- सुप्रीम कोर्ट ने कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद मामले की सुनवाई दो हफ्ते के लिए स्थगित कर दी है
- कोर्ट ने हाईकोर्ट को मामला प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर पुनः विचार के लिए वापस भेजने के संकेत दिए हैं
- सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की ओर से सभी कृष्ण भक्तों के प्रतिनिधित्व का फैसला लेने पर आपत्ति जताई है
सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद पर सुनवाई हुई. इस दौरान अदालत ने हाईकोर्ट को मामला वापस भेजने के संकेत देते हुए सुनवाई दो हफ्ते के लिए टाल दी है. कोर्ट ने संकेत दिया कि वह प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर मामले को दोबारा इलाहाबाद हाईकोर्ट भेज सकता है. सुप्रीम कोर्ट की आपत्ति मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि सभी वादियों को यह नोटिस नहीं दिया गया था कि हाईकोर्ट यह तय करने जा रहा है कि भगवान श्रीकृष्ण के सभी भक्तों का प्रतिनिधित्व कौन करेगा.
वकील बोले- किसी समझौते की जानकारी नहीं
जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने कहा कि उन्हें किसी समझौते की बातचीत की जानकारी नहीं है. पिछली सुनवाई में अदालत को बताया गया था कि विभिन्न वादियों के बीच विवादित स्थल को लेकर किसी संभावित समझौते पर चर्चा चल रही है.इस पर पीठ ने अन्य पक्षों से भी जानकारी मांगी, लेकिन किसी ने ऐसी बातचीत की पुष्टि नहीं की.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट को सूट नंबर 1 के वादियों को स्पष्ट रूप से नोटिस देना चाहिए था कि वह भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों के प्रतिनिधित्व के प्रश्न पर फैसला करने जा रहा है.पीठ ने मौखिक रूप से यह भी कहा कि सूट नंबर 17 में दायर आवेदन का विषय कुछ और था, जबकि हाईकोर्ट ने उससे आगे जाकर प्रतिनिधित्व का फैसला कर दिया.
हाईकोर्ट ने दी थी मुकदमा चलाने की अनुमति
विवाद से जुड़े 18 मुकदमे इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित है.इनमें से 15 मुकदमों को एक साथ जोड़कर सुनवाई की जा रही है, जबकि बाकी मुकदमे अलग सूचीबद्ध हैं.सूट नंबर 17 भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की ओर से ‘नेक्स्ट फ्रेंड' के माध्यम से दायर किया गया था. जुलाई 2025 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मुकदमे के वादियों को भगवान श्रीकृष्ण के सभी भक्तों के लाभ के लिए प्रतिनिधि क्षमता में मुकदमा चलाने की अनुमति दी थी. इसी आदेश को सूट नंबर 1 के वादियों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.
सूट नंबर 17 में मूल आवेदन मुस्लिम समुदाय की ओर से प्रतिवादियों को प्रतिनिधि के रूप में मानने की अनुमति से संबंधित था.सुप्रीम कोर्ट की मौजूदा आपत्ति यही है कि हाईकोर्ट ने इसके अलावा वादियों को सभी कृष्ण भक्तों का प्रतिनिधि मानने का फैसला भी कर दिया.सुनवाई के दौरान पीठ ने संकेत दिया कि वह मामले को हाईकोर्ट वापस भेजने के पक्ष में है. हालांकि, बुधवार की सुनवाई में अंतिम आदेश पारित नहीं किया गया और मामले को करीब दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया गया.
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