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NEET प्रदर्शन पर कथित पुलिस ज्यादती मामला: सुप्रीम कोर्ट सख्त, बोला- शिकायतों के इंतजार में जांच नहीं रोक सकते

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कमेटी को मिली सामग्री के आधार पर जांच की दिशा तय करनी चाहिए और रिपोर्ट प्रस्तुत करने की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए. अदालत ने यह भी संकेत दिया कि शिकायतों की संख्या कम होना जांच को लंबित रखने का पर्याप्त कारण नहीं हो सकता.

NEET प्रदर्शन पर कथित पुलिस ज्यादती मामला: सुप्रीम कोर्ट सख्त, बोला- शिकायतों के इंतजार में जांच नहीं रोक सकते
फाइल फोटो
NDTV

NEET विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस ज्यादती की जांच कर रही हाई-पावर्ड कमेटी को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट संदेश दिया है कि शिकायतें कम मिलने या नई शिकायतों के इंतजार में जांच की प्रक्रिया अनिश्चितकाल तक नहीं रोकी जा सकती. अदालत ने कहा कि कमेटी अब तक उपलब्ध सामग्री और शिकायतों के आधार पर जांच आगे बढ़ाए और अपनी फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट सौंपना शुरू करे.

सुनवाई के दौरान हाई-पावर्ड कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसे अब तक अपेक्षाकृत कम शिकायतें प्राप्त हुई हैं. इस पर अदालत ने कहा कि जांच का काम केवल शिकायतों के लगातार आने पर निर्भर नहीं रह सकता. यदि कमेटी के पास उपलब्ध जानकारी है तो वह उसके आधार पर संबंधित अधिकारियों से जवाब मांग सकती है और तथ्यों की पड़ताल आगे बढ़ा सकती है.

जांच को हमेशा के लिए रोक नहीं सकते

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कमेटी को मिली सामग्री के आधार पर जांच की दिशा तय करनी चाहिए और रिपोर्ट प्रस्तुत करने की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए. अदालत ने यह भी संकेत दिया कि शिकायतों की संख्या कम होना जांच को लंबित रखने का पर्याप्त कारण नहीं हो सकता.

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकीलों को भी अहम जिम्मेदारी सौंपी. अदालत ने कहा कि जिन लोगों के पास कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़ी शिकायतें, दस्तावेज, वीडियो, तस्वीरें या अन्य साक्ष्य हैं, उनकी सामग्री कमेटी तक पहुंचाई जाए ताकि जांच के दौरान उन पर भी विचार किया जा सके.

बेंच ने यह भी गौर किया कि याचिकाकर्ताओं की ओर से जिन दस्तावेजों और शिकायतों को दाखिल किए जाने का दावा किया गया है और जो सामग्री वास्तव में कमेटी तक पहुंची है, उसके बीच अंतर दिखाई दे रहा है. अदालत ने इस अंतर को दूर करने की जरूरत बताई ताकि जांच पूरी तस्वीर के आधार पर आगे बढ़ सके.

वकीलों से अदालत ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों से कहा कि वे जांच प्रक्रिया में हाई-पावर्ड कमेटी का सहयोग करें और कथित पीड़ितों को सामने आकर अपनी शिकायतें दर्ज कराने के लिए प्रोत्साहित करें. अदालत का मानना है कि इससे जांच अधिक प्रभावी और तथ्यपरक हो सकेगी.

अंत में कोर्ट ने दोहराया कि शिकायतें कम मिलने के आधार पर जांच को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जा सकता. हाई-पावर्ड कमेटी का दायित्व है कि वह उपलब्ध तथ्यों और रिकॉर्ड के आधार पर जांच पूरी करे और अपनी फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट प्रस्तुत करे.

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