- दिल्ली के जंतर-मंतर पर सवर्ण समुदाय ने UGC के जातिगत भेदभाव विरोधी नियमों के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन किया
- सवर्ण आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सर्वेश पांडे ने UGC के नए नियमों को काला कानून बताते हुए विरोध जताया
- सवर्ण आर्मी की मांग है कि आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया जाए और SC/ST एक्ट को समाप्त किया जाए
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के जातिगत भेदभाव को रोकने वाले नियमों पर भले ही सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी हो लेकिन इस पर बवाल थमता नजर नहीं आ रहा है. रविवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर सवर्ण समुदाय ने बड़ा प्रदर्शन किया. सवर्ण आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सर्वेश पांडे का कहना है कि देश की आजादी और भारत की अखंडता में सवर्ण समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. उनका आरोप है कि आजादी के बाद से ही सामान्य वर्ग के हितों की अनदेखी और उनका शोषण किया जा रहा है.
मांगें नहीं मानीं तो... सवर्ण आर्मी की चेतावनी
सर्वेश पांडे ने UGC के नए नियमों को काला कानून बताया है. उन्होंने कहा कि सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ शिकायत करने वाले की पहचान गुप्त रखी जाएगी और यदि शिकायत झूठी पाई जाती है, तो शिकायतकर्ता पर कोई कार्रवाई नहीं होगी. उन्होंने इन नियमों को सामान्य वर्ग के बच्चों को शिक्षा के समान अवसरों से दूर करने की एक कोशिश बताया है.
उन्होंने कहा कि हमारी सरकार से मांग है कि जैसे SC/ST एक्ट में संशोधन कर सुरक्षा दी गई, वैसे ही सामान्य वर्ग के बच्चों के भविष्य के लिए भी कानूनी सुरक्षा और संशोधन सुनिश्चित किए जाएं. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अभी विरोध प्रदर्शन केवल दिल्ली के जंतर-मंतर तक सीमित है लेकिन मांगें नहीं मानी गईं तो इस आंदोलन को देश के हर गांव, गली और मोहल्ले तक बड़े स्तर पर ले जाया जाएगा.
क्या है सवर्ण आर्मी की मांगें?
सवर्ण आर्मी की मांग है कि आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया जाए, UGC नियमों को वापस लिया, SC/ST एक्ट को खत्म किया जाए और सवर्ण आयोग का गठन किया जाए.

प्रदर्शनकारियों का क्या है कहना?
जंतर मंतर पर सवर्ण आर्मी के प्रदर्शन में पहुंचे प्रदर्शनकारियों का मानना है कि वर्तमान कानून और आरक्षण व्यवस्था समाज को खंडित कर रही है. उनका कहना है कि आजादी के 80 साल बाद अब आरक्षण का आधार बदला जाना चाहिए और सवर्णों के हितों की रक्षा के लिए कानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए.
शैलेंद्र पांडे ने यूजीसी के नए नियमों को काला कानून बताते हुए कहा कि इससे सवर्ण बच्चों के भविष्य पर सीधा आघात होगा. विनोद दुबे ने कहा कि समाज में वास्तविक समानता लाने के लिए जातिगत व्यवस्था को खत्म कर आर्थिक आधार पर अवसर दिया जाए.
प्रदर्शन में पहुंचे राहुल द्विवेदी का कहना है कि ऐसे कानून स्कूली बच्चों के बीच भेदभाव बढ़ाएंगे, जिससे देश कमजोर होगा. उन्होंने सरकार से जनता को बांटने के बजाय रोजगार और शिक्षा पर ध्यान देने की अपील की. रिषभ तिवारी ने जेएनयू जैसे संस्थानों में सवर्णों के खिलाफ लगने वाले नारों का हवाला देते हुए पूछा कि क्या सवर्णों का शोषण नहीं हो रहा?
आनंद द्विवेदी जो प्रयागराज से जंतर मंतर पहुंचे, उन्होंने राजनीतिक दलों पर आरोप लगाया कि संविधान समानता की बात करता है, लेकिन नेता अपनी राजनीति के लिए ब्राह्मणवाद को गाली देकर जातिवाद फैला रहे हैं. वहीं, पवन पांडे ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि यह काला कानून वापस नहीं लिया गया, तो सवर्ण समाज सत्ता परिवर्तन करने की क्षमता रखता है. उन्होंने नाराजगी जताई कि 95% सवर्ण वोट मिलने के बावजूद सरकार उनके खिलाफ कानून ला रही है.
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