आप अपने किचन में जिस देसी घी को शुद्ध घी समझ कर खा रहे हैं वो असल में आपके लिए धीमा जहर साबित हो सकता है. ये बात हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि भोपाल में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई में ऐसी ही बात सामने आई है जिसने हर किसी को चौंका दिया है. यहां खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा बाजार से लिए गए तीन बड़े ब्रांड के घी के सैंपल लैब जांच में पूरी तरह फेल पाए गए हैं. लैब रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि इन सैंपलों में वनस्पति तेल की मिलावट के साथ-साथ तय सीमा से 12 से 15 गुना ज्यादा सीसा यानी लेड मिला है, जो इंसान के शरीर को अंदर से खोखला कर रहा है. इसके साथ ही हम आपको ये भी बता दें कि ये रिपोर्ट सिर्फ भोपाल में हुई जांच के बाद सामने आया है ...देश के दूसरे शहरों से फिलहाल ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं है.
FSSAI मानकों पर फेल हुए तीन बड़े ब्रांड
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी शिवराज पावक ने बताया कि खाद्य सुरक्षा विभाग ने बाजार से गोवर्धन प्योर काउ घी, द्वारकेश घी और धौलपुर फ्रेश प्रीमियम देसी घी के सैंपल एकत्र किए थे. अधिकृत लैब से आई रिपोर्ट में ये तीनों ही सैंपल FSSAI के तय मानकों पर पूरी तरह फेल साबित हुए हैं. रिपोर्ट आने के बाद अब खाद्य सुरक्षा विभाग संबंधित कंपनियों और विक्रेताओं पर खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत केस दर्ज करने की तैयारी कर रहा है.

Adulterated Ghee: भोपाल में मिलावटी घी की जांच करते खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी
गोवर्धन और धौलपुर फ्रेश में मिला घातक लेड
जांच में सबसे चौंकाने वाले आंकड़े गोवर्धन और धौलपुर फ्रेश घी के सामने आए हैं. गोवर्धन घी में सीसा 0.241 mg/kg मिला है, जबकि FSSAI की निर्धारित सीमा केवल 0.02 mg है, यानी इसमें 12 गुना ज्यादा लेड पाया गया. वहीं धौलपुर फ्रेश घी में स्थिति और भी गंभीर है, जहां 0.296 mg लेड मिला है जो तय सीमा से 14.8 गुना अधिक है.
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वनस्पति और तिल के तेल की मिलावट का खुलासा
तीसरे सैंपल द्वारकेश घी में बीटा-सिटोस्टेरॉल 2.38 mg पाया गया, जो शुद्ध घी में बिल्कुल नहीं होना चाहिए. यह इस बात का साफ संकेत है कि इसमें वनस्पति तेल मिलाया गया है. इसके अलावा सैंपलों की BR रीडिंग और आयोडीन वैल्यू में भी भारी गड़बड़ी मिली है. धौलपुर फ्रेश घी में बाडाइन टेस्ट पॉजिटिव आया है, जिससे इसमें तिल का तेल मिलाए जाने की पुष्टि हुई है. खाद्य विभाग ने तीनों आरोपी कंपनियों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. सैंपल फेल होने की स्थिति में 3 लाख से लेकर 10 लाख रुपये तक के जुर्माने और लाइसेंस निरस्त करने तक का प्रावधान है. भोपाल में हुए इस बड़े खुलासे के बाद शिवराज पावक अब पूरे मध्य प्रदेश में सघन जांच अभियान चला रहा है और मिलावटखोरों के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराने जा रहा है.

Adulterated Ghee: भोपाल में मिलावटी घी की जांच करने के बाद इस सारे माल को अधिकारियों ने खतरनाक बताया है.
सेहत के लिए बेहद खतरनाक है सीसा और बीटा-सिटोस्टेरॉल
भोपाल के CMHO डॉ मनीष शर्मा के मुताबिक लेड की कोई भी मात्रा शरीर के लिए सुरक्षित नहीं होती है. रोज लेड युक्त घी खाने से बच्चों का IQ लेवल 10 से 15 पॉइंट तक गिर सकता है, बच्चे चिड़चिड़े हो सकते हैं और उनका दिमागी विकास हमेशा के लिए रुक सकता है. बड़ों में यह किडनी सिकुड़ने, लिवर डैमेज, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक का खतरा चार गुना बढ़ा देता है, जबकि महिलाओं में प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भपात और जन्मजात विकृति का कारण बनता है. दूसरी ओर, शुद्ध घी के नाम पर पाम ऑयल और डालडा की मिलावट से मिलने वाला बीटा-सिटोस्टेरॉल सीधे कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है और नसों में ब्लॉकेज पैदा करता है. लंबे समय तक इसके सेवन से मोटापा, डायबिटीज और अंगों का डैमेज होना तय है. इसके अलावा BR रीडिंग फेल होने का मतलब है कि घी का केमिकल स्ट्रक्चर बदल चुका है, जो पचने के बजाय लिवर पर अतिरिक्त लोड डालता है और अपच, एसिडिटी व फैटी लिवर की समस्या पैदा करता है.
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