 2019 को त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) को एक पत्र लिखा था. पत्र में उन्होंने कहा था, 'सबरीमाला गर्भगृह के मुख्य द्वार और द्वारपालक के सोने के काम को पूरा करने के बाद कुछ सोना बच गया है. वह इस अतिरिक्त सोने का उपयोग टीडीबी के समन्वय में एक जरूरतमंद लड़की की शादी के लिए करना चाहते हैं. उन्होंने इस संबंध में टीडीबी से मूल्यवान राय मांगी थी.'

दरअसल, मंदिर के गर्भगृह के बाहर द्वारपालक की पत्थर की मूर्तियों पर सोने की परत चढ़ी तांबे की शीटें लगी हैं. इन्हीं पर सोने की चोरी और गड़बड़ी के आरोप लगे हैं. विपक्ष का आरोप है कि त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड ने इन शीटों को मरम्मत के लिए हटाकर उन्नीकृष्णन पोट्टी नामक स्पॉन्सर को सौंप दिया था.

केरल हाई कोर्ट ने सबरीमला अय्यपन मंदिर में स्थित 'द्वारपालक' की मूर्तियों से गायब हुए सोने का पता लगाने के लिए विजिलेंस जांच के आदेश दिए हैं. हाई कोर्ट ने मामले पर स्‍वत: संज्ञान लिया और करीब 4.54 किलोग्राम सोने का पता न चलने पर चिंता जताई है. बताया जा रहा है कि साल 2019 में जब मूर्तियों की प्‍लेटिंग दोबारा की गई थी उसी समय से यह सोना गायब है. बताया जा रहा है कि इस सोने की कीमत करीब 7 करोड़ रुपये है. 

2019 में हुई थी प्‍लेटिंग 
जस्टिस राजा विजयराघवन वी और केवी जयकुमार की बेंच का ध्‍यान इस तरफ गया कि द्वारपाल की मूर्तियों की शोभा बढ़ाने वाली सोने से मढ़ी तांबे की प्‍लेटों को जब साल 2019 में नए सिरे से सोने की प्‍लेटिंग के लिए निकाला गया था तो उस समय उनका वजन 42.8 किलोग्राम था. लेकिन जब इन्‍हें इस काम के लिए चेन्‍नई की एक फर्म के सामने पेश किया गया तो उनका वजन कम हो गया था और यह 38.258 किलोग्राम पर आ गया था. 

वजन में गिरावट से चिंताजनक 
वजन में इतनी ज्‍यादा गिरावट यानी 4.54 किलोग्राम की कमी को 'चिंताजनक' बताया. इसके बाद कोर्ट ने इसकी एक विस्‍तृत और व्‍यापक जांच की मांग की. हाई कोर्ट ने यह सवाल भी सवाल उठाया कि मंदिर का प्रशासन संभालने वाला त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) उस समय इस महत्वपूर्ण वजन में कमी के बारे में जानकारी क्‍यों नहीं दे पाया. यह मामला मंदिर में लगी 'द्वारपालकों' की मूर्तियों से जुड़ा है, जो हिंदू मंदिर वास्तुकला में एक सामान्य विशेषता हैं.  'द्वारपाल' यानी द्वार का रक्षक होता है.

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