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This Article is From Sep 17, 2020

सांसदों, विधायकों के खिलाफ लंबित मामले जल्‍द निपटाने के लिए हाईकोर्ट एक्‍शन प्‍लान पेश करें: SC

सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों से सांसदों/ विधायकों के खिलाफ उन मामलों को तत्काल मामले उठाने का अनुरोध किया जिन पर पहले रोक लगाई गई है, कोर्ट ने इन पर रोजाना सुनवाई कर फैसला देने को कहा है.

सांसदों, विधायकों के खिलाफ लंबित मामले जल्‍द निपटाने के लिए हाईकोर्ट एक्‍शन प्‍लान पेश करें: SC
दागदार माननीयों के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्टों से एक्‍शन प्‍लान मांगा है
  • हाईकोर्टो से एक हफ्ते ESA कार्ययोजना पेश करने को कहा
  • कहा, ऐसे मामले तत्‍काल उठाएं जिन पर पहले रोक लगाई गई है
  • मामलों को तय करने में कोविड-19 बाधा नहीं होनी चाहिए
नई दिल्ली:

वर्तमान और पूर्व विधायक/ सांसदों (Tainted present and former MLAs, MPs) के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों को स्पेशल कोर्ट में जल्द निपटाने (speedy trials)के लिए दाखिल याचिका को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने उच्च न्यायालयों को समयबद्ध तरीके से लंबित मामलों को निपटाने के लिए एक्शन प्लान पेश करने को कहा है. उच्च न्यायालयों को एक सप्ताह के भीतर शीर्ष अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपनी कार्य योजना प्रस्तुत करनी है. इसके साथ ही SC ने उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों से सांसदों/ विधायकों के खिलाफ उन मामलों को तत्काल मामले उठाने का अनुरोध किया जिन पर पहले रोक लगाई गई है, कोर्ट ने इन पर रोजाना सुनवाई कर फैसला देने को कहा है.

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सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि इन मामलों को तय करने के लिए COVID-19 बाधा नहीं होनी चाहिए. SC ने यह भी कहा कि सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों का तेजी से निपटारा हो क्योंकि ये राजनीति में अपराधीकरण की लहर को बढ़ाने के कारण है. वर्तमान और पूर्व सांसदों/ विधायकों पर केस उनके प्रभाव के कारण बाधित हुए.सांसद/ विधायक अपने मतदाताओं के विश्वास पर रहते हैं  और उन्हें अपने प्रतिनिधियों के बारे में पता होना चाहिए. 

इससे पहले एमिकस क्यूरी विजय हंसारिया ने बुधवार को  SC को बताया था कि 350 मामलों पर उच्च न्यायालयों द्वारा रोक है. उच्च न्यायालयों को एक महीने में रोक हटाने को कहा जाए. बड़ी समस्या गवाहों के नहीं आने की है, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इसे हल किया जा सकता है. ज्यादातर अदालतों का कहना है कि उनके पास इंटरनेट की सुविधा और बुनियादी ढांचा नहीं है. एमिकस क्यूरी ने सुझाव दिया था कि हाईकोर्ट को एक वर्ष के भीतर सांसदों/ विधायकों के खिलाफ मामलों को निपटाने के लिए खाका प्रस्तुत करने के लिए कहा जा सकता है. उन्होंने सांसदों/ विधायकों (वर्तमान और पूर्व) के खिलाफ अदालत में 175 भ्रष्टाचार के मामलों को भी बताया. उनके खिलाफ लंबित 4400 मामलों में 350 मामले हाईकोर्ट के हैं. रिपोर्ट में एमिकस क्‍यूरी ने कहा है कि सांसदों/ विधायकों ( वर्तमान और पूर्व) के खिलाफ विभिन्न अदालतों में कुल 4442 मामले लंबित हैं जिनमें सांसद और विधायकों के लिए विशेष अदालत भी शामिल हैं. हाईकोर्ट में लंबित 2556 मामलों में वर्तमान आरोपी व्यक्ति वर्तमान विधायक व सांसद हैं. यूपी इस सूची में सबसे ऊपर है उत्तर प्रदेश में 1217 मामले लंबित हैं, जिनमें से 446 मामलों में वर्तमान विधायक/ सासंद आरोपी हैं. वर्तमान विधायक/ सासंदों में से 35 और पूर्व विधायक/ सांसद में से 81 पर जघन्य अपराधों का आरोप है, जिसमें आजीवन कारावास की सजा है. 

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